हरिद्वार में कार्तिक पूर्णिमा पर उमड़ा आस्था का सैलाब — लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई गंगा में डुबकी, प्रशासन अलर्ट मोड पर
A massive surge of devotees descended on Haridwar for Kartik Purnima – millions took a dip in the Ganges, and the administration was on high alert.
हरिद्वार: कार्तिक पूर्णिमा के पावन पर्व पर बुधवार को हरिद्वार में आस्था और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। तड़के 3:50 बजे से ही गंगा स्नान शुरू हो गया और सुबह होते-होते लाखों श्रद्धालु मां गंगा की गोद में आस्था की डुबकी लगाते दिखाई दिए। हर की पैड़ी, भीमगोड़ा, कुशावर्त, चंडी और रामघाट तक गंगा तट भक्तों की भीड़ से पटे हुए हैं। दूर-दराज़ से आए श्रद्धालु स्नान कर आत्मिक शांति और मोक्ष की कामना कर रहे हैं।
गंगा तटों पर “हर हर गंगे” और “जय मां गंगे” के जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। जलती हुई दीपों की पंक्तियों से सजी गंगा की धारा का दृश्य मन को मोह लेने वाला था। श्रद्धालुओं ने दीपदान और पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की प्रार्थना की। नारायण शिला मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित मनोज त्रिपाठी ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का संहार किया था। इसी उपलक्ष्य में देवताओं ने पवित्र नदियों में स्नान और दान का विधान आरंभ किया, जो आज भी अक्षुण्ण रूप से जारी है।
सख्त सुरक्षा व्यवस्था के बीच शांतिपूर्ण आयोजन
भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतज़ाम किए हैं। पूरे मेला क्षेत्र को 11 ज़ोन और 36 सेक्टर में विभाजित किया गया है। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, जल पुलिस और फ्लड रेस्क्यू टीमें गंगा घाटों पर मुस्तैद हैं। भीड़ नियंत्रण और दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी से लगातार निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने बताया कि स्नान पर्व के दौरान कोई अप्रिय घटना न हो, इसके लिए सभी अधिकारी फील्ड में सक्रिय हैं।
यातायात व्यवस्था में बदलाव
श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस ने शहर के कई मार्गों पर रूट डायवर्जन लागू किया है। हरिद्वार आने वाले मुख्य मार्गों पर वाहनों की एंट्री को नियंत्रित किया गया है ताकि नेशनल हाईवे पर जाम की स्थिति न बने। पार्किंग और पैदल मार्गों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।
रात में देव दीपावली की भव्यता
मंगलवार रात हर की पैड़ी पर देव दीपावली का भव्य आयोजन किया गया। हजारों दीपों की रोशनी से सजी गंगा की लहरों ने पूरा वातावरण अलौकिक बना दिया। आतिशबाजी और आरती के दौरान भक्त भावविभोर होकर ‘हर हर महादेव’ के जयघोष करते दिखाई दिए।
प्रशासन के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा स्नान के दौरान शाम तक करीब 30 लाख श्रद्धालुओं के गंगा स्नान करने की संभावना है। पर्व के शांतिपूर्ण संचालन के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। यह आखिरी प्रमुख स्नान पर्व है, जिसके बाद अब अगला बड़ा आयोजन बैसाखी और मकर संक्रांति के अवसर पर 2026 में होगा।
कार्तिक पूर्णिमा का यह पावन स्नान न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की भव्यता का भी द्योतक है। श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और प्रशासन की सुदृढ़ तैयारी ने इस पर्व को हरिद्वार की पावन धरती पर यादगार बना दिया है।


