राज्य आंदोलनकारी दिवाकर भट्ट पंचतत्व में विलीन, हरिद्वार में उमड़ी श्रद्धांजलि की भीड़
State agitator Diwakar Bhatt immersed in the five elements, crowds gathered in Haridwar to pay tribute.
हरिद्वार: उत्तराखंड राज्य आंदोलन के प्रमुख योद्धा, पूर्व कैबिनेट मंत्री और ‘फील्ड मार्शल’ के नाम से प्रसिद्ध रहे दिवंगत दिवाकर भट्ट का आज हरिद्वार के खड़खड़ी श्मशान घाट पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनके पुत्र ललित भट्ट ने नम आंखों से उन्हें मुखाग्नि देकर अंतिम विदाई दी।
अंतिम संस्कार से पूर्व दिवाकर भट्ट के निवास से श्मशान घाट तक उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई। इस यात्रा में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, समर्थक और राज्य आंदोलन से जुड़े साथी शामिल हुए। रास्ते भर लोग “उत्तराखंड आंदोलनों के सिपाही अमर रहें” के नारे लगाते हुए उन्हें श्रद्धांजलि देते रहे।
राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
खड़खड़ी श्मशान घाट पर दिवाकर भट्ट को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से जिलाधिकारी मयूर दीक्षित और एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। प्रशासन की ओर से पूरी राजकीय व्यवस्था के साथ अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।
नेताओं ने दिवाकर भट्ट के निधन को उत्तराखंड की अपूर्णीय क्षति बताया। कई राजनीतिक दलों के दिग्गज नेता अंतिम दर्शन के लिए श्मशान घाट पहुंचे।
“राज्य आंदोलन का सच्चा सिपाही खो दिया”—नेताओं की भावुक प्रतिक्रिया
पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि अस्सी के दशक में वे दिवाकर भट्ट के साथ राज्य निर्माण के संघर्ष में कंधे से कंधा मिलाकर चले थे। उन्होंने कहा—
“उत्तराखंड के इतिहास में दिवाकर भट्ट का नाम स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा।”
यूकेडी के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष काशी सिंह एरी ने उन्हें “राज्य आंदोलन का बड़ा सिपाही” बताते हुए कहा कि दिवाकर भट्ट राज्य के हितों के लिए हमेशा चिंतित रहते थे।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा—
“दिवाकर भट्ट उत्तराखंडीयत की जीवंत पहचान थे। हमने एक सच्चा समाजसेवक खो दिया। ईश्वर उन्हें पुनर्जन्म में फिर उत्तराखंड की मिट्टी दे।”
दिग्गज नेताओं और जनता की भारी मौजूदगी
दिवाकर भट्ट को श्रद्धांजलि देने वालों में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, विधायक मदन कौशिक, विधायक रवि बहादुर, विधायक मुन्ना सिंह चौहान, पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत, यूकेडी अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती, और कई सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
इसके अलावा एचआरडीए सचिव मनीष सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट कुश्म चौहान, पुलिस और प्रशासन के अधिकारी तथा बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।
सभी की आंखें नम थीं, लेकिन सभी की जुबान पर एक ही बात थी— “दिवाकर भट्ट नहीं रहे, पर राज्य निर्माण का उनका संघर्ष हमेशा जीवित रहेगा।”



