सीएम धामी करेंगे अल्मोड़ा के नंदा देवी मेले का शुभारंभ, तैयारियां पूरी
CM Dhami will inaugurate the Nanda Devi fair in Almora, preparations complete
अल्मोड़ा: सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा का ऐतिहासिक और धार्मिक नंदा देवी मेला आज से शुरू हो गया है। प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस मेले का उद्घाटन करेंगे। सात दिन तक चलने वाले इस आयोजन को लेकर नगर निगम और मंदिर समिति ने व्यापक तैयारियां की हैं।
28 अगस्त से 3 सितंबर तक होगा आयोजन
नंदा देवी मेला 28 अगस्त से 3 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान नगर में धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक रंगों का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रतियोगिताएं और धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करेंगे।
मुख्यमंत्री का कार्यक्रम
मुख्यमंत्री धामी का अल्मोड़ा दौरा कई कार्यक्रमों से जुड़ा हुआ है। वे आर्मी हेलीपैड से सर्किट हाउस पहुंचेंगे, इसके बाद मुंशी हरिप्रसाद टम्टा धर्मशाला और क्राफ्ट म्यूजियम का लोकार्पण करेंगे। इसके बाद पैदल यात्रा करते हुए वे नंदा देवी मंदिर परिसर जाएंगे और वहां मेले का उद्घाटन करेंगे।
नशा मुक्ति केंद्र का उद्घाटन भी
मुख्यमंत्री धामी मेडिकल कॉलेज, सोबन सिंह जीना राजकीय आयुर्विज्ञान एवं शोध संस्थान में नशा मुक्ति केंद्र का उद्घाटन भी करेंगे। शाम को उनका देहरादून लौटने का कार्यक्रम तय है।
सांस्कृतिक झलकियां और प्रतियोगिताएं
उद्घाटन से पहले नगर के विभिन्न विद्यालयों के बच्चे पारंपरिक झांकियां निकालेंगे। शाम को नृत्य प्रतियोगिता का फाइनल होगा। मेले के दौरान झोड़ा, चांचरी, भगनौल और छपेली नृत्य के साथ-साथ प्रसिद्ध लोकगायक अपनी प्रस्तुतियों से माहौल को जीवंत करेंगे। महिलाओं की विशेष भागीदारी से मेला और भी खास बनेगा।
मूर्ति निर्माण का महत्व
मेले की परंपरा के अनुसार मां नंदा और सुनंदा की मूर्तियां कदली वृक्ष से बनाई जाती हैं। इस बार केले के वृक्ष रैलाकोट दुला गांव से लाए जाएंगे। 29 अगस्त को इन वृक्षों को विशेष अनुष्ठान के साथ आमंत्रित किया जाएगा।
प्रशासन ने कसी कमर
सीएम धामी के आगमन और मेले की भव्यता को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद की गई है। पुलिस बल की तैनाती जगह-जगह की गई है, वहीं नगर निगम ने साफ-सफाई और यातायात प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया है।
आस्था और संस्कृति का संगम
नंदा देवी मेला सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि अल्मोड़ा की सांस्कृतिक पहचान है। यह आयोजन स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देता है और हजारों श्रद्धालु मां नंदा-सुनंदा के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं।

