पिथौरागढ़ में मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने की नई पहल, भालू और गुलदार पर नजर रखेगी AI तकनीक
A new initiative to tackle human-wildlife conflict in Pithoragarh will use AI technology to monitor bears and leopards.
पिथौरागढ़ (उत्तराखंड): उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में लगातार बढ़ रहे मानव-वन्यजीव संघर्ष ने प्रशासन और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। भालू और गुलदार के हमलों से जान-माल का नुकसान हो रहा है। इसी चुनौती से निपटने के लिए वन विभाग ने एक नई और आधुनिक पहल शुरू की है। सीमांत जिला पिथौरागढ़ को इस प्रयोग के लिए मॉडल जिला के रूप में चुना गया है, जहां अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीक से वन्यजीवों की निगरानी और नियंत्रण किया जाएगा।
भालू प्रभावित इलाकों में लगेंगी AI पावर्ड डिवाइस
पिथौरागढ़ जिले के उन क्षेत्रों में, जहां भालुओं और गुलदारों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है, वहां AI पावर्ड डिवाइस स्थापित की जाएंगी। इन डिवाइस के जरिए न केवल वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी, बल्कि उन्हें आबादी वाले इलाकों से दूर भगाने की व्यवस्था भी की गई है। यह पहल पहाड़ी क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
AI कैमरों से होगी 24 घंटे निगरानी
AI तकनीक से लैस इन डिवाइस में हाई क्वालिटी कैमरे लगाए जाएंगे, जो जंगल और आबादी से सटे इलाकों पर लगातार निगरानी करेंगे। ये कैमरे 100 से 150 मीटर की दूरी तक बड़े वन्यजीवों की गतिविधि को पहचानने में सक्षम होंगे। कैमरों को पहले से ही भालू, गुलदार और तेंदुए जैसे जानवरों की पहचान सिखाई जाएगी। जैसे ही कोई खतरनाक वन्यजीव कैमरे की रेंज में आएगा, सिस्टम स्वतः सक्रिय हो जाएगा।
तेज आवाज और स्पेशल स्प्रे से भागेंगे जानवर
जैसे ही AI सिस्टम किसी भालू या गुलदार को पहचानता है, डिवाइस में लगा स्पीकर तेज और विशेष प्रकार की आवाज निकालता है, जिससे ये जानवर डरकर उस स्थान से दूर चले जाते हैं। कुछ डिवाइस में गंध वाली विशेष स्प्रे भी लगाई जाएगी। यदि जानवर बहुत ज्यादा पास आ जाता है, तो यह स्प्रे अपने आप हवा में छोड़ी जाएगी। इसकी गंध वन्यजीवों को पसंद नहीं होती, जिससे वे उस इलाके को छोड़ देते हैं और दोबारा वहां आने से बचते हैं।
वन अधिकारियों के मोबाइल से जुड़ा होगा सिस्टम
AI पावर्ड डिवाइस को वन विभाग के अधिकारियों के मोबाइल फोन से जोड़ा जाएगा। किसी भी इलाके में वन्यजीव की मौजूदगी दर्ज होते ही संबंधित अधिकारियों को तुरंत अलर्ट मैसेज मिलेगा। इससे वन विभाग की टीम समय रहते मौके पर पहुंच सकेगी और आसपास के गांवों के लोगों को भी पहले से सतर्क किया जा सकेगा।
पहले चरण में धारचूला में लगेंगी पांच डिवाइस
पिथौरागढ़ के डीएफओ आशुतोष सिंह ने बताया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के उद्देश्य से यह तकनीक अपनाई जा रही है। पहले चरण में धारचूला क्षेत्र के भालू प्रभावित इलाकों में पांच AI पावर्ड डिवाइस लगाने का निर्णय लिया गया है। फिलहाल डिवाइस असेंबल की जा रही हैं और जल्द ही इन्हें इंस्टॉल किया जाएगा।
धारचूला और दारमा घाटी में बढ़ा खतरा
धारचूला क्षेत्र पिछले कुछ महीनों से भालू के हमलों को लेकर बेहद संवेदनशील बना हुआ है। नवंबर 2025 में जयकोट क्षेत्र में एक युवक पर भालुओं के हमले की घटना सामने आई थी। वहीं पांगला गांव में भालू से बचने के दौरान एक ग्रामीण की खाई में गिरने से मौत हो गई थी। दारमा घाटी में भी भालू के हमलों से कई लोग घायल हो चुके हैं। इन घटनाओं के बाद AI आधारित यह पहल स्थानीय लोगों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखी जा रही है।

