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144 साल बाद प्रयागराज में महाकुंभ: उत्तराखंड पवेलियन बना आस्था और संस्कृति का केंद्र
Maha Kumbh in Prayagraj after 144 years: Uttarakhand Pavilion becomes the center of faith and culture
मुख्य आकर्षण:
1. उत्तराखंड पवेलियन में देवभूमि का दिव्य अनुभव:
- प्रयागराज महाकुंभ में पहली बार 40,000 वर्ग फीट क्षेत्र में भव्य उत्तराखंड पवेलियन स्थापित।
- केदारनाथ द्वार और बद्रीनाथ द्वार के प्रवेश और निकास द्वार के रूप में निर्माण।
- अंदर चारधाम (यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ) की दिव्य प्रतिकृतियां।
- हरकी पैड़ी, हरिद्वार और गंगा की अविरल धारा के दर्शन।
- शीतकालीन चारधाम और मानसखंड मंदिर माला के तहत जागेश्वर धाम, गोल्ज्यू देवता, नीम करौली बाबा की भव्य प्रतिकृतियां।
2. श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुविधाएं:
- राज्य के तीर्थयात्रियों के लिए आवासीय सुविधा और स्थानीय भोजन की व्यवस्था।
- टेंट सिटी का निर्माण, जहां प्रतिदिन 10-15 हजार तीर्थयात्री भ्रमण कर रहे हैं।
- सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति की प्रस्तुति।
3. पारंपरिक उत्पाद और कला का प्रदर्शन:
- अंतरराष्ट्रीय ब्रांड ‘हाउस ऑफ हिमालया’, हथकरघा और हस्तशिल्प ब्रांड ‘हिमाद्री’ का प्रदर्शन।
- खादी, बांस उत्पाद, आयुर्वेदिक एवं योग चिकित्सा के विशेष स्टॉल।
- पर्यटन स्थलों और पारंपरिक उत्पादों की बिक्री की भी व्यवस्था।
4. भविष्य के आयोजन के लिए तैयारी:
- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह आयोजन 2026 में हरिद्वार में होने वाले कुंभ मेले की तैयारियों में मददगार साबित होगा।
- महाकुंभ में उत्तराखंड पवेलियन के जरिए तीर्थयात्रियों को राज्य के पर्यटन स्थलों और संस्कृति से जोड़ने का प्रयास।
स्थान और पहुंच:
- पवेलियन सेक्टर 7, कैलाशपुरी मार्ग पर स्थित।
- प्रयागराज जंक्शन से 8 किमी, एयरपोर्ट से 15 किमी, और संगम से मात्र 5 किमी की दूरी पर।
- निकटतम गंगा घाट मात्र 800 मीटर की दूरी पर।
सीएम धामी का संदेश:
“यह केवल एक मेला नहीं, बल्कि भारत और विश्व की संस्कृतियों का संगम है। उत्तराखंड पवेलियन के माध्यम से श्रद्धालुओं को देवभूमि के धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर से रूबरू कराया जा रहा है।”
संस्कृति के संगम और आध्यात्मिकता के इस भव्य आयोजन में उत्तराखंड पवेलियन बना तीर्थयात्रियों के लिए आस्था और आकर्षण का केंद्र।



