भारतीय सैन्य अकादमी में पासिंग आउट परेड की तैयारियां पूरी, 491 युवा अफसर बनेंगे सेना की शान
Preparations for the passing out parade at the Indian Military Academy are complete; 491 young officers will soon become the pride of the army.
आईएमए में ऐतिहासिक पल, सेना प्रमुख करेंगे परेड का निरीक्षण
देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में शनिवार, 13 दिसंबर को आयोजित होने वाली पासिंग आउट परेड (पीओपी) की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस अवसर पर अकादमी से भारतीय सेना को 491 नए अधिकारी मिलने जा रहे हैं। खास बात यह है कि इस गरिमामयी समारोह में सेना प्रमुख स्वयं रिव्यूइंग ऑफिसर के रूप में मौजूद रहेंगे और पास आउट होने वाले अफसर कैडेट्स को संबोधित करेंगे।
कठिन प्रशिक्षण के बाद हासिल हुआ लक्ष्य
भारतीय सैन्य अकादमी से पास आउट होना हर कैडेट का सपना होता है। इन 491 कैडेट्स ने कड़े शारीरिक, मानसिक और रणनीतिक प्रशिक्षण से गुजरते हुए यह मुकाम हासिल किया है। वर्षों की मेहनत, अनुशासन और समर्पण के बाद अब ये युवा देश की सेवा के लिए भारतीय सेना का हिस्सा बनने जा रहे हैं। अकादमी का प्रशिक्षण न केवल सैन्य कौशल सिखाता है, बल्कि नेतृत्व, साहस और राष्ट्र के प्रति निष्ठा भी विकसित करता है।
मित्र देशों के कैडेट्स भी होंगे शामिल
इस बार की पासिंग आउट परेड को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप भी मिला है। भारतीय कैडेट्स के साथ-साथ 14 मित्र देशों के 34 कैडेट्स भी प्रशिक्षण पूरा कर पास आउट होंगे। इस तरह कुल 525 कैडेट्स एक साथ अकादमी से निकलकर अपने-अपने देशों की सेनाओं में सेवा देंगे। यह आईएमए की वैश्विक पहचान और भरोसे को दर्शाता है, जहां विभिन्न देशों के कैडेट्स एक समान अनुशासन और सैन्य मूल्यों के साथ प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं।
देशसेवा की शपथ के साथ नया अध्याय शुरू
पासिंग आउट परेड के दौरान कैडेट्स देश की रक्षा और संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ लेंगे। यह क्षण न केवल कैडेट्स के लिए, बल्कि उनके परिवारों और अकादमी के लिए भी गर्व का होता है। हर बैच अपने साथ नई ऊर्जा और जिम्मेदारी लेकर निकलता है, और इतिहास में अपना नाम दर्ज कराता है।
93 वर्षों की गौरवशाली परंपरा
साल 1932 में स्थापित भारतीय सैन्य अकादमी अब तक करीब 67 हजार से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षण देकर भारतीय सेना को सौंप चुकी है। करीब 93 वर्षों की यात्रा में अकादमी ने अनुशासन, साहस और नेतृत्व की अपनी परंपरा को बनाए रखा है। इस बार के बैच के लिए यह और भी खास है कि जिस सेना का वे हिस्सा बनने जा रहे हैं, उसके प्रमुख स्वयं उनके सामने होंगे और उन्हें मार्गदर्शन देंगे। यह पल उनके सैन्य जीवन की मजबूत शुरुआत का प्रतीक बनेगा।


