उत्तराखंड

उत्तराखंड में ग्रीन सेस लागू करने की तैयारी अंतिम चरण में

Preparations for implementing green cess in Uttarakhand are in the final stages.

देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ राज्य की आय बढ़ाने के उद्देश्य से ग्रीन सेस योजना को अंतिम रूप दे दिया है। लंबे समय से जिस व्यवस्था पर मंथन चल रहा था, वह अब जमीन पर उतरने जा रही है। राज्य की सीमाओं पर 15 प्रमुख प्रवेश बिंदुओं को चिन्हित किया गया है, जहां बाहर से आने वाले वाहनों से ग्रीन सेस वसूला जाएगा। सरकार का अनुमान है कि इस नई व्यवस्था से हर साल करीब 100 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हो सकती है।

पर्यटन और ट्रैफिक दबाव बना वजह

उत्तराखंड देश के प्रमुख पर्यटन राज्यों में शामिल है। चारधाम यात्रा, कांवड़ यात्रा, हेमकुंड साहिब और हरिद्वार-ऋषिकेश जैसे प्रमुख स्थलों पर हर साल लाखों पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसके चलते सड़कों पर वाहनों का दबाव बढ़ता है और पर्यावरण पर भी असर पड़ता है। सरकार का मानना है कि ग्रीन सेस के जरिए बढ़ते ट्रैफिक और प्रदूषण से निपटने में मदद मिलेगी और विकास कार्यों के लिए स्थायी राजस्व स्रोत भी तैयार होगा।

15 फरवरी से सीमाओं पर वसूली शुरू

परिवहन विभाग के अनुसार, 15 फरवरी से राज्य की सीमाओं पर चिन्हित सभी 15 स्थानों पर ग्रीन सेस की वसूली शुरू कर दी जाएगी। इसके लिए ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरों की व्यवस्था की जा रही है। ये कैमरे वाहनों की नंबर प्लेट स्कैन कर स्वतः ही शुल्क तय करेंगे, जिससे वाहन चालकों को रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

ऑटोमेशन से बढ़ेगी पारदर्शिता

सरकार का दावा है कि ऑटोमेटेड सिस्टम से वसूली प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी। मानवीय हस्तक्षेप कम होने से गड़बड़ी की संभावना भी घटेगी। साथ ही, चेक पोस्ट पर जाम की समस्या कम होगी और यात्रियों का समय बचेगा। डिजिटल भुगतान व्यवस्था से सरकार को रियल टाइम डेटा भी मिलेगा।

बाहरी वाहनों से होगी मुख्य कमाई

ग्रीन सेस का मुख्य दायरा दूसरे राज्यों से आने वाले वाहनों को बनाया गया है। सरकार का आकलन है कि हर साल लाखों बाहरी वाहन उत्तराखंड में प्रवेश करते हैं। खासकर यात्रा सीजन में इनसे बड़ी मात्रा में राजस्व मिलने की उम्मीद है। फिलहाल राज्य को व्यावसायिक वाहनों से रोजाना 25 से 30 लाख रुपये की आमदनी हो रही है, जो नई व्यवस्था के बाद और बढ़ सकती है।

वाहन श्रेणी के अनुसार शुल्क

ग्रीन सेस की दरें वाहन के प्रकार के आधार पर तय की गई हैं। हल्के निजी वाहनों से 80 रुपये, 12 सीट से अधिक क्षमता वाली बसों से 140 रुपये और सात एक्सल वाले भारी वाहनों से 700 रुपये शुल्क लिया जाएगा। सरकार का कहना है कि दरें संतुलित रखी गई हैं ताकि आम यात्रियों पर अधिक बोझ न पड़े।

कुछ वाहनों को छूट

सरकार ने आवश्यक सेवाओं और पर्यावरण के अनुकूल वाहनों को ग्रीन सेस से मुक्त रखा है। सरकारी वाहन, एंबुलेंस, अग्निशमन सेवा, दोपहिया और तिपहिया वाहन, साथ ही सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहन इस दायरे में नहीं आएंगे। इससे स्वच्छ ऊर्जा वाले वाहनों को प्रोत्साहन मिलेगा।

पर्यावरण और राजस्व दोनों पर फोकस

परिवहन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, सभी तकनीकी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। सरकार को उम्मीद है कि ग्रीन सेस व्यवस्था से एक ओर राज्य की आय में इजाफा होगा, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण और ट्रैफिक नियंत्रण की दिशा में यह एक अहम कदम साबित होगा।

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