उत्तराखंड

दीपावली की चमक पर छाया ज़हरीला धुआं, काशीपुर बना उत्तराखंड का सबसे प्रदूषित शहर

Toxic smoke overshadows Diwali's glow, Kashipur becomes Uttarakhand's most polluted city

देहरादून: इस बार दीपावली की रौशनी के साथ उत्तराखंड के आसमान में धुंध और धुआं भी तैरता नजर आया। आतिशबाजी की चकाचौंध ने भले ही त्योहार की रौनक बढ़ाई हो, मगर इसका खामियाज़ा प्रदेश की हवा को भुगतना पड़ा। राज्य के कई शहरों में वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर तक पहुंच गई — खासकर काशीपुर, देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश में हालात सबसे ज्यादा बिगड़े।


दीपावली की रात: रोशनी के साथ बढ़ा प्रदूषण

हर साल की तरह इस बार भी लोगों ने दीपावली पर खूब पटाखे फोड़े। लेकिन त्योहार की अगली सुबह जब सूरज निकला, तो हवा में फैला धुआं साफ दिखाई दे रहा था। उत्तराखंड पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (UPCB) की रिपोर्ट के अनुसार, दीपावली की रात अधिकांश शहरों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 200 से ऊपर चला गया, जो “Poor” श्रेणी में आता है।

नगर निगम और पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने प्रदूषण को कम करने के लिए रातभर ड्रोन से पानी का छिड़काव कराया, ताकि हवा में मौजूद धूल और जहरीले कणों को नीचे बैठाया जा सके। बावजूद इसके, वायु गुणवत्ता में खास सुधार नहीं हुआ।


देहरादून में AQI 254 तक पहुंचा

राजधानी देहरादून में दीपावली से पहले और बाद के आंकड़ों में बड़ा अंतर देखा गया।

  • घंटाघर क्षेत्र: 162 से बढ़कर 254
  • नेहरू कॉलोनी: 120 से बढ़कर 230
  • दून यूनिवर्सिटी: 64 से बढ़कर 128

विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी “Poor” हवा में लंबे समय तक रहना हृदय और फेफड़ों के मरीजों के लिए बेहद नुकसानदायक है।


काशीपुर की हवा सबसे ज्यादा जहरीली

उत्तराखंड में सबसे प्रदूषित शहर के रूप में काशीपुर ने इस बार नया रिकॉर्ड बनाया। दीपावली की रात यहां AQI 265 दर्ज किया गया — यानी “Very Poor” श्रेणी।

  • सरकारी अस्पताल क्षेत्र: 124 से बढ़कर 265
  • रुद्रपुर क्षेत्र: 118 से बढ़कर 243

स्थानीय निवासियों ने बताया कि आतिशबाजी के बाद हवा में जलन और भारीपन महसूस हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हवा में सुधार नहीं हुआ, तो इसका असर अगले कई दिनों तक लोगों की सेहत पर रह सकता है।


अन्य शहरों की स्थिति

ऋषिकेश, हरिद्वार और हल्द्वानी जैसे शहर भी प्रदूषण की मार से अछूते नहीं रहे।

  • ऋषिकेश: 122 से बढ़कर 135
  • हरिद्वार (ऋषिकुल): 133 से बढ़कर 190
  • हल्द्वानी: 120 से बढ़कर 194

वहीं, टिहरी, उत्तरकाशी और चमोली जैसे पहाड़ी जिलों में हवा अपेक्षाकृत साफ रही, जहां AQI 50 से 100 के बीच दर्ज किया गया।


ड्रोन से हवा साफ करने का प्रयास

पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि दीपावली के बाद भी प्रदूषण नियंत्रण की प्रक्रिया जारी रहेगी। ड्रोन से पानी का छिड़काव और मॉनिटरिंग बढ़ाई जाएगी ताकि वायु गुणवत्ता में सुधार लाया जा सके।


पर्यावरण के साथ मनाएं उत्सव

विशेषज्ञों ने अपील की है कि लोग अब ग्रीन पटाखों का इस्तेमाल करें और संयमित तरीके से दीपावली मनाएं। दीपावली का असली अर्थ केवल रोशनी नहीं, बल्कि स्वच्छता और सकारात्मकता भी है — और इसे बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।

 

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