देहरादून: टिहरी जिले के पेपोला ढुंग गांव में 7 साल पहले मिले रहस्यमयी प्राचीन हथियारों को अब वैज्ञानिक अध्ययन के लिए भेजने की तैयारी की जा रही है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया है, और रिपोर्ट एक महीने के भीतर आने की संभावना है। इस अध्ययन के जरिए यह पता चल सकेगा कि ये हथियार किस काल के हैं और उनका ऐतिहासिक महत्व क्या है।
7 साल बाद हरकत में आया भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण
जून 2017 में टिहरी जिले के सुदूरवर्ती पेपोला ढुंग गांव में सड़क निर्माण के दौरान खुदाई के दौरान ये प्राचीन हथियार मिले थे। मजदूरों को खुदाई के दौरान 84 तलवारें, भाले और खंजर जैसी धातु की वस्तुएं मिली थीं, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी।
स्थानीय लोगों ने इन हथियारों को टिहरी के राजा-महाराजाओं के काल से जोड़ते हुए कयास लगाए कि ये किसी ऐतिहासिक युद्ध के अवशेष हो सकते हैं। हालांकि, ASI ने इन हथियारों को अपने कब्जे में ले लिया था, लेकिन तब से लेकर अब तक कोई आधिकारिक रिपोर्ट नहीं जारी की गई थी।
इतिहासकार ने सूचना के अधिकार (RTI) से मांगा जवाब
इतिहासकार राजू गुसाईं ने इस मामले में सूचना के अधिकार (RTI) के तहत एएसआई से जवाब मांगा। उन्होंने सवाल उठाया कि 7 साल बीत जाने के बावजूद इन प्राचीन हथियारों पर अध्ययन क्यों नहीं किया गया?
आरटीआई के जवाब में यह स्पष्ट हुआ कि हथियार एएसआई देहरादून कार्यालय में रखे हुए हैं, लेकिन अभी तक उनकी कार्बन डेटिंग या अन्य वैज्ञानिक जांच नहीं हुई है। साथ ही, मुख्यालय से कोई आधिकारिक पत्राचार भी नहीं किया गया और खोजे गए हथियारों पर कोई अंतिम रिपोर्ट प्रकाशित नहीं हुई।
अब क्यों हो रही है जांच?
अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने इन हथियारों पर अध्ययन शुरू करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इनकी जांच से यह पता चल सकेगा कि ये हथियार कितने पुराने हैं, किस सभ्यता से जुड़े हैं और इनका ऐतिहासिक महत्व क्या है।
ग्रामीणों की मांग – हथियारों को लौटाया जाए
इतिहासकार राजू गुसाईं ने सवाल उठाया कि अगर एएसआई इन हथियारों पर कोई अध्ययन नहीं कर रहा था, तो फिर इन्हें ग्रामीणों को क्यों नहीं सौंपा गया? उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की आस्था और ऐतिहासिक विरासत को देखते हुए इन प्राचीन हथियारों को वापस लौटाया जाना चाहिए।
अब जबकि एएसआई ने आखिरकार 7 साल बाद इन हथियारों के अध्ययन की प्रक्रिया शुरू की है, उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इन रहस्यमयी हथियारों का राज खुल जाएगा। इस रिपोर्ट से न केवल टिहरी के इतिहास को लेकर नई जानकारी सामने आ सकती है, बल्कि यह भारत की प्राचीन युद्धकला और हथियार निर्माण तकनीक को समझने में भी मददगार साबित हो सकती है।

