कारगिल विजय दिवस उत्तराखंड सरकार का बड़ा ऐलान परमवीर चक्र विजेताओं की अनुग्रह राशि बढ़ाकर ₹2 करोड़ की गई
Kargil Vijay Diwas Major announcement by the Uttarakhand government ex-gratia amount for Param Vir Chakra awardees increased to ₹2 crore.

देहरादून। कारगिल विजय दिवस के अवसर पर उत्तराखंड सरकार ने देश के सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित वीर सैनिकों और उनके परिवारों के सम्मान में बड़ा निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घोषणा की कि अब उत्तराखंड में परमवीर चक्र प्राप्त करने वाले सैनिकों अथवा उनके परिजनों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि (Ex-gratia) बढ़ाकर ₹2 करोड़ कर दी गई है। इससे पहले यह राशि ₹1.5 करोड़ थी। सरकार का यह फैसला देश की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान और अद्वितीय वीरता का सम्मान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को ‘वीर भूमि’ कहा जाता है और राज्य के सैनिकों ने हर युद्ध और सैन्य अभियान में साहस और समर्पण का परिचय दिया है। ऐसे वीरों का सम्मान केवल सरकार का दायित्व नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है।
कारगिल विजय दिवस पर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि
कारगिल विजय दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में कारगिल युद्ध के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि 1999 का कारगिल युद्ध भारतीय सेना के अदम्य साहस, अनुशासन और देशभक्ति का प्रतीक है। कठिन परिस्थितियों और दुर्गम पहाड़ियों में भारतीय सैनिकों ने जिस वीरता का प्रदर्शन किया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कारगिल के वीरों के बलिदान की बदौलत भारत ने अपनी सीमाओं की रक्षा की और दुनिया के सामने अपने सैन्य सामर्थ्य का परिचय दिया। उन्होंने शहीदों के परिवारों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्र उनके त्याग का हमेशा ऋणी रहेगा।
परमवीर चक्र विजेताओं के सम्मान में बड़ा फैसला
राज्य सरकार द्वारा घोषित नई व्यवस्था के तहत अब उत्तराखंड में परमवीर चक्र से सम्मानित सैनिकों या उनके आश्रितों को ₹2 करोड़ की अनुग्रह राशि प्रदान की जाएगी। सरकार का मानना है कि यह निर्णय वीर सैनिकों के सम्मान को और अधिक मजबूत करेगा तथा युवाओं को सेना में सेवा के लिए प्रेरित करेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिक केवल सीमा की रक्षा नहीं करते, बल्कि देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता के सबसे मजबूत प्रहरी होते हैं। इसलिए उनके सर्वोच्च बलिदान का सम्मान सर्वोच्च स्तर पर होना चाहिए।
उत्तराखंड को क्यों कहा जाता है ‘वीर भूमि’
उत्तराखंड का सेना से गहरा और ऐतिहासिक संबंध रहा है। राज्य के हजारों युवा भारतीय सेना, अर्धसैनिक बलों और अन्य सुरक्षा एजेंसियों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। गढ़वाल राइफल्स और कुमाऊं रेजिमेंट जैसी प्रतिष्ठित सैन्य इकाइयों ने अनेक युद्धों में अद्वितीय साहस का परिचय दिया है।
कारगिल युद्ध में भी उत्तराखंड के अनेक सैनिकों ने वीरगति प्राप्त की, जबकि कई सैनिकों को वीरता पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। यही कारण है कि उत्तराखंड को पूरे देश में ‘वीर भूमि’ के नाम से जाना जाता है।
शहीद परिवारों के कल्याण पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार सैनिकों और शहीद परिवारों के कल्याण के लिए लगातार नई योजनाएं लागू कर रही है। शिक्षा, रोजगार, आर्थिक सहायता और पुनर्वास जैसे क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि सैनिकों और उनके परिवारों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना भी है। इसी सोच के तहत समय-समय पर सैनिक कल्याण योजनाओं की समीक्षा की जाती है और आवश्यक सुधार किए जाते हैं।
युवाओं को सेना में भर्ती होने का संदेश
कारगिल विजय दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने युवाओं से भारतीय सेना में शामिल होकर राष्ट्र सेवा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सेना में सेवा करना केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि देश के प्रति सर्वोच्च कर्तव्य निभाने का अवसर है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के युवाओं में साहस, अनुशासन और देशभक्ति की भावना हमेशा से रही है। राज्य सरकार युवाओं को सेना में भर्ती होने के लिए हरसंभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।
कारगिल युद्ध की यादें आज भी प्रेरणा देती हैं
26 जुलाई 1999 को भारतीय सेना ने कारगिल की ऊंची चोटियों से पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़कर विजय हासिल की थी। इस ऐतिहासिक जीत की स्मृति में हर वर्ष कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है।
कारगिल युद्ध ने दुनिया को दिखाया कि भारतीय सैनिक विपरीत परिस्थितियों में भी अदम्य साहस और अद्वितीय रणनीति के साथ देश की सीमाओं की रक्षा करने में सक्षम हैं। इस युद्ध में कई जवानों ने अपने प्राणों की आहुति देकर राष्ट्र की रक्षा की।
वीरता का सम्मान बढ़ाने की दिशा में अहम कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि कारगिल विजय दिवस विजेताओं की अनुग्रह राशि बढ़ाने का निर्णय केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सैनिकों के सम्मान और उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान देने का प्रतीक भी है।
इस निर्णय से न केवल वीर सैनिकों और उनके परिवारों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि युवाओं में भी देश सेवा के प्रति सकारात्मक संदेश जाएगा। उत्तराखंड सरकार का यह कदम सैनिक सम्मान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
देशभक्ति और सम्मान का संदेश
कारगिल विजय दिवस पर लिया गया यह निर्णय उत्तराखंड सरकार की सैनिकों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश की सुरक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों का सम्मान हर परिस्थिति में सर्वोपरि रहेगा।
परमवीर चक्र विजेताओं की अनुग्रह राशि को ₹2 करोड़ तक बढ़ाने का फैसला आने वाले समय में सैनिक कल्याण की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण बन सकता है। यह निर्णय न केवल वीर सैनिकों के साहस को सम्मान देता है, बल्कि पूरे समाज को राष्ट्रभक्ति, त्याग और सेवा की भावना का संदेश भी देता है।



