पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट का निधन उत्तराखंड की राजनीति में शोक की लहर
Former Cabinet Minister Hira Singh Bisht passes away wave of grief in Uttarakhand politics.

देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति के वरिष्ठ नेता, कांग्रेस के दिग्गज चेहरा और पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट का 85 वर्ष की आयु में निधन हो गया। बताया जा रहा है कि शनिवार देर रात उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके निधन से उत्तराखंड के राजनीतिक और सामाजिक जीवन में शोक की लहर दौड़ गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया।
जनसेवा को समर्पित रहा लंबा राजनीतिक जीवन
हीरा सिंह बिष्ट उन नेताओं में शामिल थे जिन्होंने उत्तराखंड राज्य बनने से पहले और राज्य गठन के बाद भी जनहित के मुद्दों को लगातार उठाया। वे अपनी सादगी, स्पष्टवादिता और श्रमिकों, कर्मचारियों तथा गरीब वर्ग के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले नेता के रूप में पहचाने जाते थे। राजनीति में सक्रिय रहते हुए उन्होंने जनता के बीच अपनी अलग पहचान बनाई और लंबे समय तक कांग्रेस संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनका राजनीतिक सफर अविभाजित उत्तर प्रदेश से शुरू हुआ। वर्ष 1985 में वे पहली बार तत्कालीन देहरादून विधानसभा सीट से विधायक चुने गए। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद उन्होंने वर्ष 2002 में राजपुर रोड विधानसभा सीट से जीत दर्ज की और बाद में 2014 के डोईवाला उपचुनाव में भी विधायक बने। तीन बार विधायक रहने के दौरान उन्होंने जनता से सीधे संवाद बनाए रखा और क्षेत्रीय विकास को प्राथमिकता दी।
परिवहन और श्रम मंत्री के रूप में निभाई अहम जिम्मेदारी
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी की सरकार में हीरा सिंह बिष्ट ने कैबिनेट मंत्री के रूप में परिवहन, श्रम और तकनीकी शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली। अपने कार्यकाल में उन्होंने श्रमिक कल्याण, परिवहन व्यवस्था में सुधार और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई प्रयास किए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वे उन नेताओं में थे जिन्होंने सत्ता और संगठन दोनों में संतुलित भूमिका निभाई। प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक क्षमता के कारण उन्हें कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में विशेष सम्मान प्राप्त था।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जताया शोक
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हीरा सिंह बिष्ट के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने देहरादून स्थित उनके आवास पहुंचकर परिजनों से मुलाकात की और अपनी संवेदनाएं प्रकट कीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हीरा सिंह बिष्ट ने सार्वजनिक जीवन में जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी और उनका योगदान सदैव याद रखा जाएगा।
धामी ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में धैर्य प्रदान करने की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ने एक अनुभवी और समर्पित जननेता को खो दिया है।
कांग्रेस नेताओं ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि हीरा सिंह बिष्ट ने अपना पूरा जीवन गरीबों, श्रमिकों, कर्मचारियों और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए बिताया। उन्होंने इसे कांग्रेस परिवार के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने उनके आवास पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उन्हें पार्टी का समर्पित सिपाही बताते हुए कहा कि उन्होंने संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया और हमेशा जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता दी।
सादगी और जनसंपर्क रही उनकी सबसे बड़ी पहचान
राजनीतिक जीवन में हीरा सिंह बिष्ट की सबसे बड़ी ताकत उनका जनता से सीधा जुड़ाव था। वे नियमित रूप से लोगों की समस्याएं सुनते थे और समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों से संवाद करते थे। यही कारण रहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सभी दलों के नेता उनका सम्मान करते थे।
वे विशेष रूप से श्रमिक संगठनों और कर्मचारी हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रिय रहे। सामाजिक संगठनों के साथ उनका लगातार संवाद बना रहा और उन्होंने विकास के साथ-साथ सामाजिक न्याय की आवाज भी बुलंद की।
उत्तराखंड की राजनीति के एक युग का अंत
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि हीरा सिंह बिष्ट का निधन उत्तराखंड की राजनीति के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत है। उन्होंने राज्य निर्माण के बाद लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने, क्षेत्रीय विकास और जनहित के मुद्दों पर लगातार सक्रिय भूमिका निभाई।
उनके निधन से कांग्रेस को संगठनात्मक और वैचारिक स्तर पर भी बड़ी क्षति हुई है। आने वाली पीढ़ियों के लिए उनका सार्वजनिक जीवन सेवा, सादगी और समर्पण का उदाहरण बना रहेगा।
अंतिम विदाई में उमड़े समर्थक
हीरा सिंह बिष्ट के निधन की खबर मिलते ही उनके समर्थक, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता उनके आवास पहुंचने लगे। सभी ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं। पूरे प्रदेश में शोक का माहौल देखा गया और अनेक स्थानों पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के कार्यक्रम आयोजित किए गए।
उत्तराखंड की राजनीति में उनका योगदान लंबे समय तक याद रखा जाएगा। जनसेवा, लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक सरोकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें हमेशा एक सम्मानित जननेता के रूप में स्थापित करेगी।



