उत्तराखंड

उत्तराखंड में डेमोग्राफिक चेंज पर कड़ा एक्शन, यूपी बॉर्डर से लगे इलाकों में शुरू होगा वोटर आईडी वेरिफिकेशन अभियान

Uttarakhand takes strict action against demographic change; voter ID verification campaign to begin in areas bordering UP

देहरादून: उत्तराखंड में लगातार हो रहे डेमोग्राफिक चेंज को गंभीर मुद्दा मानते हुए राज्य सरकार ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू कर दी है। बाहरी राज्यों से जनसंख्या दबाव, फर्जी दस्तावेज़ और अवैध बस्तियों के मामलों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। इसी कारण सरकार ने प्रदेशभर में व्यापक सत्यापन अभियान चलाने का निर्णय लिया है।


यूपी बॉर्डर से लगे जिलों में चलेगा वोटर आईडी वेरिफिकेशन

राज्य सरकार ने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश से सटे इलाकों—उधमसिंह नगर, चंपावत, नैनीताल, हरिद्वार, देहरादून और पौड़ी में वोटर आईडी वेरिफिकेशन ड्राइव शुरू करने की घोषणा की है। शिकायतें मिली हैं कि कई लोगों के दो-दो जगहों पर वोटर कार्ड बने हुए हैं। इस मुद्दे को बेहद गंभीर मानते हुए प्रशासन दस्तावेजों की गहन समीक्षा करने जा रहा है।


फर्जी राशन कार्ड और आधार कार्ड का बड़ा जाल उजागर

पिछले कुछ समय में फर्जी राशन कार्ड, आधार, बिजली कनेक्शन और निवास प्रमाण पत्र बनाए जाने के कई मामले सामने आए हैं। जिन लोगों को पात्र नहीं होना चाहिए था, वे भी किसी न किसी तरीके से सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहे हैं। सरकार ने कहा कि इस प्रकार की अनियमितता करने वाले अधिकारियों और दलालों पर भी जल्द कार्रवाई की जाएगी।


भू-कानून से लेकर कालनेमि अभियान तक, सरकार के सख्त कदम

डेमोग्राफिक चेंज पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार पहले ही कई बड़े निर्णय ले चुकी है। सख्त भू-कानून लागू किया गया है, प्रदेशभर में कालनेमि अभियान चलाया गया और हाल ही में देवभूमि परिवार योजना को भी मंजूरी दी गई। इन सभी कदमों का उद्देश्य जनसंख्या संतुलन बनाए रखना और अवैध बसावट को रोकना है।


मुख्यमंत्री धामी: ‘देवभूमि की पहचान बदलने नहीं देंगे’

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड में जनसांख्यिकीय परिवर्तन तेजी से हो रहा है, जो राज्य की सांस्कृतिक और सामाजिक संरचना पर खतरा पैदा कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि “उत्तराखंड के मूल स्वरूप को बदलने नहीं दिया जाएगा” और प्रशासन को निर्देश दिए कि अपात्र लोगों को पात्रता में जोड़ने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई हो।


सत्यापन अभियान में सभी दस्तावेज़ होंगे स्कैन और जांचे जाएंगे

सत्यापन अभियान के तहत विशेष टीमें घर-घर जाकर वोटर कार्ड, राशन कार्ड, आधार कार्ड और निवास प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेजों की जांच करेंगी। जिन लोगों के दस्तावेज संदिग्ध पाए जाएंगे, उनकी सूची तैयार की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।


राज्य की सांस्कृतिक पहचान बचाने का मिशन

सरकार का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में बाहरी लोगों की आबादी का बढ़ता दबाव संसाधनों, रोजगार और सामाजिक संतुलन को प्रभावित कर रहा है। यही कारण है कि डेमोग्राफिक चेंज रोकने के लिए यह अभियान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रशासन को उम्मीद है कि सत्यापन प्रक्रिया से राज्य की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।

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