नई दिल्ली: बढ़ते व्यापार युद्ध, अमेरिकी टैरिफ की धमकियों और रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन 27-28 फरवरी को भारत की यात्रा पर आ रही हैं। उनके साथ यूरोपीय आयोग के आयुक्तों का एक दल भी शामिल होगा। इस यात्रा को भारत-यूरोपीय संघ संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ट्रंप के टैरिफ और वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत की अहमियत बढ़ी
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता, रूस-यूक्रेन युद्ध और ट्रंप के दूसरे कार्यकाल से प्रभावित अस्थिर विश्व व्यवस्था में भारत और यूरोपीय संघ को स्थिर भागीदारी की जरूरत है। यूरोप अपने व्यापार और सुरक्षा नीतियों को संतुलित करने की कोशिश कर रहा है और भारत इसमें एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में उभर रहा है।
यूरोपीय संघ-भारत संबंधों को मिल सकता है नया आयाम
यूरोपीय आयोग की उप निदेशक शैरी मल्होत्रा के अनुसार, यह यात्रा यूरोपीय संघ-भारत रणनीतिक एजेंडा को आगे बढ़ाने में मदद करेगी। उन्होंने कहा कि यह दुर्लभ अवसर है जब यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष अपने नए कार्यकाल में पहली विदेश यात्रा के रूप में भारत आ रहे हैं और उनके साथ पूरा कॉलेज ऑफ कमिश्नर्स भी आ रहा है।
यूरोपीय संघ की वैश्विक रणनीति में भारत की भूमिका
मल्होत्रा के अनुसार, अमेरिका द्वारा यूरोपीय उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाने और संरक्षणवाद की प्रवृत्ति के बीच यूरोपीय संघ भारत जैसे लोकतांत्रिक साझेदारों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करना चाहता है। एफटीए (मुक्त व्यापार समझौता) वार्ता इस यात्रा का प्रमुख बिंदु रहेगा, हालांकि पर्यावरण नियमों और व्यापारिक शर्तों को लेकर कुछ मतभेद बने हुए हैं।
यूरोपीय संघ-भारत व्यापार और सुरक्षा संबंध होंगे मजबूत
यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उर्सुला वॉन डेर लेयेन द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। भारत-यूरोपीय संघ व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद की दूसरी मंत्रिस्तरीय बैठक और विभिन्न मंत्रियों के बीच द्विपक्षीय बैठकें भी होंगी। इसके अलावा, रक्षा और सुरक्षा सहयोग को बढ़ाने पर भी चर्चा होगी।
रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक राजनीति पर वार्ता की संभावना
पूर्व राजनयिक अमित दासगुप्ता के अनुसार, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष भारत आने से पहले यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की से मुलाकात करेंगी। ऐसे में रूस-यूक्रेन संघर्ष के समाधान को लेकर भारत और यूरोपीय संघ के बीच बातचीत संभव है। भारत इस मुद्दे पर संतुलित रुख अपनाएगा और कूटनीतिक समाधान की दिशा में अपनी भूमिका निभा सकता है।
भारत-यूरोपीय संघ व्यापार संबंधों को मिलेगा नया बल
यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। 2023 में दोनों के बीच 124 बिलियन यूरो का व्यापार हुआ, जो पिछले दशक में लगभग 90% बढ़ा है। भारत में 6,000 से अधिक यूरोपीय कंपनियां काम कर रही हैं, जो सीधे 1.7 मिलियन नौकरियां प्रदान करती हैं और अप्रत्यक्ष रूप से 5 मिलियन लोगों को रोजगार देती हैं।
मुक्त व्यापार समझौते पर वार्ता जारी
2022 में भारत और यूरोपीय संघ ने मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर फिर से बातचीत शुरू की थी। इस समझौते का अगला दौर 10-14 मार्च 2025 को ब्रुसेल्स में होगा। उर्सुला वॉन डेर लेयेन की यह यात्रा दोनों पक्षों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को और गति देने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।



