उत्तराखंड

नंदा देवी राजजात यात्रा 2026 की तैयारियों को मिली रफ्तार, मुख्यमंत्री धामी ने की चौथी समीक्षा बैठक

Preparations for Nanda Devi Raj Jat Yatra 2026 gained momentum, Chief Minister Dhami held the fourth review meeting

देहरादून – उत्तराखंड की आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक मानी जाने वाली नंदा देवी राजजात यात्रा 2026 के लिए तैयारियां जोरों पर हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में सचिवालय में इस यात्रा की चौथी समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों को व्यापक कार्य योजना समय पर पूरी करने के निर्देश दिए हैं।

बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह यात्रा राज्य के हजारों श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था से जुड़ी है, इसलिए इसकी योजना, सुरक्षा और सुविधाएं सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी यात्रा मार्गों की मरम्मत, सुरक्षा रेलिंग, प्राथमिक चिकित्सा केंद्र, एंबुलेंस और टेलीमेडिसिन सेवा जैसी व्यवस्थाएं दिसंबर 2025 तक पूर्ण हो जानी चाहिए।

सांस्कृतिक गतिविधियों को भी मिलेगा मंच

मुख्यमंत्री धामी ने इस यात्रा को केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पर्व के रूप में मनाने का भी सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोक कलाकार, ग्राम पंचायतें, और स्वयंसेवी संस्थाएं यात्रा से जुड़ी रहें और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से उत्तराखंड की लोक कला और परंपराएं उजागर करें। इससे श्रद्धालु न केवल धार्मिक अनुभव करेंगे, बल्कि उत्तराखंडी संस्कृति से भी जुड़ाव महसूस करेंगे।

स्थानीय सुझावों पर आधारित कार्य योजना

मुख्यमंत्री ने बताया कि यात्रा को सफल बनाने के लिए जनप्रतिनिधियों, स्थानीय लोगों और विषय विशेषज्ञों से बातचीत की गई है और उन्हीं के सुझावों के आधार पर एक समन्वित कार्य योजना बनाई जा रही है। उन्होंने भरोसा जताया कि यात्रा को ऐतिहासिक रूप देने में सभी विभाग और आमजन सहयोग करेंगे।

राजजात और लोकजात यात्रा में अंतर

राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि नंदा देवी की दो यात्राएं होती हैं—लोकजात यात्रा, जो हर साल होती है, और राजजात यात्रा, जो 12 वर्षों में एक बार आयोजित होती है। राजजात यात्रा का महत्व धार्मिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टियों से बहुत बड़ा है।

इस यात्रा की शुरुआत कुरुड़ गांव से होती है, जिसे माता नंदा का मायका माना जाता है। यात्रा के दौरान चौसिंगा खाडू (चार सींग वाला विशेष भेड़) विशेष प्रतीक के रूप में साथ चलता है। यह यात्रा हिमालयी दुर्गम मार्गों से होकर गुजरती है और हजारों श्रद्धालु इसमें भाग लेते हैं।

उत्तराखंड की विरासत को मिलेगा नया आयाम

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य यात्रा को आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन की दृष्टि से यादगार बनाना है। इसके माध्यम से उत्तराखंड की संस्कृति, धार्मिक पर्यटन और स्थानीय आर्थिकी को भी नया जीवन मिलेगा।

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