Jaspur Wheat Field Fire 2026: जसपुर में कुदरत और सिस्टम की मार, शॉर्ट सर्किट से गेहूं के 20 बीघा खेत स्वाहा, दो किसानों की सालभर की मेहनत राख
Jaspur Wheat Field Fire 2026: A short circuit in Jaspur, destroying 20 bighas of wheat fields and destroying the hard work of two farmers for a year.

उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में गर्मी की तपिश बढ़ने के साथ ही किसानों की ‘पीली सोने’ जैसी पकी हुई फसल पर आफत मंडराने लगी है। जनपद ऊधम सिंह नगर के जसपुर क्षेत्र में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ बिजली के तारों में हुए शॉर्ट सर्किट ने दो किसानों के सपनों को जलाकर राख कर दिया। मनोरथपुर तृतीय गांव में लगी इस भीषण आग में लगभग 20 बीघा (करीब 4 एकड़) गेहूं की खड़ी फसल जलकर नष्ट हो गई। हालांकि, ग्रामीणों की अदम्य साहस और ट्रैक्टरों की मदद से किए गए ‘रेस्क्यू’ ने एक बड़े महाविनाश को टाल दिया।
दोपहर का सन्नाटा और अचानक उठी लपटें
घटना शनिवार दोपहर की है, जब मनोरथपुर तृतीय गांव के किसान अपने खेतों में कटाई की तैयारियों का जायजा ले रहे थे। अचानक खेतों के ऊपर से गुजर रही हाई-टेंशन लाइनों में शॉर्ट सर्किट हुआ और उससे निकली एक चिंगारी सूखी खड़ी फसल पर जा गिरी। तेज हवाओं और चिलचिलाती धूप के कारण आग ने चंद मिनटों में ही विकराल रूप धारण कर लिया। देखते ही देखते लपटें आसमान छूने लगीं और धुएं का गुबार पूरे गांव में फैल गया।
दयाल सिंह और सुरजीत सिंह पर टूटा दुखों का पहाड़
इस अग्निकांड में सबसे ज्यादा मार किसान दयाल सिंह और सुरजीत सिंह पर पड़ी है। इन दोनों किसानों की लगभग 20 बीघा गेहूं की फसल, जो पूरी तरह पककर कटने को तैयार थी, पल भर में काली राख में तब्दील हो गई। पीड़ित किसान दयाल सिंह ने नम आंखों से बताया, “यह केवल फसल नहीं थी, बल्कि हमारे पूरे साल का राशन और बच्चों की फीस थी। बिजली विभाग की ढीले तारों की लापरवाही ने हमें कहीं का नहीं छोड़ा।”
[Image Concept: A devastated farmer standing in a charred black wheat field, looking at the remains of his burnt crop]
ग्रामीणों की ‘ट्रैक्टर रणनीति’ ने बचाया पूरा गांव
जब आग बेकाबू होकर आसपास के सैकड़ों एकड़ खेतों की ओर बढ़ने लगी, तो ग्रामीणों ने गजब की सूझबूझ दिखाई।
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जुताई से बनाया सुरक्षा घेरा: दर्जनों किसान अपने-अपने ट्रैक्टर लेकर जलते खेतों में कूद पड़े। उन्होंने आग की लपटों के चारों ओर जमीन की गहरी जुताई कर दी, जिससे आग को आगे बढ़ने के लिए ‘ईंधन’ (सूखी फसल) नहीं मिला।
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सामूहिक प्रयास: गांव के युवाओं ने बाल्टियों और निजी टैंकरों से पानी डालकर आग की तीव्रता कम की। ग्रामीणों के इस त्वरित एक्शन ने प्रशासन और फायर ब्रिगेड के पहुँचने से पहले ही आग के घेरे को सीमित कर दिया, वरना पूरा इलाका स्वाहा हो सकता था।
प्रशासन का आश्वासन
घटना की सूचना मिलते ही जसपुर के तहसीलदार दिलीप सिंह राजस्व टीम के साथ मौके पर पहुँचे। उन्होंने जल चुके खेतों का मुआयना किया और पीड़ित किसानों से मुलाकात की। तहसीलदार ने पुष्टि की कि प्राथमिक जांच में आग का कारण बिजली के तारों में हुआ शॉर्ट सर्किट ही नजर आ रहा है।
उन्होंने मीडिया को बताया, “राजस्व विभाग की टीम नुकसान का सटीक आकलन (Patwari Report) कर रही है। दयाल सिंह और सुरजीत सिंह की करीब 20 बीघा फसल का नुकसान हुआ है। शासन के नियमों के अनुसार पीड़ित किसानों को अधिकतम संभव मुआवजे (Compensation) दिलाने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।
बिजली विभाग की लापरवाही पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों का आरोप है कि खेतों के ऊपर से गुजर रहे तार काफी ढीले हैं, जो तेज हवा चलने पर आपस में टकराते हैं। ‘फायर सीजन’ शुरू होने के बावजूद विभाग ने तारों को कसने या पेड़ों की छंटाई करने पर ध्यान नहीं दिया, जिसका खामियाजा अब गरीब किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
किसानों के लिए ‘फायर अलर्ट’
कृषि विशेषज्ञों ने इस मौसम में किसानों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है:
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ट्रांसफार्मर के पास सफाई: अपने खेत के पास स्थित ट्रांसफार्मर या बिजली के खंभों के आसपास 10 फीट तक की फसल पहले ही काट लें।
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पानी का भंडारण: कटाई के दौरान खेतों के पास पानी के ड्रम या रेत की बोरियां तैयार रखें।
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कटाई का समय: बहुत तेज धूप और हवा के दौरान थ्रेशर चलाने से बचें, क्योंकि घर्षण से निकली चिंगारी भी आग लगा सकती है।
घटना का संक्षिप्त विवरण (Table):
| विवरण | सांख्यिकी/जानकारी |
| स्थान | मनोरथपुर तृतीय, जसपुर (US Nagar) |
| नुकसान | 20 बीघा गेहूं की फसल |
| पीड़ित किसान | दयाल सिंह और सुरजीत सिंह |
| आग का कारण | बिजली शॉर्ट सर्किट |
| बचाव कार्य | ग्रामीणों द्वारा ट्रैक्टरों से जुताई |

