उत्तराखंड में धामी मंत्रिमंडल का आज महा-विस्तार, 5 नए चेहरे लेंगे शपथ, 2027 चुनाव से पहले क्षेत्रीय और जातीय समीकरण साधने की तैयारी
Dhami cabinet in Uttarakhand to be expanded today, with five new faces sworn in, preparing to balance regional and caste equations ahead of the 2027 elections.
उत्तराखंड की राजनीति से आज की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार के दूसरे कार्यकाल का बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार आज संपन्न होने जा रहा है। Dhami Cabinet Expansion Uttarakhand 2026 के तहत आज राजभवन (लोकभवन) में आयोजित एक भव्य समारोह में पांच नए विधायक मंत्री पद की शपथ लेंगे। वर्ष 2027 में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव से पहले इस विस्तार को ‘मास्टरस्ट्रोक’ माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य प्रदेश में राजनीतिक और सामाजिक संतुलन बनाना है।
क्यों खाली थे 5 पद? एक नजर में
वर्ष 2022 में सरकार गठन के समय सीएम धामी समेत कुल 9 मंत्रियों ने शपथ ली थी, जिसके बाद से ही 3 पद खाली चल रहे थे। Dhami Cabinet Expansion Uttarakhand 2026 की आवश्यकता तब और बढ़ गई जब:
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कैबिनेट मंत्री चंदन रामदास के असामयिक निधन से एक पद रिक्त हुआ।
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वर्ष 2025 में विवादित बयान के चलते वित्त मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के इस्तीफे के बाद पांचवां पद भी खाली हो गया।
लंबे समय से संगठन और सरकार के बीच इन रिक्तियों को भरने के लिए मंथन चल रहा था, जिस पर आज अंतिम मुहर लग रही है।
मिशन 2027: युवा, महिला और क्षेत्रीय संतुलन पर फोकस
सूत्रों के मुताबिक, नए मंत्रियों के चयन में Dhami Cabinet Expansion Uttarakhand 2026 के जरिए ‘सोशल इंजीनियरिंग’ का खास ख्याल रखा गया है। 23 मार्च को धामी सरकार के वर्तमान कार्यकाल के 4 साल पूरे होने जा रहे हैं। इससे ठीक पहले हो रहा यह विस्तार संकेत देता है कि भाजपा आगामी चुनावों में युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना चाहती है। कुमाऊं और गढ़वाल के बीच क्षेत्रीय संतुलन के साथ-साथ जातीय समीकरणों को भी इस विस्तार में तरजीह दी गई है।
राजनाथ सिंह के दौरे से पहले बड़ी हलचल
दिलचस्प बात यह है कि 21 मार्च को केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का उत्तराखंड दौरा प्रस्तावित है। उनके आने से ठीक पहले मंत्रिमंडल विस्तार कर धामी सरकार ने यह संदेश दिया है कि सरकार अब पूरी ताकत के साथ विकास कार्यों को गति देगी। हालांकि नए मंत्रियों के नामों को अंतिम समय तक गोपनीय रखा गया है, लेकिन सचिवालय से लेकर राजभवन तक हलचल तेज है।

