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Pithoragarh Hailstorm: पिथौरागढ़ में आफत बनी ओलावृष्टि, 200 ग्राम के ओलों ने मचाई तबाही! 

Pithoragarh Hailstorm: Hailstorm Turns into a Calamity in Pithoragarh; 200-Gram Hailstones Wreak Havoc!

उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में गुरुवार को मौसम ने अचानक ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि लोगों में अफरा-तफरी मच गई। दोपहर बाद शुरू हुई तेज बारिश और भीषण ओलावृष्टि ने जिले के कई इलाकों में भारी तबाही मचा दी। आसमान से गिरे 100 से 200 ग्राम तक वजन वाले बड़े-बड़े ओलों ने फसलों, वाहनों और घरों को भारी नुकसान पहुंचाया।

जिला मुख्यालय समेत आसपास के क्षेत्रों में हालात कुछ देर के लिए ऐसे हो गए मानो किसी प्राकृतिक आपदा ने दस्तक दे दी हो। लोग घरों और दुकानों के अंदर छिपने को मजबूर हो गए, जबकि सड़कों पर खड़े कई वाहनों के शीशे और हेडलाइट टूट गए।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की भीषण Pithoragarh Hailstorm घटना पिछले कई वर्षों में कम ही देखने को मिली है। मौसम विभाग ने अगले पांच दिनों तक भारी बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी जारी कर दी है।

गोलियों की तरह गिरे बड़े-बड़े ओले

स्थानीय लोगों के अनुसार, गुरुवार दोपहर अचानक मौसम बदला और कुछ ही मिनटों में तेज बारिश के साथ विशाल आकार के ओले गिरने लगे। लोगों ने बताया कि ओलों का आकार इतना बड़ा था कि वे गोलियों की तरह तेजी से जमीन पर गिर रहे थे।

कई इलाकों में ओलों का वजन 100 से 200 ग्राम तक बताया गया है। ओलों की मार इतनी तेज थी कि घरों की खिड़कियों के शीशे चटक गए और सड़क किनारे खड़े वाहनों को गंभीर नुकसान पहुंचा।

बाजार में खुले में दुकान लगाने वाले व्यापारियों को सबसे अधिक नुकसान झेलना पड़ा। कई दुकानदार अपना सामान तक नहीं बचा सके। फल, सब्जियां और अन्य सामग्री बारिश और ओलों में खराब हो गई।

किसानों पर टूटी बड़ी मार

इस Pithoragarh Hailstorm का सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ा है। जिले के कई इलाकों में खेतों में तैयार खड़ी फसलें बर्बाद हो गईं। फलदार पेड़ों को भी भारी नुकसान पहुंचा है।

स्थानीय किसानों का कहना है कि लगातार बदलते मौसम ने पहले ही खेती को प्रभावित कर रखा था, लेकिन इस बार की ओलावृष्टि ने पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया। सब्जियों और बागवानी से जुड़े किसानों को लाखों रुपये के नुकसान की आशंका है।

विशेष रूप से सेब, आड़ू, खुबानी और स्थानीय सब्जियों की फसल प्रभावित हुई है। कई खेतों में ओलों की मोटी परत जम गई, जिससे पौधों को भारी नुकसान पहुंचा।

सड़कों पर पसरा सन्नाटा, लोग घरों में कैद

ओलावृष्टि के दौरान पिथौरागढ़ शहर की सड़कें लगभग खाली हो गईं। लोग अपनी जान बचाने के लिए दुकानों और घरों में छिपते नजर आए।

तेज आवाज के साथ गिर रहे ओलों के कारण लोगों में डर का माहौल बन गया। कई जगह बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई। अचानक बदले मौसम के कारण यातायात भी कुछ समय के लिए प्रभावित रहा।

हालांकि राहत की बात यह रही कि किसी बड़े हादसे या जनहानि की सूचना सामने नहीं आई है। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।

मुनस्यारी, डीडीहाट और कनालीछीना में भी खराब मौसम

जिला मुख्यालय के अलावा मुनस्यारी, कनालीछीना, डीडीहाट और धारचूला जैसे क्षेत्रों में भी मौसम का असर देखा गया।

मुनस्यारी में घंटों तक झमाझम बारिश होती रही, जबकि खलिया द्वार और बिटलीधार क्षेत्रों में भी ओलावृष्टि दर्ज की गई। कनालीछीना और डीडीहाट क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ बारिश ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं।

धारचूला में भी बूंदाबांदी के साथ मौसम लगातार खराब बना हुआ है। वहीं बेरीनाग, गंगोलीहाट और गणाईगंगोली क्षेत्रों में दिनभर बादल छाए रहे।

डेढ़ महीने में कई बार हो चुकी ओलावृष्टि

स्थानीय लोगों का कहना है कि बीते डेढ़ महीने में जिले में कई बार ओलावृष्टि हुई है, लेकिन गुरुवार की घटना सबसे ज्यादा भयावह रही।

बार-बार बदलते मौसम और असामान्य बारिश ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन का असर अब पहाड़ी राज्यों में अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, तापमान में अचानक बदलाव और पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के कारण इस तरह की घटनाएं बढ़ रही हैं।

मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

भीषण Pithoragarh Hailstorm के बाद मौसम विभाग ने अगले पांच दिनों तक जिले में भारी से बहुत भारी बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की है।

प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है। पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़क बाधित होने की आशंका भी जताई गई है।

कृषि विभाग को नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने के लिए कहा गया है।

जंगल की आग बुझने से मिली राहत

हालांकि लगातार बारिश के बीच एक राहत भरी खबर भी सामने आई है। जिले के जंगलों में पिछले कई दिनों से लगी आग बारिश के कारण काफी हद तक बुझ गई है।

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बारिश से जंगलों में फैल रही आग पर नियंत्रण पाने में मदद मिली है। इससे वन संपदा को और अधिक नुकसान होने से बचाया जा सका।

सड़क मार्ग खुले, लेकिन खतरा बरकरार

भारी बारिश और ओलावृष्टि के बावजूद जिले के सभी प्रमुख सड़क मार्ग फिलहाल यातायात के लिए खुले हुए हैं। प्रशासन लगातार संवेदनशील क्षेत्रों पर निगरानी बनाए हुए है।

हालांकि मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक खराब मौसम की संभावना जताई है, इसलिए प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इसी तरह मौसम में अस्थिरता बनी रही तो आने वाले दिनों में पहाड़ी इलाकों में और भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

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