अप्रैल की शुरुआत के साथ ही भारत के मौसम विभाग (IMD) ने एक बड़ी चेतावनी जारी की है। एक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने के कारण उत्तर-पश्चिम भारत से लेकर दक्षिण भारत तक के मौसम में भारी उथल-पुथल मचने वाली है। 2 अप्रैल से 7 अप्रैल के बीच देश के अधिकांश हिस्सों में बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि (Hailstorm) और 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाएं जनजीवन को प्रभावित कर सकती हैं। मौसम विभाग ने अगले पांच दिनों के लिए राज्यों को ‘ऑरेंज’ और ‘येलो’ अलर्ट पर रखा है।
दिल्ली-NCR और पंजाब में ‘भारी’ दिन
उत्तर-पश्चिम भारत में 2 से 5 अप्रैल के बीच मौसम सबसे अधिक उग्र रहने की संभावना है।
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दिल्ली, पंजाब और हरियाणा: इन राज्यों में 3 और 4 अप्रैल को मौसम अपनी चरम सीमा पर होगा। यहाँ 40 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलेंगी और गरज-चमक के साथ मध्यम बारिश होगी। कई इलाकों में ओले गिरने की भी आशंका है, जिससे तापमान में गिरावट आएगी।
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उत्तर प्रदेश: पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 4 और 5 अप्रैल को आंधी-बारिश का दौर चलेगा। यहाँ भी ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है।
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राजस्थान: मरुस्थलीय राज्य में 2 से 4 अप्रैल और फिर 6-7 अप्रैल को धूल भरी आंधी के साथ हल्की बारिश हो सकती है।
पहाड़ों पर फिर लौटेगी सर्दी: बर्फबारी का अलर्ट
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के ऊंचे इलाकों में एक बार फिर ‘सफेद आफत’ दस्तक देने वाली है। 3 से 5 अप्रैल के बीच इन राज्यों के 3000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मध्यम से भारी बर्फबारी (Snowfall) हो सकती है। निचले इलाकों में मूसलाधार बारिश के कारण भूस्खलन (Landslides) का खतरा भी बढ़ गया है। कश्मीर घाटी में 3 अप्रैल को भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।
मध्य और पूर्वोत्तर भारत
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मध्य प्रदेश और विदर्भ: मध्य भारत में अगले 5 दिनों तक बादल छाए रहेंगे। 1 से 3 अप्रैल के बीच मध्य प्रदेश और विदर्भ में ओलावृष्टि की संभावना है, जो खड़ी फसलों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है।
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पूर्वोत्तर राज्य: असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में 1 और 2 अप्रैल को भारी बारिश और बिजली गिरने का खतरा बना हुआ है। यहाँ कुछ इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति भी पैदा हो सकती है।
पूर्वी और दक्षिण भारत
पूर्वी भारत के राज्यों, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में मौसम विभाग ने सबसे गंभीर चेतावनी जारी की है। यहाँ हवा की रफ्तार 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुँच सकती है। बिहार और झारखंड में भी गरज-चमक के साथ बारिश का अनुमान है।
वहीं, दक्षिण भारत के केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में हल्की बारिश होगी, लेकिन यहाँ एक अलग तरह की समस्या उमस और गर्मी लोगों को परेशान करेगी। केरल और ओडिशा के कुछ तटीय हिस्सों में ‘ह्यूमिड वेदर’ की चेतावनी दी गई है।
7 अप्रैल से एक्टिव होगा ‘नया’ पश्चिमी विक्षोभ
राहत की उम्मीद कर रहे लोगों के लिए मौसम विभाग ने एक और अपडेट दिया है। 7 अप्रैल से एक और नया पश्चिमी विक्षोभ हिमालयी क्षेत्रों में सक्रिय होगा। इसका मतलब है कि अप्रैल का पहला सप्ताह पूरी तरह से अस्थिर रहने वाला है। 7 अप्रैल के बाद उत्तर-पश्चिम भारत में दोबारा बारिश और तेज हवाओं का दौर शुरू हो सकता है, जिससे गर्मी की शुरुआत में देरी होगी।
किसानों के लिए विशेष ‘एडवाइजरी’
चूँकि यह समय रबी की फसलों की कटाई और खलिहानों में अनाज रखने का है, इसलिए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सतर्क किया है:
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फसल सुरक्षा: कटी हुई फसल को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर ले जाएं या वाटरप्रूफ तिरपाल से ढंकें।
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सिंचाई रोकें: अगले 5-6 दिनों तक खेतों में सिंचाई और कीटनाशकों के छिड़काव से बचें।
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बिजली से बचाव: बिजली कड़कने के दौरान खेतों में या पेड़ों के नीचे शरण न लें।
राज्यवार मौसमी गतिविधि (तालिका):
| क्षेत्र | प्रमुख राज्य | संभावित असर | अलर्ट की अवधि |
| उत्तर-पश्चिम | दिल्ली, पंजाब, हरियाणा | बारिश, ओले, तेज हवाएं | 3 – 5 अप्रैल |
| पहाड़ी क्षेत्र | उत्तराखंड, हिमाचल | बर्फबारी और वर्षा | 3 – 5 अप्रैल |
| पूर्वी भारत | प. बंगाल, ओडिशा | भीषण आंधी (70 kmph) | 2 – 4 अप्रैल |
| मध्य भारत | मध्य प्रदेश, विदर्भ | ओलावृष्टि और गरज | 1 – 3 अप्रैल |
| दक्षिण भारत | केरल, तमिलनाडु | उमस और हल्की बारिश | 1 – 4 अप्रैल |

