उत्तराखंड

Uttarakhand Renewable Energy Ranking 2026: नवीकरणीय ऊर्जा में उत्तराखंड को देश में दूसरा स्थान, 5 नवंबर को उपराष्ट्रपति करेंगे सम्मानित; CM धामी ने जताई खुशी

Uttarakhand Renewable Energy Ranking 2026: Uttarakhand secures second place in the country for renewable energy; Vice President to confer honors on November 5; CM Dhami expresses happiness.

Uttarakhand Renewable Energy Ranking 2026: उत्तराखंड ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के मूल्यांकन में प्रदेश को विशेष श्रेणी के राज्यों में दूसरा स्थान मिला है। यह उपलब्धि मंत्रालय के रिन्यूएबल एनर्जी स्टेट असेसमेंट फ्रेमवर्क (RE-SAF) के अंतर्गत दर्ज की गई है।

केंद्रीय मंत्रालय के सचिव संतोष सारंगी ने 31 अक्टूबर 2026 को उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन को पत्र भेजकर इस उपलब्धि की जानकारी दी। मंत्रालय ने नवीकरणीय ऊर्जा के विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करने और इस दिशा में निरंतर प्रयास करने पर राज्य सरकार की सराहना की है।

इस उपलब्धि के लिए उत्तराखंड को 5 नवंबर 2026 को आयोजित भारत RE समिट एवं एक्सपो-2026 के समापन समारोह में सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन राज्य को सम्मान प्रदान करेंगे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि उत्तराखंड स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रहा है।

Uttarakhand Renewable Energy Ranking 2026: Renewable Energy Ranking में उत्तराखंड को दूसरा स्थान

केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए रिन्यूएबल एनर्जी स्टेट असेसमेंट फ्रेमवर्क विकसित किया है।

इस मूल्यांकन में उत्तराखंड ने विशेष श्रेणी के राज्यों के बीच दूसरा स्थान हासिल किया है।

राज्य की यह रैंकिंग नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ इस क्षेत्र में विकसित किए गए नीतिगत और बुनियादी ढांचे से संबंधित प्रयासों को भी दर्शाती है।

मंत्रालय ने अपने पत्र में राज्य सरकार को बधाई देते हुए स्वच्छ ऊर्जा के विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में किए गए प्रयासों की सराहना की।

यह उपलब्धि उत्तराखंड के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य की भौगोलिक परिस्थितियां मैदानी राज्यों से अलग हैं।

पर्वतीय क्षेत्रों में ऊर्जा परियोजनाओं का विकास करते समय भौगोलिक चुनौतियों, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और स्थानीय जरूरतों का ध्यान रखना आवश्यक होता है।

हालांकि, यह दूसरा स्थान विशेष श्रेणी के राज्यों की रैंकिंग में मिला है। इसे देश के सभी राज्यों की संयुक्त रैंकिंग में दूसरा स्थान नहीं समझना चाहिए।

5 नवंबर को Vice President करेंगे सम्मानित

उत्तराखंड को राष्ट्रीय स्तर पर मिली इस उपलब्धि के लिए भारत RE समिट एवं एक्सपो-2026 में सम्मानित किया जाएगा।

समारोह 5 नवंबर 2026 को आयोजित होना निर्धारित है।

कार्यक्रम के समापन सत्र में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन उत्तराखंड सरकार को सम्मान प्रदान करेंगे।

यह आयोजन नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में राज्यों के प्रदर्शन को पहचान देने और स्वच्छ ऊर्जा के विकास को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

समारोह में उत्तराखंड को मिलने वाला सम्मान राज्य की नवीकरणीय ऊर्जा संबंधी नीतियों और प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान को दर्शाएगा।

हालांकि, सम्मान समारोह अभी आयोजित होना बाकी है। इसलिए इसे भविष्य में निर्धारित कार्यक्रम के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

Uttarakhand Renewable Energy Ranking 2026: RE-SAF क्या है और कैसे तय होती है राज्यों की रैंकिंग?

रिन्यूएबल एनर्जी स्टेट असेसमेंट फ्रेमवर्क यानी RE-SAF केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा विकसित एक मूल्यांकन प्रणाली है।

इसका उद्देश्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की प्रगति का आकलन करना है।

इसके अंतर्गत कई महत्वपूर्ण मानकों पर राज्यों का मूल्यांकन किया जाता है।

इनमें नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता में वृद्धि, नीतिगत एवं नियामकीय व्यवस्था, विद्युत ग्रिड की तैयारी, बिजली वितरण कंपनियों का प्रदर्शन और निवेश के लिए उपलब्ध वातावरण शामिल हैं।

इसका अर्थ है कि मूल्यांकन केवल किसी राज्य में स्थापित सौर या जलविद्युत परियोजनाओं की संख्या पर आधारित नहीं होता।

बल्कि यह भी देखा जाता है कि संबंधित राज्य में नई परियोजनाओं के विकास के लिए आवश्यक सुविधाएं, नीतियां और संस्थागत व्यवस्थाएं कितनी प्रभावी हैं।

इस फ्रेमवर्क का उद्देश्य राज्यों के बीच सकारात्मक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में बेहतर कार्यप्रणालियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

CM Pushkar Singh Dhami ने बताया बड़ी उपलब्धि

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड को दूसरा स्थान मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की है।

उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि नवीकरणीय ऊर्जा के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता, निरंतर प्रयासों और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्वच्छ ऊर्जा और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के प्रयासों का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड भी इन राष्ट्रीय उद्देश्यों को प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है और सरकार इन संसाधनों के बेहतर उपयोग के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

उन्होंने नवीकरणीय ऊर्जा को प्रदेश की ऊर्जा जरूरतों, स्थानीय रोजगार और आर्थिक विकास से भी जोड़ा।

Solar Energy के क्षेत्र में संभावनाएं

उत्तराखंड में सौर ऊर्जा का विकास नवीकरणीय ऊर्जा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

प्रदेश के मैदानी और पर्वतीय दोनों क्षेत्रों में अलग-अलग प्रकार की सौर ऊर्जा परियोजनाओं की संभावनाएं मौजूद हैं।

घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की छतों पर सोलर पैनल लगाने से बिजली की जरूरतों का एक हिस्सा स्थानीय स्तर पर पूरा किया जा सकता है।

वहीं, उपयुक्त स्थानों पर ग्राउंड-माउंटेड सौर ऊर्जा परियोजनाएं बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने में योगदान दे सकती हैं।

पर्वतीय क्षेत्रों में छोटे और विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा संयंत्र विशेष रूप से उपयोगी हो सकते हैं, जहां बिजली वितरण के लिए लंबी लाइनें बिछाना चुनौतीपूर्ण होता है।

हालांकि, सौर ऊर्जा परियोजनाओं की सफलता स्थानीय मौसम, धूप की उपलब्धता, भूमि की स्थिति, ग्रिड कनेक्टिविटी और वित्तीय व्यवहार्यता पर निर्भर करती है।

इसलिए प्रदेश में सौर ऊर्जा के विस्तार के लिए क्षेत्रीय परिस्थितियों के अनुरूप परियोजनाएं विकसित करना आवश्यक है।

Hydropower और Small Hydropower पर भी जोर

उत्तराखंड अपनी नदियों और पर्वतीय भौगोलिक परिस्थितियों के कारण जलविद्युत उत्पादन की संभावनाओं वाला राज्य है।

राज्य सरकार जलविद्युत और लघु जलविद्युत परियोजनाओं को भी नवीकरणीय ऊर्जा विकास की रणनीति में शामिल कर रही है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की प्राकृतिक संपदा का उल्लेख करते हुए सौर ऊर्जा के साथ जलविद्युत और लघु जलविद्युत के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया है।

जलविद्युत परियोजनाएं बिजली उत्पादन में योगदान दे सकती हैं, लेकिन हिमालयी क्षेत्रों में इनके पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों का आकलन भी आवश्यक है।

नदी पारिस्थितिकी, स्थानीय समुदायों की आजीविका, भूस्खलन की संवेदनशीलता और प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।

ऐसे में नवीकरणीय ऊर्जा विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना राज्य के सामने महत्वपूर्ण चुनौती है।

Uttarakhand Renewable Energy Ranking 2026: Grid Readiness और DISCOM Performance क्यों महत्वपूर्ण?

RE-SAF के मूल्यांकन में विद्युत ग्रिड की तैयारी और बिजली वितरण कंपनियों के प्रदर्शन को भी शामिल किया गया है।

नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं से बिजली उत्पादन बढ़ने के साथ उसे उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए मजबूत ग्रिड व्यवस्था आवश्यक होती है।

विशेष रूप से सौर ऊर्जा जैसे स्रोतों में उत्पादन मौसम और दिन के समय के अनुसार बदलता रहता है।

ऐसी स्थिति में बिजली नेटवर्क का तकनीकी प्रबंधन, मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन तथा आवश्यक बुनियादी ढांचे का विकास महत्वपूर्ण हो जाता है।

बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय और परिचालन स्थिति भी नई परियोजनाओं के विकास को प्रभावित कर सकती है।

इसी कारण मंत्रालय के मूल्यांकन में केवल उत्पादन क्षमता ही नहीं, बल्कि ऊर्जा क्षेत्र के समग्र ढांचे को भी महत्व दिया गया है।

Renewable Energy Investment से रोजगार के अवसर

नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ने से राज्य में आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

सौर ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना, उपकरणों का रखरखाव, तकनीकी सेवाएं और विद्युत नेटवर्क से जुड़े कार्यों में प्रशिक्षित कर्मचारियों की आवश्यकता होती है।

इसके अतिरिक्त परियोजनाओं से जुड़े स्थानीय परिवहन, निर्माण और अन्य सहायक क्षेत्रों को भी आर्थिक लाभ मिल सकता है।

उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण विकासात्मक प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री धामी ने भी नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार को पर्यावरण संरक्षण के साथ रोजगार और आर्थिक विकास से जोड़ा है।

हालांकि, वास्तविक रोजगार सृजन परियोजनाओं की संख्या, निवेश, तकनीकी जरूरतों और स्थानीय लोगों की भागीदारी पर निर्भर करेगा।

India 500 GW Clean Energy Target में उत्तराखंड की भूमिका

भारत ने वर्ष 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्रोतों से 500 गीगावाट स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

इस राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में राज्यों की भूमिका महत्वपूर्ण है।

केंद्र सरकार सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जलविद्युत और अन्य गैर-जीवाश्म स्रोतों से बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रही है।

उत्तराखंड भी अपनी भौगोलिक परिस्थितियों और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार इस दिशा में योगदान देने का प्रयास कर रहा है।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि 500 गीगावाट का लक्ष्य स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता से संबंधित है। इसे वास्तविक बिजली उत्पादन या कुल बिजली खपत में गैर-जीवाश्म स्रोतों की हिस्सेदारी के समान नहीं माना जाना चाहिए।

पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन जरूरी

उत्तराखंड एक हिमालयी राज्य है, जहां प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग के साथ पर्यावरणीय सुरक्षा विशेष महत्व रखती है।

नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद कर सकती हैं, लेकिन प्रत्येक परियोजना का अपना पर्यावरणीय प्रभाव भी हो सकता है।

पर्वतीय क्षेत्रों में निर्माण कार्य, भूमि उपयोग में बदलाव और संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र पर संभावित प्रभावों का अध्ययन करना आवश्यक है।

इसके अलावा स्थानीय समुदायों की भागीदारी और परियोजनाओं से मिलने वाले लाभों का उचित वितरण भी महत्वपूर्ण है।

इसलिए स्वच्छ ऊर्जा के विकास में तकनीकी और आर्थिक पहलुओं के साथ पर्यावरणीय तथा सामाजिक जिम्मेदारियों को शामिल करना जरूरी होगा।

Uttarakhand के लिए क्या मायने रखती है यह उपलब्धि?

केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के मूल्यांकन में विशेष श्रेणी के राज्यों के बीच दूसरा स्थान हासिल करना उत्तराखंड के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

यह रैंकिंग राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा विकास से जुड़ी नीतियों, बुनियादी ढांचे और अनुकूल निवेश वातावरण की दिशा में किए गए प्रयासों को राष्ट्रीय पहचान देती है।

5 नवंबर को प्रस्तावित सम्मान समारोह इस उपलब्धि को औपचारिक मान्यता प्रदान करेगा।

हालांकि, आगे की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि राज्य नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता में कितनी वृद्धि करता है, विद्युत वितरण व्यवस्था को कितना मजबूत बनाता है और स्वच्छ ऊर्जा का लाभ आम नागरिकों तक किस स्तर पर पहुंचता है।

उत्तराखंड के सामने अब इस राष्ट्रीय उपलब्धि को दीर्घकालिक ऊर्जा आत्मनिर्भरता, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय आर्थिक विकास में बदलने की चुनौती होगी।

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