उत्तराखंड

Kishau Dam Project: किशाऊ बांध परियोजना को मिली नई रफ्तार, उत्तराखंड को 220 मेगावाट बिजली का बड़ा फायदा

Kishau Dam Project: Kishau Dam project gains new momentum; Uttarakhand set to reap major benefits with 220 MW of power.

Kishau Dam Project : उत्तराखंड की बहुप्रतीक्षित Kishau Dam Project को लेकर बड़ी प्रगति सामने आई है। लंबे समय से विभिन्न कारणों से अटकी इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अब केंद्र सरकार के सहयोग से नई गति मिलने जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री की मौजूदगी में हुई महत्वपूर्ण बैठक में परियोजना से जुड़े राज्यों के बीच सहमति बनने के बाद निर्माण कार्य का रास्ता लगभग साफ हो गया है। इस फैसले से न केवल उत्तराखंड को ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में मजबूती मिलेगी, बल्कि सिंचाई, जल प्रबंधन और क्षेत्रीय विकास को भी नया आयाम मिलेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि Kishau Dam Project के पूरा होने के बाद उत्तराखंड को करीब 220 मेगावाट बिजली का हिस्सा मिलेगा, जिससे राज्य की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में बड़ी सहायता मिलेगी। साथ ही यह परियोजना उत्तर भारत के कई राज्यों के लिए भी लाभकारी साबित होगी।

15 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनेगा विशाल बांध

यमुना की प्रमुख सहायक नदी टोंस पर प्रस्तावित Kishau Dam Project की कुल अनुमानित लागत लगभग 15 हजार करोड़ रुपये पहुंच चुकी है। शुरुआती दौर में इसकी लागत करीब 11,500 करोड़ रुपये आंकी गई थी, लेकिन वर्षों तक परियोजना अटकी रहने और लागत में वृद्धि के कारण यह आंकड़ा बढ़ गया।

यह बांध उत्तराखंड के देहरादून जिले और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की सीमा पर बनाया जाना प्रस्तावित है। परियोजना के तहत 235 मीटर ऊंचा बांध बनाया जाएगा, जो एशिया में टिहरी बांध के बाद दूसरा सबसे ऊंचा बांध माना जाएगा।

उत्तराखंड और हिमाचल को मिलेगा बराबर बिजली का हिस्सा

Kishau Dam Project के तहत कुल 442 मेगावाट विद्युत उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। समझौते के अनुसार उत्पादित बिजली का 50 प्रतिशत हिस्सा उत्तराखंड और 50 प्रतिशत हिस्सा हिमाचल प्रदेश को मिलेगा।

इस प्रकार उत्तराखंड को लगभग 220 मेगावाट बिजली प्राप्त होगी। वर्तमान समय में राज्य की बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए यह उत्पादन काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासकर गर्मी और सर्दी के मौसम में बिजली की बढ़ती खपत के दौरान यह परियोजना राज्य के लिए राहत का बड़ा स्रोत बन सकती है।

छह राज्यों को मिलेगा परियोजना का लाभ

हालांकि बिजली का सीधा लाभ उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश को मिलेगा, लेकिन Kishau Dam Project का फायदा छह राज्यों तक पहुंचेगा। इनमें उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान समेत अन्य लाभार्थी राज्य शामिल हैं।

इन राज्यों को परियोजना से जल आपूर्ति और सिंचाई सुविधाओं में लाभ मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के कारण कृषि क्षेत्र को भी बड़ा फायदा होगा।

केंद्र सरकार देगी विशेष वित्तीय सहायता

परियोजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती वित्तीय हिस्सेदारी को लेकर थी। हिमाचल प्रदेश ने पहले अपने हिस्से के वित्तीय भार को वहन करने में असमर्थता जताई थी, जिसके कारण Kishau Dam Project वर्षों तक आगे नहीं बढ़ पाई।

अब केंद्र सरकार ने इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। परियोजना के विद्युत घटक पर उत्तराखंड के हिस्से में आने वाले लगभग 800 करोड़ रुपये के खर्च के लिए केंद्र ने 50 वर्षों की अवधि का ब्याजमुक्त ऋण देने पर सहमति व्यक्त की है।

यह निर्णय राज्य सरकार के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है क्योंकि इससे परियोजना पर आर्थिक दबाव कम होगा और निर्माण कार्य को गति मिलेगी।

सिंचाई क्षेत्र में भी होगा बड़ा बदलाव

Kishau Dam Project केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। इस परियोजना से लगभग 97,076 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने का अनुमान है। जल उपलब्धता बढ़ने से कृषि उत्पादन में सुधार होगा और किसानों को लंबे समय तक लाभ मिलेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार परियोजना से जल संरक्षण और बाढ़ नियंत्रण में भी मदद मिलेगी। इसके साथ ही जलाशय बनने से आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।

32 किलोमीटर लंबी झील बनेगी आकर्षण का केंद्र

परियोजना के अंतर्गत करीब 32 किलोमीटर लंबी विशाल झील का निर्माण प्रस्तावित है। यह झील भविष्य में पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

उत्तराखंड पहले से ही प्राकृतिक पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है और Kishau Dam Project के बाद इस क्षेत्र में नए पर्यटन अवसर विकसित होने की संभावना जताई जा रही है।

कई गांव होंगे प्रभावित

परियोजना के विकास के साथ कुछ चुनौतियां भी सामने हैं। Kishau Dam Project के कारण उत्तराखंड के नौ गांव और हिमाचल प्रदेश के आठ गांव प्रभावित होंगे।

आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड में 1452 हेक्टेयर और हिमाचल में 1498 हेक्टेयर भूमि परियोजना क्षेत्र में आएगी। कुल मिलाकर लगभग छह हजार लोगों के प्रभावित होने का अनुमान है। ऐसे में पुनर्वास और मुआवजा नीति को प्रभावी ढंग से लागू करना सरकारों के लिए बड़ी जिम्मेदारी होगी।

80 साल पुरानी परिकल्पना अब होगी साकार

दिलचस्प बात यह है कि Kishau Dam Project की परिकल्पना वर्ष 1944-45 में की गई थी। इसके बाद 1965 में पहली विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार हुई, लेकिन विभिन्न प्रशासनिक, तकनीकी और वित्तीय कारणों से यह परियोजना दशकों तक आगे नहीं बढ़ सकी।

वर्ष 2015 में इसे राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा मिलने के बाद उम्मीदें जगी थीं, लेकिन फिर भी काम शुरू नहीं हो पाया। अब केंद्र और राज्यों के बीच सहमति बनने के बाद इस ऐतिहासिक परियोजना के धरातल पर उतरने की संभावना मजबूत हो गई है।

उत्तराखंड के ऊर्जा भविष्य के लिए महत्वपूर्ण परियोजना

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि Kishau Dam Project उत्तराखंड के ऊर्जा क्षेत्र के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। राज्य को मिलने वाली 220 मेगावाट अतिरिक्त बिजली न केवल ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ाएगी बल्कि भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में भी मदद करेगी।

साथ ही सिंचाई, जल संरक्षण, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर इस परियोजना को उत्तराखंड के विकास की सबसे महत्वपूर्ण योजनाओं में शामिल करते हैं। केंद्र की वित्तीय सहायता और राज्यों की सहमति के बाद अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि परियोजना का निर्माण कार्य कब और कितनी तेजी से शुरू होता है।

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