SBI ATM Transaction Fraud: देहरादून में SBI को भारी पड़ी एक गलती; 20 हजार के विवाद में उपभोक्ता को देना होगा 1.49 लाख का हर्जाना
SBI ATM Transaction Fraud: A mistake in Dehradun cost SBI dearly; consumer will have to pay 1.49 lakh in damages for a 20,000 rupee dispute.
यदि आप भी बैंक की तकनीकी खामियों और अधिकारियों के गैर-जिम्मेदाराना रवैये से परेशान हैं, तो देहरादून के गुरवंत सिंह की यह कहानी आपके लिए एक बड़ी मिसाल है। SBI ATM Transaction Fraud के एक मामले में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने देश के सबसे बड़े बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को कड़ी फटकार लगाते हुए करीब 1.5 लाख रुपये का हर्जाना भरने का आदेश दिया है। यह मामला साबित करता है कि अगर उपभोक्ता जागरूक हो, तो वह सिस्टम की बड़ी से बड़ी खामी को चुनौती दे सकता है।
क्या था पूरा मामला? एक असफल ट्रांजेक्शन की कहानी
घटना की शुरुआत 23 फरवरी 2022 को हुई, जब डालनवाला निवासी गुरवंत सिंह ने देहरादून स्थित एसबीआई के एटीएम से 10,000 रुपये निकालने का प्रयास किया। कार्ड स्वाइप करने के बाद न तो मशीन से पैसे निकले और न ही मोबाइल पर कोई मैसेज आया। गुरवंत इसे सामान्य तकनीकी खराबी समझकर घर लौट आए।
हैरानी तो तब हुई जब 3 और 4 मार्च को उनके खाते से कुल 20,000 रुपये कट गए। SBI ATM Transaction Fraud का शिकार होने के तुरंत बाद गुरवंत बैंक पहुंचे, लेकिन अधिकारियों ने सहयोग करने के बजाय “रटा-रटाया” जवाब दिया। बैंक का कहना था कि उनकी लॉग रिपोर्ट (Internal Log Report) के अनुसार ट्रांजेक्शन सफल रहा है और कैश निकल चुका है।
3 साल की लंबी कानूनी लड़ाई और बैंक का अड़ियल रुख
बैंक के अड़ियल रवैये से हार मानने के बजाय गुरवंत सिंह ने दिसंबर 2022 में जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। आयोग के अध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह खरे और सदस्य अलका नेगी की पीठ ने मामले की गहन सुनवाई की। आयोग ने बैंक से वह ठोस सबूत मांगे जिससे यह साबित हो सके कि 20,000 रुपये वास्तव में गुरवंत के हाथ लगे थे।
सुनवाई के दौरान बैंक कोई भी ऐसा सीसीटीवी फुटेज या पुख्ता साक्ष्य पेश नहीं कर सका जो यह दर्शाए कि उपभोक्ता ने कैश प्राप्त किया था। आयोग ने स्पष्ट किया कि बैंक केवल अपनी “मशीनी रिपोर्ट” के आधार पर ग्राहक के दावे को खारिज नहीं कर सकता। SBI ATM Transaction Fraud के इस केस ने बैंकों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
RBI की गाइडलाइन बनी बैंक के लिए गले की फांस
उपभोक्ता फोरम ने अपना फैसला सुनाते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की उस गाइडलाइन का हवाला दिया, जो बैंक अक्सर ग्राहकों से छिपाते हैं। नियम के अनुसार, यदि कोई बैंक एटीएम ट्रांजेक्शन की शिकायत मिलने के 7 कार्य दिवसों (Working Days) के भीतर समाधान नहीं करता है, तो उसे ग्राहक को 100 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से हर्जाना देना होगा।
चूंकि गुरवंत ने 4 मार्च 2022 को शिकायत दर्ज कराई थी और फैसला 5 अगस्त 2025 को आया, इस बीच कुल 1243 दिन बीत चुके थे। आयोग ने इसकी गणना इस प्रकार की:
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विलंब शुल्क (1243 दिन × ₹100): ₹1,24,300
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मूल राशि की वापसी: ₹20,000
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मानसिक उत्पीड़न और कानूनी खर्च: ₹5,000
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कुल हर्जाना: ₹1,49,300
उपभोक्ताओं के लिए आयोग का विशेष सुझाव
फैसला सुनाने के बाद आयोग की सदस्य अलका नेगी ने सभी उपभोक्ताओं को एक महत्वपूर्ण सलाह दी। उन्होंने कहा कि जब भी बैंक में कोई शिकायत दर्ज कराएं, उसकी ‘रिसीविंग’ (पावती) जरूर लें। कई बार बैंक मामलों को महीनों तक टालते हैं, ऐसी स्थिति में आप उपभोक्ता फोरम जा सकते हैं। SBI ATM Transaction Fraud जैसे मामलों में समय पर की गई शिकायत और उसके सबूत ही आपकी सबसे बड़ी ताकत हैं।
जागरूकता ही बचाव है
देहरादून का यह मामला उन हजारों लोगों के लिए उम्मीद की किरण है जो बैंक की गलतियों के कारण अपनी मेहनत की कमाई खो देते हैं और थक-हार कर बैठ जाते हैं। गुरवंत सिंह ने न केवल अपने 20 हजार रुपये वापस पाए, बल्कि बैंक को यह भी अहसास कराया कि उपभोक्ता की आवाज को दबाना महंगा पड़ सकता है।
