उत्तराखंड

मदरसा बोर्ड भंग होने के बाद हरिद्वार में तेज हुई मान्यता प्रक्रिया, 26 मदरसों ने किया आवेदन, अब सभी को लेना होगा पंजीकरण

Accreditation process accelerates in Haridwar following the dissolution of the Madrasa Board; 26 madrasas have applied, and all must now obtain registration.

उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा व्यवस्था को नए स्वरूप में ढालने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य में मदरसा बोर्ड को समाप्त किए जाने के बाद अब सभी मदरसों को Uttarakhand Madrasa Recognition प्रक्रिया के तहत उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त करनी होगी। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य प्रदेश के सभी मदरसों को एक समान शैक्षणिक मानकों के दायरे में लाना और शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है।

हरिद्वार जिले में इस प्रक्रिया ने अब गति पकड़ ली है। शिक्षा विभाग के अनुसार अब तक 26 मदरसों ने मान्यता के लिए आवेदन कर दिया है, जबकि अन्य संस्थानों से भी लगातार आवेदन और आवश्यक दस्तावेज प्राप्त हो रहे हैं। विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में सभी मदरसों को इस प्रक्रिया से गुजरना अनिवार्य होगा।

क्या है Uttarakhand Madrasa Recognition प्रक्रिया?

राज्य सरकार ने हाल ही में उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया, जो अब प्रदेश में संचालित सभी मदरसों की मान्यता, निरीक्षण और नियमन का कार्य करेगा। यह व्यवस्था 1 जुलाई से प्रभावी हो चुकी है।

पहले मदरसों का संचालन मदरसा बोर्ड के माध्यम से होता था, लेकिन बोर्ड भंग होने के बाद अब प्रत्येक मदरसे को निजी विद्यालयों की तर्ज पर निर्धारित मानकों को पूरा करना होगा। इसके बाद ही उन्हें आधिकारिक मान्यता प्रदान की जाएगी।

इस नई व्यवस्था के तहत शिक्षा विभाग भवन, आधारभूत सुविधाएं, शिक्षण गुणवत्ता, सुरक्षा व्यवस्था, शिक्षकों की उपलब्धता और प्रशासनिक रिकॉर्ड जैसे विभिन्न पहलुओं की जांच करेगा।

हरिद्वार में करीब 250 मदरसे, लेकिन अभी केवल 26 ने किया आवेदन

जिला प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी (बेसिक) अमित कुमार चंद के अनुसार हरिद्वार जिले में लगभग 250 मदरसे संचालित हो रहे हैं। इनमें से अभी तक केवल 26 मदरसों ने Uttarakhand Madrasa Recognition के लिए आवेदन किया है।

उन्होंने बताया कि विभाग को लगातार नए आवेदन प्राप्त हो रहे हैं और सभी आवेदनों की नियमानुसार जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद पात्र संस्थानों को मान्यता प्रदान की जाएगी।

फिलहाल आवेदन जमा करने की कोई अंतिम तिथि निर्धारित नहीं की गई है, लेकिन विभाग चाहता है कि सभी मदरसे जल्द से जल्द आवेदन कर दें, ताकि पूरी प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी हो सके।

मान्यता के लिए पूरे करने होंगे शिक्षा विभाग के मानक

नई व्यवस्था के तहत किसी भी मदरसे को स्वतः मान्यता नहीं मिलेगी। प्रत्येक संस्थान को शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित मानकों का पालन करना होगा।

इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

  • सुरक्षित एवं स्वीकृत भवन
  • पर्याप्त कक्षाएं
  • पेयजल एवं शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं
  • अग्नि सुरक्षा व्यवस्था
  • योग्य शिक्षकों की नियुक्ति
  • छात्र-छात्राओं का रिकॉर्ड
  • प्रशासनिक एवं शैक्षणिक दस्तावेज

शिक्षा विभाग का कहना है कि इन सभी बिंदुओं की जांच के बाद ही अंतिम स्वीकृति दी जाएगी।

प्रदेश के 452 मदरसों को लेना होगा नया पंजीकरण

राज्य स्तर पर देखा जाए तो उत्तराखंड में कुल 452 मदरसे संचालित हैं। इनमें लगभग 400 मदरसे पहली से आठवीं कक्षा तक शिक्षा प्रदान करते हैं, जबकि 52 मदरसे नौवीं से बारहवीं तक की पढ़ाई कराते हैं।

मदरसा बोर्ड समाप्त होने के बाद अब सभी 452 मदरसों को Uttarakhand Madrasa Recognition प्रक्रिया के अंतर्गत उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।

सरकार का कहना है कि इससे राज्य में संचालित सभी मदरसों का एक समान डेटाबेस तैयार होगा और उनकी नियमित निगरानी भी संभव हो सकेगी।

जांच में सामने आई थीं कई अनियमितताएं

सरकार के निर्देश पर हाल ही में हरिद्वार जिले में 131 मदरसों का निरीक्षण किया गया था। जांच के दौरान 23 मदरसों में विभिन्न प्रकार की अनियमितताएं सामने आईं।

इनमें से 11 मदरसों की प्रधानमंत्री पोषण योजना (मिड-डे मील) के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।

शिक्षा विभाग का कहना है कि जिन संस्थानों में कमियां पाई गई हैं, उन्हें आवश्यक सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित मानकों को पूरा करने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।

बिना जमीन वाले मदरसों के सामने सबसे बड़ी चुनौती

नई व्यवस्था के लागू होने के बाद कई मदरसों के सामने सबसे बड़ी समस्या भूमि स्वामित्व की है। जिले में ऐसे कई मदरसे हैं जिनके पास स्वयं की जमीन नहीं है और वे पूर्व मदरसा बोर्ड की संपत्तियों या अन्य व्यवस्थाओं के माध्यम से संचालित हो रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संस्थानों को Uttarakhand Madrasa Recognition प्राप्त करने में अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि शिक्षा विभाग भूमि, भवन और आधारभूत ढांचे को मान्यता का महत्वपूर्ण आधार मान रहा है।

यदि ऐसे मदरसे आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाए, तो उन्हें मान्यता मिलने में विलंब हो सकता है।

सरकार का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाना

राज्य सरकार का कहना है कि यह फैसला किसी विशेष संस्था के खिलाफ नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए लिया गया है।

सरकार चाहती है कि प्रदेश के सभी छात्र, चाहे वे किसी भी प्रकार के विद्यालय या मदरसे में पढ़ते हों, उन्हें समान गुणवत्ता वाली शिक्षा, सुरक्षित वातावरण और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हों।

इसके साथ ही सभी संस्थानों का नियमन एक ही व्यवस्था के तहत होने से प्रशासनिक पारदर्शिता भी बढ़ेगी।

आने वाले समय में बढ़ेगी आवेदन प्रक्रिया

शिक्षा विभाग को उम्मीद है कि अगले कुछ सप्ताह में बड़ी संख्या में मदरसे आवेदन करेंगे। विभाग ने सभी संचालकों से समय रहते आवश्यक दस्तावेज तैयार करने और निर्धारित मानकों को पूरा करने की अपील की है।

यदि प्रक्रिया निर्धारित समय में पूरी होती है, तो उत्तराखंड में पहली बार सभी मदरसे एकीकृत शिक्षा प्रणाली के तहत पंजीकृत और मान्यता प्राप्त संस्थानों के रूप में संचालित होंगे। Uttarakhand Madrasa Recognition व्यवस्था राज्य की शिक्षा प्रणाली में एक महत्वपूर्ण बदलाव मानी जा रही है, जिसका उद्देश्य गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना है।

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