हरियाणा सीएम का उत्तराखंड दौरा, कांवड़ यात्रा, संस्कृति और शिक्षा पर दिया मजबूत संदेश
Haryana CM's visit to Uttarakhand, Gave a strong message on Kanwar Yatra, culture and education
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को उत्तराखंड की राजधानी देहरादून का दौरा किया, जहां उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की। सीएम धामी ने सैनी का पारंपरिक स्वागत करते हुए उन्हें उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान से जुड़े उपहार – चारधाम का प्रसाद और ‘हाउस ऑफ हिमालया’ ब्रांड के स्थानीय उत्पाद भेंट किए।
राज्यहित के मुद्दों पर हुई संवादात्मक बैठक
दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच क्षेत्रीय विकास, पर्यटन को बढ़ावा देने, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और पारस्परिक सहयोग को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने सहमति जताई कि पर्वतीय और मैदानी राज्यों के बीच समन्वित प्रयासों से नीतियों को जनहितकारी बनाया जा सकता है।
कांवड़ यात्रा पर सीएम सैनी का दृष्टिकोण
मुख्यमंत्री सैनी ने कांवड़ यात्रा को “भक्ति, अनुशासन और श्रद्धा का प्रतीक” बताया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता और आत्मिक अनुशासन का प्रतीक है। हर साल लाखों श्रद्धालु गंगाजल लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं, जो गहरी आस्था और समर्पण का प्रमाण है।
अराजक तत्वों को चेतावनी
कांवड़ यात्रा के मद्देनज़र सीएम सैनी ने चेताया कि यात्रा में खलल डालने या अव्यवस्था फैलाने वाले शरारती तत्वों पर सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने सभी लोगों से यात्रा की गरिमा बनाए रखने और शांतिपूर्ण वातावरण सुनिश्चित करने की अपील की।
महंत लोकेश दास की सीएम धामी को सराहना
आध्यात्मिक गुरु महंत लोकेश दास ने मुख्यमंत्री धामी से मुलाकात कर ‘ऑपरेशन कालनेमि’ की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह अभियान राज्य में अवैध धर्मांतरण और कट्टरपंथी गतिविधियों पर प्रभावी रोकथाम का प्रतीक है, जो “धर्म और संस्कृति की रक्षा” की दिशा में बड़ा कदम है।
शिक्षा में संस्कार जोड़ने की पहल
महंत लोकेश दास ने राज्य सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों में श्रीमद्भगवद्गीता और रामचरितमानस के श्लोकों व चौपाइयों के वाचन को अनिवार्य करने के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान नहीं, संस्कार भी प्रदान करे – यही राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है।
संस्कृति और विकास दोनों की दिशा में अग्रसर सरकारें
हरियाणा और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों की यह मुलाकात केवल शिष्टाचार नहीं, बल्कि यह संकेत है कि सरकारें अब विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक संतुलन पर भी गंभीर हैं।



