उत्तराखंड

Dehradun Property Fraud Case: पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत की करीबी सोनिया आनंद पर दिव्यांग बुजुर्ग ने लगाया ₹43.20 लाख की धोखाधड़ी का आरोप, SSP ने दिए जांच के आदेश

Dehradun Property Fraud Case: An elderly person with a disability has accused Sonia Anand—a close associate of former minister Harak Singh Rawat of a fraud amounting to ₹43.20 lakh the SSP has ordered an investigation.

Dehradun Property Fraud Case: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में संपत्ति के सौदे से जुड़ा एक गंभीर विवाद सामने आया है। दोनों हाथ गंवा चुके दिव्यांग बुजुर्ग हरिओम सहगल ने पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत की करीबी जसबीर कौर आनंद उर्फ सोनिया आनंद रावत पर मकान खरीदने के बाद पूरी रकम का भुगतान नहीं करने, चेक बाउंस होने और जबरन मकान से बेदखल करने के आरोप लगाए हैं।

शिकायतकर्ता का दावा है कि वर्ष 2021 में उन्होंने अपनी संपत्ति का सौदा 56 लाख रुपये में किया था, लेकिन उन्हें केवल 12.80 लाख रुपये का भुगतान मिला। शेष 43.20 लाख रुपये आज तक नहीं मिले हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने प्रकरण की जांच पुलिस अधीक्षक नगर (SP City) को सौंपी है।

वहीं, सोनिया आनंद ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए दावा किया है कि संपत्ति की पूरी रकम का भुगतान किया जा चुका है। उन्होंने शिकायतकर्ता पर ब्लैकमेल करने का आरोप भी लगाया है।

Dehradun Property Fraud Case: Dehradun Property Fraud: क्या है पूरा मामला?

देहरादून के प्रेमनगर थाना क्षेत्र के कंडोली निवासी हरिओम सहगल ने शनिवार, 31 अक्टूबर को एसएसपी कार्यालय पहुंचकर संपत्ति के सौदे में कथित धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत के अनुसार, उन्होंने 21 जून 2021 को अपनी संपत्ति जसबीर कौर आनंद उर्फ सोनिया आनंद को दो विक्रय पत्रों के माध्यम से बेची थी।

संपत्ति का कुल सौदा 56 लाख रुपये में तय हुआ था।

हरिओम सहगल का आरोप है कि संपत्ति की रजिस्ट्री होने के बावजूद उन्हें तय रकम का पूरा भुगतान नहीं किया गया।

उन्होंने दावा किया कि उन्हें केवल 2.80 लाख और 10 लाख रुपये की दो किस्तों में कुल 12.80 लाख रुपये मिले।

बाकी 43.20 लाख रुपये का भुगतान नहीं हुआ।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि भुगतान के लिए दिए गए चेक भी बैंक में जमा करने पर बाउंस हो गए।

₹56 लाख का सौदा, लेकिन मिले सिर्फ ₹12.80 लाख

हरिओम सहगल के अनुसार, उन्होंने अपनी संपत्ति बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर बेचने का निर्णय लिया था।

उनका दावा है कि वर्ष 2021 में संपत्ति का बाजार मूल्य दो करोड़ रुपये से अधिक था, जबकि सरकारी मूल्यांकन लगभग 1.25 करोड़ रुपये से ज्यादा था।

इसके बावजूद उन्होंने 56 लाख रुपये में संपत्ति बेचने का समझौता किया।

शिकायतकर्ता के मुताबिक, सौदे के दौरान भुगतान के लिए भारतीय स्टेट बैंक और पंजाब नेशनल बैंक के चेक दिए गए थे।

उन्होंने आरोप लगाया कि रजिस्ट्री के दिन 25.20 लाख रुपये और 10 लाख रुपये के दो चेक उनसे वापस ले लिए गए।

बाद में 31 लाख रुपये का एक अन्य चेक दिया गया, जिसे अगस्त 2021 में बैंक में जमा करने के लिए कहा गया था।

हरिओम सहगल के अनुसार, 20 अगस्त 2021 को पर्याप्त धनराशि नहीं होने के कारण यह चेक बाउंस हो गया।

हालांकि, भुगतान की वास्तविक स्थिति और संबंधित बैंकिंग रिकॉर्ड की पुष्टि पुलिस जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।

बुजुर्ग ने लगाया जबरन मकान से निकालने का आरोप

हरिओम सहगल ने संपत्ति के भुगतान से जुड़े विवाद के अतिरिक्त गंभीर आरोप भी लगाए हैं।

उनका कहना है कि वर्ष 2022 में उन्हें जबरन उनके मकान से बाहर निकाल दिया गया और संपत्ति पर कब्जा कर लिया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें कई बार धमकियां दी गईं और उनके साथ मारपीट भी हुई।

शिकायतकर्ता ने अपनी आर्थिक और व्यक्तिगत स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि वह इस विवाद के कारण गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि अब उनके पास स्थायी आवास नहीं है और पहचान तथा पते से संबंधित दस्तावेजों के मामले में भी उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

हालांकि, ये सभी आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं। पुलिस जांच में इनके समर्थन में उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया जाना बाकी है।

Dehradun Property Fraud Case: दोनों हाथ गंवा चुके हैं शिकायतकर्ता हरिओम सहगल

इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू शिकायतकर्ता की शारीरिक स्थिति भी है।

हरिओम सहगल एक दिव्यांग बुजुर्ग हैं, जिन्होंने अपने दोनों हाथ गंवा दिए हैं।

इसके बावजूद वह संपत्ति विवाद को लेकर लगातार संबंधित अधिकारियों और न्यायिक संस्थाओं से संपर्क कर रहे हैं।

एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने भी शिकायतकर्ता की स्थिति का उल्लेख करते हुए मामले की गंभीरता को स्वीकार किया।

उन्होंने कहा कि पुलिस निष्पक्ष जांच करेगी और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

दिव्यांग व्यक्तियों के लिए संपत्ति, आर्थिक सुरक्षा और न्याय तक पहुंच से जुड़े मुद्दे विशेष महत्व रखते हैं।

ऐसे मामलों में शिकायत की निष्पक्ष जांच के साथ संबंधित व्यक्ति को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण होता है।

Cheque Bounce मामले में पहले भी हुई कानूनी कार्रवाई

हरिओम सहगल के अनुसार, संपत्ति के भुगतान के लिए दिए गए चेक बाउंस होने के बाद उन्होंने महाराष्ट्र के नासिक में कानूनी कार्रवाई शुरू की थी।

शिकायतकर्ता का कहना है कि संबंधित न्यायालय में सुनवाई के दौरान उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मामले को देहरादून स्थानांतरित कराया गया।

इसके अतिरिक्त संपत्ति के विक्रय पत्र निरस्त कराने के लिए भी न्यायालय में दो वाद लंबित होने की जानकारी दी गई है।

इन कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लेख शिकायतकर्ता के दावों के आधार पर किया गया है।

अलग-अलग न्यायालयों में लंबित मामलों की वर्तमान स्थिति संबंधित न्यायिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगी।

MDDA की सील तोड़ने का भी आरोप

हरिओम सहगल ने संपत्ति से जुड़े एक अन्य मामले की ओर भी पुलिस का ध्यान आकर्षित किया है।

उनका आरोप है कि संबंधित भवन को मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) ने वर्ष 2018 में सील किया था।

इसके बावजूद बाद में भवन की सील हटाकर उसका उपयोग किया गया।

शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि सील किसकी अनुमति से हटाई गई और इसके लिए संबंधित प्राधिकरण की स्वीकृति ली गई थी या नहीं।

यह आरोप भी जांच का विषय है।

भवन की सीलिंग, उसे हटाने की अनुमति और संपत्ति के उपयोग की वैधता का निर्धारण संबंधित विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर किया जा सकेगा।

SSP Pramendra Dobhal ने SP City को सौंपी जांच

देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने शिकायत मिलने के बाद मामले की विस्तृत जांच कराने का निर्णय लिया है।

उन्होंने एसपी सिटी को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है।

एसएसपी के अनुसार, शिकायतकर्ता ने संपत्ति खरीदने के बाद तय रकम का भुगतान नहीं होने और चेक बाउंस होने के आरोप लगाए हैं।

पुलिस इन आरोपों से संबंधित दस्तावेजों, भुगतान रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करेगी।

एसएसपी ने स्पष्ट किया कि जांच में आरोप सही पाए जाने पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति की राजनीतिक पहचान या संबंध जांच को प्रभावित नहीं करने चाहिए।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी में शिकायत के आधार पर जांच के आदेश दिए जाने की पुष्टि हुई है। आरोपों के सिद्ध होने या किसी आरोपी को दोषी ठहराए जाने की पुष्टि नहीं हुई है।

Sonia Anand Rawat ने आरोपों को बताया निराधार

इस विवाद में जसबीर कौर आनंद उर्फ सोनिया आनंद का पक्ष भी सामने आया है।

उन्होंने हरिओम सहगल के आरोपों को गलत और निराधार बताया है।

सोनिया आनंद का दावा है कि संपत्ति के सौदे की पूरी रकम शिकायतकर्ता और उनकी पत्नी को दी जा चुकी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि हरिओम सहगल उन्हें ब्लैकमेल कर रहे हैं।

उनके अनुसार, शिकायतकर्ता की अन्य लोगों के प्रति लगभग सात लाख रुपये की देनदारी भी उन्होंने चुकाई थी।

सोनिया आनंद ने कहा कि भुगतान से संबंधित दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस ने अभी उनसे संपर्क नहीं किया है, लेकिन जांच में वह पूरा सहयोग करेंगी और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराएंगी।

इस प्रकार मामले में दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। वास्तविक भुगतान और अन्य आरोपों की स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

Harak Singh Rawat से संबंध को लेकर राजनीतिक चर्चा

जसबीर कौर आनंद उर्फ सोनिया आनंद का नाम पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत से जुड़े होने के कारण भी चर्चा में है।

कुछ समाचार रिपोर्टों में उन्हें हरक सिंह रावत की पत्नी बताया गया है, जबकि अन्य रिपोर्टों में उन्हें पूर्व मंत्री की करीबी के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

ऐसे में दोनों के संबंध की प्रकृति को लेकर अलग-अलग मीडिया विवरण सामने आए हैं।

इस विवाद के बीच भाजपा की प्रदेश प्रवक्ता हनी पाठक ने भी हरक सिंह रावत और कांग्रेस से इस मामले में स्पष्टीकरण देने की मांग की है।

उन्होंने शिकायतकर्ता के दिव्यांग होने का उल्लेख करते हुए निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की आवश्यकता पर जोर दिया।

हालांकि, किसी राजनीतिक व्यक्ति से संबंध होने के आधार पर संपत्ति विवाद में उसकी कानूनी जिम्मेदारी स्वतः स्थापित नहीं होती।

पुलिस जांच का केंद्र संपत्ति के सौदे, भुगतान और शिकायत में लगाए गए आरोपों से संबंधित तथ्य होंगे।

Dehradun Property Fraud Case: अब पुलिस जांच में किन बातों की होगी पड़ताल?

इस मामले में पुलिस के सामने कई महत्वपूर्ण प्रश्न हैं।

सबसे पहले यह जांचना होगा कि वर्ष 2021 में हुए संपत्ति सौदे के तहत वास्तविक भुगतान कितना किया गया था।

इसके लिए बैंक खातों के विवरण, चेक रिकॉर्ड, विक्रय पत्र और अन्य वित्तीय दस्तावेज महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

दूसरा प्रश्न यह होगा कि जिन चेक के बाउंस होने का आरोप लगाया गया है, उनकी वास्तविक स्थिति क्या थी।

तीसरा महत्वपूर्ण पहलू शिकायतकर्ता के जबरन बेदखल किए जाने, धमकी और मारपीट से जुड़े आरोप हैं।

इसके अतिरिक्त भवन की कथित सीलिंग और उसके बाद उपयोग से संबंधित रिकॉर्ड भी आवश्यक होने पर जांच का हिस्सा बन सकते हैं।

पुलिस दोनों पक्षों के बयान और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगी।

जांच रिपोर्ट के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई

देहरादून में सामने आया यह संपत्ति विवाद अब पुलिस जांच के दायरे में है।

दिव्यांग बुजुर्ग हरिओम सहगल ने 56 लाख रुपये के संपत्ति सौदे में 43.20 लाख रुपये बकाया रहने और जबरन मकान से निकालने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

वहीं, सोनिया आनंद ने इन आरोपों को खारिज करते हुए पूरा भुगतान करने का दावा किया है।

एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने मामले की जांच एसपी सिटी को सौंप दी है।

अब पुलिस की जांच में सामने आने वाले बैंकिंग दस्तावेज, संपत्ति रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्य यह निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे कि शिकायत में लगाए गए आरोपों का तथ्यात्मक आधार क्या है।

फिलहाल किसी भी पक्ष के दावों को अंतिम रूप से सिद्ध नहीं माना जा सकता।

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