उत्तराखंड

Wildlife Monitoring: कॉर्बेट रेस्क्यू सेंटर बना हाईटेक, अब Wildlife Monitoring सिस्टम से मुख्यालय से होगी निगरानी

Wildlife Monitoring: Corbett Rescue Center Goes High-Tech; Monitoring to Now Be Conducted from Headquarters via Wildlife Monitoring System

उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में वन्यजीव सुरक्षा को एक नया तकनीकी आयाम मिला है। ढेला रेंज स्थित रेस्क्यू सेंटर को अब अत्याधुनिक Wildlife Monitoring सिस्टम से लैस कर दिया गया है। इस हाईटेक व्यवस्था के बाद अब रामनगर स्थित कॉर्बेट मुख्यालय से ही बाघों और गुलदारों की हर गतिविधि पर रियल टाइम निगरानी की जा सकेगी।

इस कदम को वन्यजीव संरक्षण और प्रबंधन में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है, जिससे न केवल सुरक्षा बढ़ेगी बल्कि पशुओं की देखभाल भी अधिक प्रभावी हो सकेगी।

रेस्क्यू सेंटर से मुख्यालय तक लाइव निगरानी

कॉर्बेट प्रशासन ने ढेला रेंज स्थित रेस्क्यू सेंटर में आधुनिक सीसीटीवी कैमरा सिस्टम स्थापित किया है। इस Wildlife Monitoring तकनीक के जरिए अब सभी बाड़ों की लाइव फीड सीधे मुख्यालय तक पहुंच रही है।

पहले अधिकारियों को 18–20 किलोमीटर दूर स्थित सेंटर तक बार-बार जाना पड़ता था, लेकिन अब यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल हो गई है।

30 बाड़ों में 60 कैमरे, हर गतिविधि पर पैनी नजर

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने बताया कि रेस्क्यू सेंटर में कुल 30 बाड़े हैं, जहां वर्तमान में 14 बाघ और 16 गुलदार रखे गए हैं।

हर बाड़े में दो-दो हाई क्वालिटी कैमरे लगाए गए हैं, यानी कुल लगभग 60 कैमरे पूरे सेंटर में सक्रिय हैं। इसके अलावा एंट्री गेट और बाहरी क्षेत्रों में भी निगरानी कैमरे लगाए गए हैं।

इस व्यवस्था से पूरा सेंटर अब एक मजबूत Wildlife Monitoring नेटवर्क के तहत आ गया है।

वन्यजीवों के स्वास्थ्य और व्यवहार पर नजर

नई तकनीक के जरिए अब वन्यजीवों की हर गतिविधि पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। इसमें उनके व्यवहार, खान-पान, स्वास्थ्य और मेडिकल स्थिति शामिल है।

डॉक्टरों और वन विभाग की टीम को अब किसी भी बदलाव की जानकारी तुरंत मिल सकेगी, जिससे समय पर उपचार और निर्णय लेना आसान होगा।

आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई संभव

कॉर्बेट प्रशासन के अनुसार, इस हाईटेक Wildlife Monitoring सिस्टम से किसी भी आपात स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया दी जा सकेगी।

यदि किसी बाघ या गुलदार के व्यवहार में असामान्यता दिखाई देती है, तो मुख्यालय तुरंत संबंधित टीम को अलर्ट कर सकता है। इससे रेस्क्यू सेंटर की सुरक्षा और भी मजबूत हो जाएगी।

वन्यजीव संरक्षण में तकनीक का नया युग

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की यह पहल वन्यजीव संरक्षण में आधुनिक तकनीक के उपयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि अब संरक्षण कार्य केवल जंगल तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल निगरानी प्रणाली से भी जुड़ चुका है।

यह Wildlife Monitoring मॉडल अन्य रिजर्व्स के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

कॉर्बेट प्रशासन का बड़ा कदम

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक ने बताया कि इस सिस्टम का उद्देश्य वन्यजीवों की सुरक्षा को और मजबूत करना और मानवीय हस्तक्षेप को कम करना है। उन्होंने कहा कि अब हर गतिविधि रिकॉर्ड होगी, जिससे रिसर्च और संरक्षण कार्यों में भी मदद मिलेगी।

 

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