उत्तराखंड में रजिस्ट्रेशन शुल्क बढ़ने से बढ़ी चिंता, आम जनता बोझिल, सरकार विकास के लिए जरूरी बता रही
Increased registration fees in Uttarakhand raise concerns, burdening the general public, while the government says it's necessary for development.
नैनीताल: उत्तराखंड में रजिस्ट्रेशन शुल्क और स्टांप ड्यूटी में बढ़ोतरी ने आम नागरिकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। सरकार द्वारा नए रेट लागू किए जाने के साथ ही अब किसी भी प्रकार की जमीन या संपत्ति की खरीद पहले से अधिक महंगी हो गई है। खासकर गरीब और मध्यम वर्ग के लिए घर खरीदना अब एक और बड़ी चुनौती बन गया है। सरकार का तर्क है कि शुल्क में यह परिवर्तन राज्य के राजस्व में वृद्धि करेगा, जिसका इस्तेमाल विकास कार्यों में किया जाएगा। हालांकि, जनता का बड़ा वर्ग इसे “आर्थिक बोझ” के रूप में देख रहा है।
रजिस्ट्रेशन शुल्क में बढ़ोतरी से बढ़ा आर्थिक दबाव
हल्द्वानी, देहरादून, नैनीताल और रामनगर जैसे शहरों में लोगों ने नई दरों के प्रति कड़ा विरोध जताया है। पहले रजिस्ट्रेशन शुल्क 2% था, जिसकी अधिकतम सीमा 25,000 रुपये निर्धारित थी। करीब एक दशक बाद इस सीमा को बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दिया गया है। यानी संपत्ति के मूल्य का 2% या 50,000 रुपये—दोनों में जो कम होगा, वही शुल्क देना होगा। आम नागरिकों का कहना है कि यह बदलाव सीधे उनके बजट पर असर डाल रहा है। पहले सर्किल रेट बढ़ने से जमीन की कीमतें पहले ही अत्यधिक बढ़ चुकी हैं, और अब रजिस्ट्रेशन शुल्क में बढ़ोतरी ने घर खरीदने के सपने को और दूर कर दिया है।
कई लोगों ने प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया है कि लगातार बढ़ती दरें स्थानीय लोगों को प्रभावित कर रही हैं, जबकि बड़े निवेशक—जो होटल, रिसॉर्ट या अन्य कारोबारी परियोजनाओं के लिए जमीन खरीदते हैं—उन्हें इसका कम प्रभाव पड़ेगा। आम जनता का कहना है कि सरकार को इस निर्णय की समीक्षा करनी चाहिए।
स्थानीय लोगों की नाराज़गी, चुनावी संकेत भी
रामनगर के सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र शर्मा ने इस निर्णय को “जनविरोधी” बताते हुए चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने बढ़ी हुई सीमा वापस नहीं ली, तो जनता 2027 के चुनाव में इसका स्पष्ट जवाब देगी। वहीं स्थानीय निवासी सुमित लोहनी का कहना है कि लगातार बढ़ते सर्किल रेट और शुल्क ने घर निर्माण को कठिन बना दिया है। उनका कहना है कि पहाड़ी निवासियों पर यह भार और अधिक बढ़ेगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ेगा।
कुछ लोगों का समर्थन, वित्तीय पारदर्शिता की दलील
जहां एक ओर विरोध जारी है, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इस बढ़ोतरी को सकारात्मक कदम मान रहे हैं। नैनीताल के निवासी गणेश रावत के अनुसार, रजिस्ट्रेशन शुल्क में बढ़ोतरी से संपत्ति के वास्तविक मूल्य और सरकारी दरों के बीच का अंतर कम होगा, जिससे काले धन के उपयोग पर रोक लगेगी। उनका कहना है कि सरकार को प्राप्त अतिरिक्त राजस्व राज्य में विकास कार्यों को गति देगा और वित्तीय पारदर्शिता बढ़ेगी।
कुल मिलाकर, रजिस्ट्रेशन शुल्क बढ़ने के फैसले ने पूरे उत्तराखंड में व्यापक बहस छेड़ दी है। जहां जनता का एक बड़ा हिस्सा इसे आर्थिक बोझ मान रहा है, वहीं कुछ लोग इसे सुधारात्मक कदम बता रहे हैं। आने वाले समय में सरकार इस विरोध और समर्थन के बीच किस दिशा में कदम बढ़ाती है, यह देखना दिलचस्प होगा।


