उत्तराखंड

हर की पैड़ी पोस्टर विवाद पर ओवैसी का तीखा हमला, धामी सरकार–बीजेपी पर उठाए सवाल

Owaisi launches scathing attack on the Har Ki Pauri poster controversy, raising questions about the Dhami government and the BJP.

देहरादून: उत्तराखंड से जुड़े दो संवेदनशील मामलों को लेकर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने राज्य की धामी सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा प्रहार किया है। दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान ओवैसी ने हरिद्वार के हर की पैड़ी क्षेत्र में लगाए गए ‘गैर हिंदुओं के प्रवेश वर्जित’ पोस्टरों और देहरादून में त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की हत्या के मामले को उठाते हुए सरकार की कार्यशैली और सोच पर गंभीर सवाल खड़े किए।

हर की पैड़ी के पोस्टरों पर संविधान का हवाला

ओवैसी ने हर की पैड़ी पर लगाए गए पोस्टरों को सीधे तौर पर संविधान की भावना के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि कोई भी सार्वजनिक स्थान किसी एक समुदाय के लिए प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता। यह समानता और नागरिक अधिकारों के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन है। ओवैसी के अनुसार, इस तरह के पोस्टर समाज में भेदभाव और अलगाव की मानसिकता को बढ़ावा देते हैं, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खतरा है।

उन्होंने सवाल किया कि क्या अब देश में संविधान के बजाय कुछ संगठनों की सोच से नियम तय होंगे। अगर आज किसी को हर की पैड़ी से रोका जा रहा है, तो कल किसी और सार्वजनिक स्थान पर भी इसी तरह की पाबंदी लगाई जा सकती है।

धार्मिक आस्था बनाम संवैधानिक अधिकार

ओवैसी ने स्पष्ट किया कि वे सभी धर्मों की आस्थाओं और परंपराओं का सम्मान करते हैं, लेकिन धार्मिक आस्था के नाम पर नागरिक अधिकारों को सीमित नहीं किया जा सकता। भारत का संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और किसी भी धर्म या पहचान के आधार पर भेदभाव की अनुमति नहीं देता। उन्होंने कहा कि अब देश को यह तय करना होगा कि संविधान सर्वोच्च रहेगा या फिर मनमानी सोच।

देहरादून छात्र हत्या पर चिंता

ओवैसी ने देहरादून में त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है। उन्होंने आरोप लगाया कि हत्या के बाद प्रशासनिक स्तर पर मामले को हल्का दिखाने की कोशिश की गई। ओवैसी के अनुसार, इस घटना से जुड़े नस्लभेदी टिप्पणियों के आरोप भी सामने आए हैं, जो स्थिति को और चिंताजनक बनाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं कुछ दिनों तक चर्चा में रहती हैं, लेकिन फिर धीरे-धीरे भुला दी जाती हैं, जिससे पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिल पाता।

बीजेपी पर मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप

ओवैसी ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह जानबूझकर ऐसे विवादों को हवा देती है, ताकि बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे असल मुद्दों से जनता का ध्यान हटाया जा सके। उन्होंने कहा कि जब लोग रोजगार और सुविधाओं की बात करने लगते हैं, तभी समाज को बांटने वाले मुद्दे सामने आ जाते हैं।

राजनीतिक असर और आगे की स्थिति

ओवैसी के इन बयानों के बाद उत्तराखंड की राजनीति में नई बहस छिड़ने की संभावना है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि धामी सरकार और बीजेपी इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और इन संवेदनशील मामलों को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

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