Uttarakhand Election 2027: बीजेपी ने तेज की संगठनात्मक तैयारी, कांग्रेस के सामने एकजुटता की चुनौती
BJP intensifies organizational preparations, Congress faces unity challenge

बीजेपी ने बढ़ाई संगठनात्मक सक्रियता
बीजेपी ने चुनावी तैयारियों के तहत प्रदेश संगठन और केंद्रीय नेतृत्व के बीच समन्वय मजबूत करने की कोशिश शुरू की है। पार्टी ने राम माधव को प्रदेश प्रभारी बनाया है, जबकि दो सह-प्रभारियों की भी जिम्मेदारी तय की गई है। राम माधव के लगातार उत्तराखंड दौरों और संगठनात्मक बैठकों को इसी तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है।
पार्टी का जोर बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने, कार्यकर्ताओं से संवाद बढ़ाने और सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने पर है। हालांकि, सत्ता में रहते हुए बीजेपी के सामने रोजगार, पलायन, भर्ती प्रक्रियाओं, महंगाई और स्वास्थ्य सुविधाओं जैसे मुद्दों पर जनता की अपेक्षाओं का जवाब देने की चुनौती भी होगी।
वरिष्ठ पत्रकार जय सिंह रावत के मुताबिक, उत्तराखंड के पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों की राजनीतिक परिस्थितियां अलग हैं। इसलिए बीजेपी को स्थानीय मुद्दों, क्षेत्रीय जरूरतों और कार्यकर्ताओं की नाराजगी को ध्यान में रखकर रणनीति बनानी होगी।
कांग्रेस में नेतृत्व और समन्वय पर सवाल
दूसरी ओर, कांग्रेस के भीतर नेताओं के बीच तालमेल को लेकर चर्चा तेज है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की धन्यवाद यात्रा और उनके बयानों पर प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा की नाराजगी की खबरों के बाद पार्टी की अंदरूनी स्थिति चर्चा में रही। 9 अक्टूबर को हरीश रावत की दिल्ली में सैलजा से मुलाकात भी हुई।
कांग्रेस के सामने चुनौती सरकार को घेरने के साथ-साथ अपने चुनावी अभियान को एक दिशा देने की है। पार्टी रोजगार, महंगाई, पलायन और भर्ती प्रक्रियाओं को प्रमुख मुद्दा बना सकती है। लेकिन इन मुद्दों को जनसमर्थन में बदलने के लिए नेताओं के बीच सहमति और बूथ स्तर तक सक्रिय संगठन जरूरी होगा।
दोनों दलों के सामने अलग-अलग चुनौतियां
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का कहना है कि उनकी पार्टी लगातार जनता के बीच सक्रिय रहती है और चुनावी कामकाज पहले से जारी है। इसके विपरीत, उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष संजय पालीवाल ने बीजेपी की तैयारियों को दिखावा बताते हुए दावा किया कि कांग्रेस जनता से जुड़े मुद्दों पर संघर्ष कर रही है।
वरिष्ठ पत्रकार किरण कुमार शर्मा के अनुसार, चुनावी तैयारियों का आकलन केवल नेताओं के दौरों और बैठकों से नहीं किया जा सकता। असली महत्व इस बात का है कि इन गतिविधियों का असर कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के बीच कितना दिखता है।
2027 के चुनाव में बीजेपी की संगठनात्मक सक्रियता और कांग्रेस की एकजुटता दोनों की परीक्षा होगी। फिलहाल, किसी भी दल की जीत या हार का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी। उम्मीदवारों का चयन, स्थानीय समीकरण और चुनाव के समय मतदाताओं का रुख अंतिम परिणाम तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

