फायर सीजन से पहले उत्तराखंड सतर्क, 41 डिवीजनों में एक साथ वनाग्नि मॉक ड्रिल
Uttarakhand on high alert ahead of fire season, forest fire mock drills conducted simultaneously in 41 divisions
देहरादून: जंगलों में आग की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने इस बार फायर सीजन से पहले व्यापक तैयारी का संदेश दिया है। राज्य में पहली बार इतने बड़े स्तर पर वनाग्नि को लेकर मॉक ड्रिल आयोजित की गई, जिसमें 41 फॉरेस्ट डिवीजनों में एक साथ अभ्यास किया गया। इस पहल का उद्देश्य कागजी तैयारियों से आगे बढ़कर जमीनी हकीकत को परखना था।
राज्य में हर साल 15 फरवरी से 15 जून तक वनाग्नि सीजन माना जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए 15 फरवरी को सभी डिवीजनों में एक साथ काल्पनिक आग की सूचना जारी की गई। सूचना मिलते ही संबंधित वन प्रभागों की टीमें सक्रिय हो गईं और तय स्थानों पर पहुंचकर आग बुझाने की प्रक्रिया शुरू की गई।
कई विभागों की संयुक्त भागीदारी
इस मॉक ड्रिल की खास बात यह रही कि इसमें केवल वन विभाग ही नहीं, बल्कि एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, अग्निशमन विभाग, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने भी हिस्सा लिया। अलग-अलग स्थानों पर जंगल में आग लगने के काल्पनिक बिंदु तय किए गए थे, जहां से अलर्ट मिलते ही संयुक्त टीमें मौके पर पहुंचीं।
फील्ड स्तर पर कर्मचारियों ने फायर लाइन काटने, पानी के स्रोतों का उपयोग करने और उपलब्ध उपकरणों से आग पर नियंत्रण पाने का अभ्यास किया। साथ ही कर्मचारियों की सुरक्षा और समन्वय पर विशेष ध्यान दिया गया। स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस भी मौके पर तैनात रही, ताकि आपात स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता दी जा सके।
मुख्यालय से निगरानी
देहरादून स्थित वन मुख्यालय के कंट्रोल रूम से पूरे अभ्यास की लाइव निगरानी की गई। अधिकारियों ने सभी 41 डिवीजनों की स्थिति पर नजर रखी और यह देखा कि सूचना का आदान-प्रदान कितनी तेजी से हो रहा है। साथ ही यह भी आकलन किया गया कि किसी आपात स्थिति में आदेश और संसाधन कितनी जल्दी जमीनी स्तर तक पहुंच पाते हैं।
अधिकारियों के अनुसार, इस अभ्यास से विभागों के बीच तालमेल मजबूत हुआ है और कई महत्वपूर्ण बिंदु सामने आए हैं, जिनमें सुधार की आवश्यकता है। अब सभी डिवीजनों से विस्तृत रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।
जागरूकता और सतर्कता पर जोर
वन विभाग ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से अपील की है कि जंगलों में आग न जलाएं और किसी भी प्रकार की लापरवाही से बचें। सूखी घास और पत्तियों के कारण जंगल इस समय बेहद संवेदनशील हैं, ऐसे में छोटी सी चिंगारी भी बड़ी आग का रूप ले सकती है।
राज्यव्यापी यह मॉक ड्रिल स्पष्ट संकेत है कि सरकार वनाग्नि जैसी गंभीर समस्या से निपटने के लिए गंभीर है। उम्मीद है कि समय रहते की गई यह तैयारी फायर सीजन के दौरान वास्तविक घटनाओं में प्रभावी साबित होगी।

