Badrinath Temple Opening 2026: वैदिक मंत्रों के बीच खुले बदरीनाथ धाम के कपाट, 16 हजार श्रद्धालुओं ने किए अखंड ज्योति के दर्शन
Badrinath Temple Opening 2026: The portals of Badrinath Dham opened amidst Vedic chants, and 16,000 devotees offered prayers before the Akhand Jyoti (eternal flame).
देवभूमि उत्तराखंड में Badrinath Temple Opening 2026 के साथ ही चारधाम यात्रा ने पूर्ण रूप ले लिया है। बदरीनाथ धाम के कपाट गुरुवार सुबह 6:15 बजे वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधि-विधान के बीच खोले गए। इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने के लिए देश-विदेश से 16 हजार से अधिक श्रद्धालु धाम पहुंचे थे।
पूरे मंदिर परिसर को करीब 25 क्विंटल फूलों से सजाया गया था, जिससे धाम का दृश्य और भी भव्य और दिव्य नजर आ रहा था। कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं ने अखंड ज्योति के दर्शन किए और “जय बदरी विशाल” के जयघोष से वातावरण गूंज उठा।
पहली पूजा प्रधानमंत्री के नाम, मुख्यमंत्री बने यजमान
Badrinath Temple Opening 2026 के दौरान मंदिर में पहली महाभिषेक पूजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से संपन्न हुई। इस पूजा के यजमान पुष्कर सिंह धामी रहे।
मुख्यमंत्री ने रावल के साथ गर्भगृह में प्रवेश कर पूजा-अर्चना की और देश एवं प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष ने भी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं।
सुबह 4:30 बजे से शुरू हुई कपाट खोलने की प्रक्रिया
Badrinath Temple Opening 2026 की प्रक्रिया तड़के सुबह 4:30 बजे से ही शुरू हो गई थी। भगवान के प्रतिनिधि उद्धवजी और कुबेरजी अपने पारंपरिक स्थानों से मंदिर पहुंचे। इसके बाद मंदिर के मुख्य पुजारी रावल अमरनाथ नंबूदरी ने भगवान बदरी विशाल को ओढ़ाए गए घृत कंबल को हटाया। साथ ही माता लक्ष्मी की मूर्ति को गर्भगृह से निकालकर उनके मूल स्थान पर स्थापित किया गया। सुबह 5:30 बजे द्वार पूजा शुरू हुई और निर्धारित मुहूर्त पर मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए।
चारधाम यात्रा को मिली पूर्णता
Kedarnath Temple के कपाट 22 अप्रैल को और गंगोत्री धाम एवं यमुनोत्री धाम के कपाट 19 अप्रैल को खुल चुके थे। अब Badrinath Temple Opening 2026 के साथ ही चारधाम यात्रा पूरी तरह शुरू हो गई है। इसके साथ ही जोशीमठ-नीती हाईवे पर स्थित भविष्य बदरी धाम के कपाट भी परंपरा अनुसार खोल दिए गए।
लोक संस्कृति और भक्ति का अनूठा संगम
कपाट खुलने के इस पावन अवसर पर केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति की झलक भी देखने को मिली। प्रसिद्ध जागर गायिका बसंती बिष्ट ने पारंपरिक जागरों की प्रस्तुति दी। वहीं माणा और बामणी गांव की महिलाओं ने मंदिर परिसर में झुमैलो नृत्य कर माहौल को और भी भक्तिमय बना दिया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन कर भक्ति की सरिता बहाई।
अखंड ज्योति के दर्शन को उमड़ा जनसैलाब
Badrinath Temple Opening 2026 के बाद अखंड ज्योति के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। यह ज्योति सर्दियों के दौरान भी निरंतर जलती रहती है और इसे देखने का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। श्रद्धालुओं ने लंबी कतारों में खड़े होकर भगवान बदरी विशाल के दर्शन किए और अपने जीवन में सुख-शांति की कामना की।
प्रशासन की व्यापक तैयारियां और सुरक्षा व्यवस्था
चारधाम यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए राज्य सरकार और प्रशासन ने व्यापक स्तर पर तैयारियां की हैं। Badrinath Temple Opening 2026 के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का विशेष ध्यान रखा गया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यात्रा को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए हर स्तर पर व्यवस्थाओं को मजबूत किया गया है। साथ ही उन्होंने श्रद्धालुओं से स्वच्छ और हरित यात्रा में सहयोग की अपील भी की।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिला बढ़ावा
Badrinath Temple Opening 2026 के साथ ही स्थानीय व्यापारियों, होटल संचालकों, दुकानदारों और अन्य लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ गए हैं। हर साल लाखों श्रद्धालु इस धाम में आते हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा मिलता है। यह यात्रा केवल धार्मिक महत्व ही नहीं रखती, बल्कि हजारों परिवारों के लिए आजीविका का प्रमुख स्रोत भी है।

