उभरती थारू लोक गायिका रिंकू राणा की सड़क हादसे में दुखद मौत
Rising Tharu folk singer Rinku Rana tragically dies in a road accident
खटीमा: थारू जनजाति समाज की उभरती लोक गायिका रिंकू राणा का खटीमा में सड़क दुर्घटना में निधन हो गया। रिंकू राणा नानकमत्ता के बिचपुरी निवासी थीं और उन्हें समाज में प्रथम लोक गायिका के रूप में पहचाना जाता था। घटना उस समय हुई जब वह होली मनाकर अपनी भतीजी के साथ स्कूटी से लौट रही थीं। इसी दौरान तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्रॉली की चपेट में आने से वह गंभीर रूप से घायल हो गईं।
दुर्घटना का विवरण
रिंकू राणा बंटी राणा सांस्कृतिक दल के साथ राज्य स्तरीय कार्यक्रमों में प्रस्तुति देती थीं और दल प्रमुख भी रही हैं। हादसे के समय वह अपनी भतीजी के साथ स्कूटी में वापस लौट रही थीं। ईंटों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली ने उनकी स्कूटी को जोरदार टक्कर मारी, जिससे रिंकू राणा और उनकी भतीजी दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तुरंत खटीमा अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने रिंकू राणा को मृत घोषित कर दिया। उनकी भतीजी का इलाज अभी जारी है।
रिंकू राणा के शव को पोस्टमार्टम के लिए खटीमा उपजिला अस्पताल भेजा गया। पोस्टमार्टम की कार्रवाई पूरी होने के बाद उनके परिवार को सौंपा जाएगा।
व्यक्तिगत जीवन और सांस्कृतिक योगदान
रिंकू राणा 36 वर्ष की थीं और अपने पीछे पति महेश सिंह और 9 साल के बेटे निशांत सिंह को छोड़ गई हैं। उनका ससुराल नानकमत्ता के पूरनगढ़ नौगला में था। उन्होंने थारू जनजाति समाज में अपनी लोक गायकी से पहचान बनाई और बंटी राणा सांस्कृतिक दल के साथ विभिन्न राज्य स्तरीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लिया। उनके असामयिक निधन से उनके परिवार और थारू जनजाति समाज के लोक कलाकारों में शोक का माहौल है।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
सीमांत क्षेत्र की इस उभरती गायिका के निधन पर प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, खटीमा विधायक और उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी ने शोक व्यक्त किया। उन्होंने रिंकू राणा के असमय निधन को एक बड़ी क्षति बताते हुए उनके परिवार के प्रति संवेदना जताई।
थारू समाज और स्थानीय सांस्कृतिक मंडलों ने भी रिंकू राणा के योगदान और उनके सांस्कृतिक क्षेत्र में किये गए कार्यों को याद किया। उनकी गायकी और नेतृत्व क्षमता ने न केवल थारू समाज में, बल्कि राज्य स्तर पर भी सांस्कृतिक पहचान बनाने में मदद की।
रिंकू राणा का निधन सिर्फ उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे थारू जनजाति समाज और लोक कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उनके द्वारा स्थापित सांस्कृतिक धरोहर को याद रखते हुए, समाज के लोग उन्हें हमेशा श्रद्धांजलि देंगे।



