आईएएस अधिकारियों की बैठक में सीएम धामी का सख्त संदेश—‘फाइलों में देरी न हो, कार्य लक्ष्य आधारित हों’
CM Dhami's stern message at IAS officers' meeting, 'There should be no delay in files, work should be target-based'
कॉन्फ्रेंस के बाद सीएम धामी ने बुलाई उच्चस्तरीय बैठक
देहरादून: उत्तराखंड में आयोजित दो दिवसीय एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस के समापन के बाद रविवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन सहित राज्य के सभी वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। यह बैठक प्रदेश की प्रशासनिक मशीनरी को गति देने और कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से आयोजित की गई।
सीएम ने दी चेतावनी—‘फाइलों में देरी बर्दाश्त नहीं’
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह केवल औपचारिक संबोधन का मंच नहीं है, बल्कि प्रशासन की संवेदनशीलता और कार्यकुशलता पर गंभीर चर्चा का अवसर है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि फाइलों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए और सभी निर्णय समयबद्ध व लक्ष्य आधारित होने चाहिए। सीएम धामी ने कहा कि प्रशासनिक गति बढ़ाना अब समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
राज्य की 25 साल की यात्रा में प्रशासन की भूमिका सराहनीय—सीएम
सीएम धामी ने कहा कि उत्तराखंड ने अपने 25 वर्षों के सफर में अनेक चुनौतियों का सामना किया है और इन चुनौतियों को पार करने में प्रशासनिक तंत्र की निष्ठा और मेहनत का बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने अधिकारियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और संसाधनों की कमी के बावजूद राज्य प्रशासन ने उत्कृष्ट नेतृत्व क्षमता दिखाई है। लेकिन अब समय और अधिक दृढ़ता और संकल्प के साथ आगे बढ़ने का है।
तेजी, पारदर्शिता और जवाबदेही से ही आएगा परिवर्तन—धामी
मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले पांच वर्ष उत्तराखंड के लिए निर्णायक साबित होंगे। राज्य की हर योजना और हर निर्णय पारदर्शिता, गति और जवाबदेही पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि फाइलों का निस्तारण समय पर हो, योजनाओं का असर जमीनी स्तर पर तुरंत दिखाई दे और हर प्रक्रिया में जवाबदेही तय हो। सीएम ने चेताया कि लालफीताशाही और शिकायतों की अनदेखी से जनता का विश्वास टूटता है, इसलिए जन-केंद्रित प्रशासन अनिवार्य है।
अधिकारियों को याद दिलाई सेवा की मूल भावना और दी प्रेरणा
सीएम धामी ने अधिकारियों को सेवा की मूल भावना याद दिलाते हुए कहा कि उन्होंने यह पद धन या प्रतिष्ठा के लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्रसेवा के लिए चुना है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक इतिहास में कई अधिकारी अपनी ईमानदारी और जनसेवा के कारण आज भी सम्मानित किए जाते हैं। पद की प्रतिष्ठा सीमित समय की होती है, लेकिन काम का सम्मान आजीवन रहता है।
साइट निरीक्षण और मासिक समीक्षा अनिवार्य
बैठक के अंत में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि कोई भी कार्य अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए। सभी अधिकारी अपने क्षेत्रों में मासिक समीक्षा बैठकों, निरंतर मॉनिटरिंग और साइट निरीक्षण को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार ‘विकल्प रहित संकल्प’ के मंत्र के साथ राज्य को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने के लिए तेजी से काम कर रही है।



