ढकरानी कृषि विज्ञान केंद्र ने तैयार की उन्नत ‘एग्री फाउंड रेड’ प्याज की पौध, किसानों में बढ़ी मांग
Dhakarani Krishi Vigyan Kendra has developed improved 'Agri Found Red' onion seedlings, leading to increased demand among farmers.
विकासनगर: देहरादून स्थित कृषि विज्ञान केंद्र ढकरानी ने किसानों के लिए इस वर्ष उन्नत किस्म एग्री फाउंड रेड वैरायटी की प्याज की पौध तैयार की है, जिसकी मांग लगातार बढ़ रही है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह पौध पारंपरिक किस्मों के मुकाबले अधिक उत्पादन देती है और किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ प्रदान कर सकती है। इन दिनों क्षेत्र के किसान बड़ी संख्या में केंद्र पहुंचकर पौध खरीद रहे हैं।
केंद्र के वैज्ञानिकों की ओर से बताया गया कि कृषि विज्ञान ढकरानी कई वर्षों से किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली फल, फूल और सब्जी की पौध उपलब्ध कराता आ रहा है। साथ ही, किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और अधिक पैदावार प्राप्त करने के उपायों की जानकारी भी दी जाती है। इस वर्ष केंद्र द्वारा लगभग 100 कुंतल एग्री फाउंड रेड किस्म की प्याज की पौध तैयार की गई है, जिसे पूरी तरह कृषि विज्ञान केंद्र की अपनी भूमि पर विकसित किया गया है।
वैज्ञानिकों ने बताया कि दिसंबर के दूसरे सप्ताह से किसान इस पौध की रोपाई अपने खेतों और किचन गार्डन में शुरू कर सकते हैं। परीक्षणों के आधार पर बताया गया कि पांच किलो पौध लगाने पर लगभग डेढ़ कुंतल तक प्याज का उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। इस वैरायटी की एक खास विशेषता यह है कि इसमें रोग लगने की संभावना काफी कम रहती है, जिससे किसानों की मेहनत और लागत दोनों सुरक्षित रहती हैं। पिछले परीक्षणों में कई किस्मों की तुलना की गई, जिनमें एग्री फाउंड रेड को सबसे अधिक उपज देने वाली और टिकाऊ किस्म पाया गया।
केंद्र प्रभारी अशोक कुमार शर्मा ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र पिछले 15 वर्षों से लगातार किसानों को प्याज की पौध उपलब्ध कराता रहा है। इस वर्ष भी एक कुंतल बीज से तैयार पौध किसानों के लिए उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि लगभग 100 से 125 कुंतल तक की पौध किसानों को दी जा सकती है, जिसे ₹120 प्रति किलो की दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है। यह किस्म मैदानी, भावर, तराई तथा मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए अत्यंत उपयुक्त मानी जा रही है।
शर्मा ने यह भी बताया कि पिछले सात से आठ वर्षों के दौरान किए गए परीक्षणों में इस किस्म में स्प्राउटिंग और बोल्टिंग जैसी समस्याएं नहीं देखी गईं, जिससे किसानों को लगातार बेहतर उत्पादन प्राप्त हुआ है। कई किसानों ने इस पौध का उपयोग करते हुए पांच किलो रोपाई से एक से डेढ़ कुंतल तक प्याज उत्पन्न कर सकारात्मक परिणाम हासिल किए हैं।
ढकरानी कृषि विज्ञान केंद्र का कहना है कि उन्नत किस्मों की उपलब्धता और वैज्ञानिक मार्गदर्शन के कारण किसान लगातार बेहतर फसल उगा रहे हैं और यह पहल क्षेत्र की कृषि उत्पादकता को और मजबूत करेगी।



