उत्तराखंड

नैनीताल जिला पंचायत चुनाव में बवाल और बेतालघाट फायरिंग: सीएम धामी ने दिए सीबीसीआईडी जांच के आदेश

Chaos in Nainital district panchayat elections and Betalghat firing, CM Dhami orders CBI inquiry

नैनीताल: जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव 14 अगस्त को जिस तरह हिंसा, अपहरण और फायरिंग के आरोपों में उलझा, उसने पूरे उत्तराखंड की राजनीति में हलचल मचा दी है। कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने हैं, जबकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटनाओं को गंभीर मानते हुए सीबीसीआईडी जांच के आदेश दिए हैं।


चुनावी बवाल और अपहरण का आरोप

कांग्रेस ने भाजपा पर आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान उसके पांच जिला पंचायत सदस्यों का अपहरण किया गया। इस आरोप से राजनीतिक माहौल और गरम हो गया। घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसे कांग्रेस ने “लोकतंत्र की हत्या” बताया। वहीं भाजपा ने इसे सिरे से खारिज करते हुए पलटवार किया और कांग्रेस पर “झूठा प्रचार” फैलाने का आरोप लगाया। भाजपा प्रत्याशी दीपा दरमवाल ने कांग्रेस नेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया, जिससे मामला अब अदालत तक पहुंच गया है।


बेतालघाट में फायरिंग, घायल हुआ कार्यकर्ता

चुनाव के दिन ही बेतालघाट में दो गुटों के बीच झगड़ा इतना बढ़ा कि फायरिंग हो गई। गोली लगने से एक कार्यकर्ता घायल हो गया और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस घटना ने पूरे राज्य का ध्यान खींच लिया। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कई लोगों को गिरफ्तार किया और विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज किए।


मुख्यमंत्री धामी का कड़ा रुख

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट कहा कि कानून-व्यवस्था से कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत को मामले की विस्तृत जांच का जिम्मा सौंपा और 15 दिनों में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। साथ ही, सभी दर्ज मुकदमों की जांच सीबीसीआईडी को सौंपी गई ताकि किसी भी तरह का राजनीतिक पक्षपात न हो। धामी ने पुलिस अधिकारियों पर भी सख्ती दिखाई और भवाली के सीओ प्रमोद शाह तथा तल्लीताल थानाध्यक्ष को तत्काल जिले से हटा दिया।


विपक्ष का धरना और सरकार पर दबाव

विपक्ष ने इस प्रकरण को लेकर गैरसैंण विधानसभा परिसर में धरना शुरू किया। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और वरिष्ठ विधायक प्रीतम सिंह ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह अपहरण और फायरिंग जैसे गंभीर मामलों को हल्के में ले रही है। मुख्यमंत्री धामी ने व्यक्तिगत पहल करते हुए विपक्षी नेताओं से बातचीत की और उन्हें निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया।


बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता चुनाव

पंचायत चुनाव आमतौर पर स्थानीय राजनीति तक सीमित रहते हैं, लेकिन इस बार नैनीताल और बेतालघाट की घटनाओं ने राज्य ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी सुर्खियां बटोरीं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला भाजपा सरकार के लिए चुनौती है। धामी सरकार कानून-व्यवस्था पर सख्त संदेश देना चाहती है, जबकि विपक्ष इसे जनता के बीच सरकार की नाकामी साबित करने का अवसर मान रहा है।


जनता की नजरें जांच पर

प्रदेश की जनता चाहती है कि पंचायत चुनाव लोकतंत्र और विकास का माध्यम बने, न कि हिंसा और सत्ता संघर्ष का अखाड़ा। लोगों की उम्मीदें अब सीबीसीआईडी जांच और कुमाऊं कमिश्नर की रिपोर्ट से जुड़ी हैं। आने वाले दिनों में यही तय करेगा कि दोषियों तक कानून पहुंच पाता है या नहीं।

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