उत्तराखंड

Women Reservation Bill Debate: महिला आरक्षण पर हरीश रावत का बड़ा बयान, भाजपा पर साधा निशाना

Women's Reservation Bill Debate: Harish Rawat Makes Major Statement on Women's Reservation, Takes Aim at BJP

उत्तराखंड की राजनीति में Women Reservation Bill Debate एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। हरीश रावत ने हाल ही में अपने नैनीताल दौरे के दौरान महिला आरक्षण के मुद्दे पर बड़ा बयान देते हुए भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण के मुद्दे को जानबूझकर परिसीमन से जोड़कर भ्रम की स्थिति पैदा की जा रही है।

कार्यकर्ताओं के साथ बैठक, चुनावी रणनीति पर चर्चा

नैनीताल में आयोजित बैठक के दौरान Women Reservation Bill Debate के साथ-साथ आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति पर भी चर्चा हुई। हरीश रावत ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह और ऊर्जा देखने को मिल रही है।

उन्होंने दावा किया कि प्रदेश की जनता अब बदलाव चाहती है और कांग्रेस की ओर रुझान बढ़ रहा है। उनके अनुसार, भाजपा सरकार के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी साफ नजर आ रही है, जिसका फायदा कांग्रेस को आगामी चुनावों में मिल सकता है।

भाजपा पर ‘भ्रम फैलाने’ का आरोप

Women Reservation Bill Debate को लेकर हरीश रावत ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भाजपा ने महिला आरक्षण को परिसीमन प्रक्रिया से जोड़कर जनता को भ्रमित करने की कोशिश की है।

उनका कहना था कि परिसीमन एक जटिल और राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा है, जिस पर सभी राज्यों से व्यापक चर्चा जरूरी है। बिना स्पष्ट रोडमैप के इसे महिला आरक्षण से जोड़ना उचित नहीं है।

महिला आरक्षण को तुरंत लागू करने की मांग

Women Reservation Bill Debate के संदर्भ में हरीश रावत ने सुझाव दिया कि अगर केंद्र सरकार वास्तव में महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर गंभीर है, तो उसे तुरंत ठोस कदम उठाने चाहिए।

उन्होंने कहा कि लोकसभा की 543 सीटों में से एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने की बात कही।

कांग्रेस की भूमिका और भाजपा पर आरोप

Women Reservation Bill Debate में कांग्रेस की भूमिका को लेकर भी हरीश रावत ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2010 में कांग्रेस सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक पारित किया था, लेकिन भाजपा के विरोध के कारण इसे लागू नहीं किया जा सका।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 2023 में विधेयक पारित होने के बावजूद इसे 2033 तक टाल दिया गया, जो महिलाओं के साथ अन्याय है। उनका कहना था कि यह देरी राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी को दर्शाती है।

अंदरूनी कलह पर भी दिया जवाब

कांग्रेस में गुटबाजी के सवाल पर हरीश रावत ने संतुलित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है और हर बड़े संगठन में मतभेद होते हैं।

उन्होंने 2002 और 2012 के विधानसभा चुनावों का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय भी अंदरूनी मतभेद थे, लेकिन पार्टी ने जीत हासिल की और सफलतापूर्वक सरकार चलाई। उन्होंने जोर दिया कि संवाद के माध्यम से सभी मुद्दों को सुलझाया जा सकता है।

भाजपा पर ‘झूठ और प्रपंच’ का आरोप

Women Reservation Bill Debate के साथ-साथ हरीश रावत ने भाजपा सरकार पर चुनावों में झूठ और प्रपंच का सहारा लेने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि 2017 से लगातार भाजपा ने सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और भ्रामक प्रचार का इस्तेमाल किया है। उनके अनुसार, 2022 के चुनाव में कांग्रेस की हार भी इसी रणनीति का परिणाम थी। उन्होंने जनता से अपील की कि आगामी चुनाव में वे ऐसे ‘झूठ और फरेब’ से सावधान रहें।

सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का आरोप

हरीश रावत ने भाजपा सरकार पर रैलियों के माध्यम से सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया। उनका कहना था कि सरकार विकास कार्यों के बजाय प्रचार पर ज्यादा ध्यान दे रही है। Women Reservation Bill Debate के संदर्भ में उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में महिलाओं के हित में काम करना चाहती है, तो उसे नीतिगत स्तर पर ठोस निर्णय लेने चाहिए, न कि केवल घोषणाएं करनी चाहिए।

महिला सशक्तिकरण पर जोर

Women Reservation Bill Debate के जरिए हरीश रावत ने महिला सशक्तिकरण की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी में समान अवसर मिलना चाहिए, जिससे वे देश और समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभा सकें। उनका मानना है कि महिला आरक्षण केवल एक कानून नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का माध्यम है, जिसे जल्द से जल्द लागू किया जाना चाहिए।

 

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