Stock Market Crash: अमेरिका-ईरान तनाव से दहला बाजार, सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट, क्रूड $96 के पार
Stock Market Crash: Markets shaken by US-Iran tensions; Sensex and Nifty witness sharp decline; crude oil crosses $96.
बुधवार की सुबह भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद उथल-पुथल भरी रही। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव का असर सीधे ग्लोबल मार्केट पर दिखाई दिया। इसका दबाव भारतीय बाजार पर भी पड़ा और कारोबार शुरू होते ही निवेशकों में बिकवाली तेज हो गई। सेंसेक्स करीब 700 अंक तक टूट गया, जबकि निफ्टी में भी 200 अंकों से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली।
अचानक आई इस गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। घरेलू बाजार में कमजोरी की बड़ी वजह किसी कंपनी के नतीजे या घरेलू आर्थिक आंकड़े नहीं, बल्कि मध्य पूर्व में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। इस Stock Market Crash ने एक बार फिर दिखा दिया कि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का असर भारतीय बाजार पर कितनी तेजी से पड़ सकता है।
Stock Market Crash की बड़ी वजह बना अमेरिका-ईरान तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी प्रशासन की ओर से ईरान के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमलों की पुष्टि की गई है। इसके बाद ईरान की तरफ से भी जवाबी कार्रवाई की खबर सामने आई। रातोंरात हुई इस सैन्य गतिविधि ने निवेशकों के बीच अनिश्चितता बढ़ा दी।
बाजार में ऐसे हालात को लेकर सबसे बड़ी चिंता यह है कि संघर्ष आगे कितना बढ़ेगा। अगर तनाव सीमित रहा तो बाजार में कुछ समय बाद स्थिरता लौट सकती है। लेकिन संघर्ष लंबा खिंचने की स्थिति में वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका असर काफी व्यापक हो सकता है। यही डर Stock Market Crash के पीछे सबसे बड़ा कारण बनकर सामने आया।
प्री-ओपनिंग में ही मिल गया था गिरावट का संकेत
भारतीय बाजार खुलने से पहले ही कमजोर शुरुआत के संकेत मिल चुके थे। प्री-ओपनिंग सेशन में सेंसेक्स करीब 540 अंक टूटकर 76,397.24 के स्तर पर पहुंच गया था। वहीं निफ्टी भी लगभग 203 अंक की गिरावट के साथ 23,852.05 पर कारोबार करता दिखाई दिया।
गिफ्ट निफ्टी फ्यूचर्स भी सुबह के कारोबार में दबाव में था। इससे साफ संकेत मिल रहा था कि वैश्विक तनाव का असर भारतीय बाजार की शुरुआत पर पड़ सकता है। मंगलवार को निफ्टी 24,055.8 के स्तर पर बंद हुआ था। ऐसे में अगले सत्र की कमजोर शुरुआत ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी।
सेंसेक्स की ज्यादातर कंपनियां लाल निशान में
बाजार में बिकवाली का दबाव इतना ज्यादा रहा कि सेंसेक्स की 30 प्रमुख कंपनियों में से लगभग सभी शेयर गिरावट के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। शुरुआती कारोबार में सिर्फ सनफार्मा का शेयर ही बढ़त में नजर आया, जबकि बाकी प्रमुख कंपनियों के शेयरों पर बिकवाली हावी रही।
बड़े शेयरों में गिरावट का सीधा असर प्रमुख सूचकांकों पर पड़ा। निवेशकों ने जोखिम वाली संपत्तियों से दूरी बनानी शुरू कर दी। ऐसे समय में आमतौर पर निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं। यही वजह है कि Stock Market Crash के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव काफी तेज हो जाता है।
Stock Market Crash के बीच क्रूड ऑयल ने बढ़ाई चिंता
अमेरिका-ईरान तनाव का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिला। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत करीब 2 प्रतिशत बढ़कर 96.6 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। यह लगभग छह सप्ताह का सबसे ऊंचा स्तर बताया जा रहा है।
मध्य पूर्व वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। ऐसे में वहां किसी भी बड़े संघर्ष से तेल की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा रहता है। बाजार पहले से ही इस संभावना को लेकर चिंतित है कि अगर तनाव बढ़ता है तो क्रूड की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। महंगा तेल भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए भी चिंता का कारण बन सकता है।
महंगाई का खतरा फिर बढ़ा
क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी का सीधा असर महंगाई पर पड़ सकता है। तेल महंगा होने से परिवहन और उत्पादन की लागत बढ़ती है। इसका असर धीरे-धीरे कई वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर दिखाई दे सकता है।
इसी वजह से निवेशकों के बीच महंगाई को लेकर चिंता बढ़ी है। वैश्विक बॉन्ड यील्ड में तेजी भी इसी चिंता को दर्शाती है। अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं तो केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों में नरमी लाना मुश्किल हो सकता है।
विदेशी निवेशकों के रुख पर भी रहेगी नजर
वैश्विक तनाव बढ़ने पर विदेशी निवेशक अक्सर उभरते बाजारों में अपने निवेश को लेकर ज्यादा सतर्क हो जाते हैं। भारत भी इससे अछूता नहीं है। अगर अमेरिका-ईरान तनाव लंबा चलता है और बाजार में अनिश्चितता बनी रहती है तो विदेशी पूंजी के प्रवाह पर दबाव पड़ सकता है।
Stock Market Crash की स्थिति में विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार की गिरावट को और बढ़ा सकती है। हालांकि, आगे बाजार किस दिशा में जाएगा, यह काफी हद तक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगा।
निवेशकों के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम?
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव केवल शेयर बाजार तक सीमित नहीं है। इसका असर कच्चे तेल, करेंसी, बॉन्ड यील्ड और महंगाई पर भी पड़ सकता है। अगर संघर्ष का दायरा बढ़ता है तो वैश्विक कारोबार और सप्लाई चेन पर भी दबाव आ सकता है।
फिलहाल निवेशकों की नजर इस बात पर है कि दोनों देशों के बीच तनाव आगे किस दिशा में जाता है। बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे माहौल में जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय निवेशकों के लिए बाजार की स्थिति और वैश्विक संकेतों पर नजर रखना ज्यादा महत्वपूर्ण होगा।



