उत्तराखंड

देहरादून में शानदार आदि गौरव महोत्सव, जनजातीय संस्कृति, परंपरा और वीरता का भव्य संगम

The spectacular Adi Gaurav Mahotsav in Dehradun, A grand confluence of tribal culture, tradition and valour

देहरादून: राजधानी देहरादून के रेंजर ग्राउंड्स में आयोजित आदि गौरव महोत्सव ने जनजातीय समाज की सांस्कृतिक धरोहर और ऐतिहासिक योगदान को पूरे सम्मान के साथ सामने रखा। बड़ी संख्या में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए नेताओं और विशिष्ट अतिथियों ने कहा कि यह महोत्सव सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनजातीय समुदाय की गौरवशाली परंपराओं, वीरता, आस्था और जीवन-मूल्यों का उत्सव है।

जनजातीय समाज की सांस्कृतिक धरोहर का सम्मान

इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज के सामने जनजातीय समुदाय की समृद्ध विरासत को उजागर करना था। मंच पर पारंपरिक नृत्य, गीत-संगीत और रीति-रिवाजों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को जनजातीय संस्कृति की जीवंतता से रूबरू कराया। देशभर से आए कलाकारों और प्रतिभागियों ने अपने विशिष्ट पहनावे और कलात्मक अभिव्यक्तियों के माध्यम से यह संदेश दिया कि भारत की जनजातीय सभ्यता आज भी उतनी ही गौरवशाली है, जितनी सदियों पहले थी।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जनजातीय सम्मान को नई पहचान

महोत्सव के दौरान वक्ताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार जनजातीय समाज के उत्थान और सम्मान के लिए अभूतपूर्व कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि वर्षों तक जनजातीय समुदायों की स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका को वह स्थान नहीं मिला, जिसके वे हकदार थे। लेकिन आज सरकार उन महान नायकों के योगदान को राष्ट्रीय इतिहास में उचित सम्मान दिला रही है।

भूले-बिसरे जनजातीय वीरों को मिला नया गौरव

कार्यक्रम में बिरसा मुंडा, तांत्या भील, रानी दुर्गावती, सिद्धो-कान्हू जैसे जनजातीय क्रांतिकारियों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि उनके साहस और बलिदान को अब पूरे देश में नए सिरे से पहचान मिल रही है। जनजातीय संग्रहालयों का निर्माण, जनजातीय शोध केंद्रों की स्थापना और सांस्कृतिक संरक्षण योजनाएं इस बदलाव का प्रमाण हैं।

‘डबल इंजन सरकार’ का जनजातीय विकास मॉडल

वक्ताओं ने कहा कि राज्य और केंद्र की डबल इंजन सरकार जनजातीय क्षेत्रों के आर्थिक और सामाजिक विकास को तेज गति दे रही है। उत्तराखंड के दूरस्थ जनजातीय इलाकों में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार से जुड़े कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। विशेष रूप से जनजातीय युवाओं को कौशल विकास, उद्यमिता और स्थानीय उत्पादों के विपणन से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक जागरूकता का संदेश

महोत्सव में मौजूद लोगों ने जनजातीय संस्कृति की विविधता और उसकी देश की एकता में महत्वपूर्ण भूमिका को करीब से महसूस किया। आयोजकों का कहना था कि ऐसे आयोजन समाज में संवेदनशीलता, समरसता और परस्पर सम्मान की भावना को मजबूत करते हैं।

रेंजर ग्राउंड्स में आयोजित यह आदि गौरव महोत्सव न केवल जनजातीय पहचान का उत्सव बना, बल्कि यह संदेश भी दे गया कि भारत का इतिहास और संस्कृति तब तक पूर्ण नहीं मानी जा सकती जब तक जनजातीय समाज के योगदान को इसके केंद्र में स्थान न दिया जाए।

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