उत्तराखंड में इको टूरिज्म को नई उड़ान, 12 नए डेस्टिनेशन होंगे विकसित
Ecotourism in Uttarakhand gets a boost, 12 new destinations to be developed.
उत्तराखंड में पर्यटन को नया आयाम देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। राज्य में अब केवल पारंपरिक पर्यटन स्थलों तक ही सीमित न रहकर इको टूरिज्म को बढ़ावा देने की व्यापक योजना तैयार की गई है। इसी क्रम में उत्तराखंड वन विभाग ने प्रदेश में करीब 12 नए इको टूरिज्म डेस्टिनेशन विकसित करने का खाका तैयार किया है, जिसे जल्द ही शासन स्तर पर चर्चा के लिए भेजा जाएगा। इस योजना के लागू होने के बाद पर्यटकों को प्रकृति, वन्यजीव और स्थानीय संस्कृति से जुड़ा एक अलग और समृद्ध अनुभव मिलने की उम्मीद है।
पर्यटन मानचित्र को नया आकार देने की तैयारी
अब तक उत्तराखंड में पर्यटन विभाग ही मुख्य रूप से नए पर्यटन स्थलों के विकास की योजनाएं बनाता रहा है, लेकिन इस बार वन विभाग ने भी राज्य के पर्यटन मानचित्र को नया स्वरूप देने की ठान ली है। उत्तराखंड का बड़ा हिस्सा वन क्षेत्र से आच्छादित है, जहां जैव विविधता, घने जंगल, शांत वातावरण और प्राकृतिक सौंदर्य प्रचुर मात्रा में मौजूद है। वन विभाग का मानना है कि यदि इन संसाधनों का सुनियोजित और संतुलित तरीके से उपयोग किया जाए, तो इको टूरिज्म के जरिए न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय लोगों को भी रोजगार के नए अवसर मिल सकेंगे।
पहले चरण में 12 क्षेत्रों पर फोकस
वन विभाग की योजना के तहत पहले चरण में प्रदेश के करीब 12 ऐसे क्षेत्रों को चिन्हित किया गया है, जो पहले से ही प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन संभावनाओं के लिए जाने जाते हैं। विभाग का उद्देश्य है कि पहले से लोकप्रिय और संभावनाशील क्षेत्रों को इको टूरिज्म के तहत और अधिक व्यवस्थित रूप से विकसित किया जाए। इससे इन इलाकों में आने वाले पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और वे प्रकृति के और करीब जाकर समय बिता सकेंगे।
डेस्टिनेशन नहीं, बनेगा पूरा क्लस्टर
इस योजना की खास बात यह है कि इसका उद्देश्य केवल किसी एक स्थान को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना नहीं है। वन विभाग आसपास के क्षेत्रों को जोड़कर पूरे इलाके को एक “डेस्टिनेशन क्लस्टर” के रूप में विकसित करने की तैयारी में है। इसका फायदा यह होगा कि पर्यटक एक ही यात्रा में कई जगहों का भ्रमण कर सकेंगे। साथ ही इससे होटल, होम-स्टे, गाइड, स्थानीय हस्तशिल्प और अन्य सेवाओं के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
इन क्षेत्रों को किया गया है चिन्हित
इको टूरिज्म के लिए जिन क्षेत्रों को फिलहाल चिन्हित किया गया है, उनमें देहरादून जिले का तिमली–आशारोड़ी–कड़वापानी क्षेत्र और झाझरा शामिल हैं। मसूरी क्षेत्र में देवलसारी और बिनाग को चयनित किया गया है, जो अपनी हरियाली और जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध हैं। पौड़ी जिले में खिर्सू, चकराता क्षेत्र में देववन और कनासर, अल्मोड़ा जिले में बिनसर और शीतलाखेत, नैनीताल जिले में किलबारी और महेशखान तथा पिथौरागढ़ जिले का मुनस्यारी क्षेत्र भी इस सूची में शामिल है। ये सभी क्षेत्र शांत वातावरण, वन्यजीवों और खूबसूरत प्राकृतिक दृश्यों के लिए जाने जाते हैं।
रेस्ट हाउस बनेंगे डेस्टिनेशन हब
वन विभाग की इस योजना के तहत अब उसके रेस्ट हाउस केवल ठहरने की जगह तक सीमित नहीं रहेंगे। उन्हें डेस्टिनेशन हब के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां पर्यटकों को रहने के साथ-साथ प्रकृति से जुड़ी गतिविधियों का अनुभव भी मिलेगा। विभाग के अनुसार, इन रेस्ट हाउसों के आसपास नेचर ट्रेल्स, वॉकिंग ट्रैक, व्यू प्वाइंट और जानकारी केंद्र विकसित किए जाएंगे, ताकि पर्यटक उस क्षेत्र की जैव विविधता और सांस्कृतिक विरासत को समझ सकें।
पर्यटकों के अनुभव पर विशेष ध्यान
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पहले से मौजूद आधारभूत संरचनाओं जैसे रेस्ट हाउस, ट्रेल्स और वन पथों को केंद्र में रखकर नई सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इन डेस्टिनेशनों पर वाइल्डलाइफ सफारी, बर्ड वॉचिंग, नेचर ट्रेल्स और स्थानीय संस्कृति से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही इन क्षेत्रों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय महत्व को भी प्रमुखता से सामने लाया जाएगा, ताकि पर्यटक केवल घूमने ही नहीं, बल्कि सीखने और समझने का अनुभव भी प्राप्त कर सकें।
स्थानीय लोगों को मिलेगा सीधा लाभ
इस इको टूरिज्म योजना का एक बड़ा उद्देश्य स्थानीय समुदाय को पर्यटन से सीधे जोड़ना है। होम-स्टे, लोकल गाइड, स्थानीय भोजन, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए गांवों में रोजगार के नए अवसर सृजित किए जाएंगे। इससे न केवल पलायन पर अंकुश लगेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
संतुलन के साथ विकास पर जोर
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि इको टूरिज्म विकास पूरी तरह पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखकर किया जाएगा। किसी भी क्षेत्र में अनियंत्रित निर्माण या प्राकृतिक संसाधनों के दोहन की अनुमति नहीं दी जाएगी। उद्देश्य यह है कि पर्यटन के साथ-साथ प्रकृति का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जाए।
जल्द शासन स्तर पर होगी चर्चा
फिलहाल इस पूरी योजना का विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया जा चुका है, जिसे जल्द ही शासन स्तर पर चर्चा के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद इन 12 इको टूरिज्म डेस्टिनेशनों पर चरणबद्ध तरीके से काम शुरू किया जाएगा। यदि यह योजना सफल रहती है, तो भविष्य में और भी नए क्षेत्रों को इको टूरिज्म के तहत विकसित किया जा सकता है।



