Uttarakhand Helicopter Crash Update: जोशीमठ हेलिकॉप्टर हादसे में सभी 6 शव बरामद, दुर्गम पहाड़ियों से पैदल निकालकर एम्स ऋषिकेश भेजे गए; दुर्घटना की जांच शुरू
Uttarakhand Helicopter Crash Update: All 6 bodies recovered from the Joshimath helicopter crash site; they were transported on foot through the rugged, mountainous terrain and sent to AIIMS Rishikesh. An investigation into the accident has begun.
Uttarakhand Helicopter Crash Update: उत्तराखंड के जोशीमठ में 30 अक्टूबर को हुए भीषण हेलिकॉप्टर हादसे के तीन दिन बाद राहत एवं बचाव अभियान में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। चमोली जिला प्रशासन ने रविवार सुबह दुर्घटना में जान गंवाने वाले सभी छह लोगों के शव बरामद किए जाने की पुष्टि की है। दुर्गम पहाड़ी रास्तों से शवों को निकालकर जोशीमठ पहुंचाया गया और इसके बाद पोस्टमार्टम के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), ऋषिकेश भेज दिया गया।
शुक्रवार को बदरीनाथ से देहरादून लौट रहा निजी कंपनी ट्रांस भारत एविएशन का हेलिकॉप्टर जोशीमठ के चाईं गांव के पास पहाड़ी से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। हादसे में पायलट और पांच तीर्थयात्रियों सहित सभी छह लोगों की मौत हो गई थी।
दुर्घटनास्थल अत्यंत दुर्गम और ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्र में स्थित होने के कारण बचाव दलों को शव निकालने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। खराब मौसम और चुनौतीपूर्ण रास्तों के बीच सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और अन्य विभागों की संयुक्त टीमों ने अभियान पूरा किया।
Joshimath Helicopter Crash: रविवार सुबह बरामद हुए सभी शव
चमोली जिला प्रशासन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, दुर्घटनास्थल से सभी छह मृतकों के शव सुरक्षित तरीके से निकाल लिए गए हैं।
बचाव दलों को घटनास्थल तक पहुंचने के लिए दुर्गम पहाड़ी रास्तों पर लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ी।
शवों को दुर्घटनास्थल से सड़क मार्ग तक लाया गया। इसके बाद उन्हें जोशीमठ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया।
आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद सभी शवों को हेलिकॉप्टर के माध्यम से एम्स ऋषिकेश भेजा गया।
रविवार सुबह जारी प्रशासनिक रिपोर्ट में बताया गया कि दुर्घटनास्थल पर तैनात बचाव दलों के सभी सदस्य भी वापस लौट आए हैं।
इससे पहले शनिवार तक शवों को दुर्गम क्षेत्र से बाहर निकालने का अभियान जारी था। इसी कारण शुरुआती खबरों में शवों की बरामदगी पूरी नहीं होने की जानकारी दी गई थी।
30 अक्टूबर को हुआ था हादसा, छह लोगों की मौत
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय की जानकारी के अनुसार, ट्रांस भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड का AS350B3 हेलिकॉप्टर, जिसका पंजीकरण नंबर VT-HCX था, शुक्रवार दोपहर 1:14 बजे बदरीनाथ हेलीपैड से रवाना हुआ था।
हेलिकॉप्टर देहरादून के सहस्रधारा हेलीपैड जा रहा था।
इसमें एक पायलट और पांच यात्री सवार थे।
उड़ान के दौरान हेलिकॉप्टर जोशीमठ के पास चाईं गांव के वन क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
हादसे के बाद हेलिकॉप्टर का मलबा पहाड़ी क्षेत्र में मिला और तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया।
दुर्घटना में सवार सभी छह लोगों की मृत्यु हो गई।
Uttarakhand Helicopter Crash Update: पांच यात्री कर्नाटक के, पायलट दिल्ली का निवासी
हेलिकॉप्टर दुर्घटना में जान गंवाने वाले पांचों यात्री कर्नाटक के बेंगलुरु से थे, जबकि पायलट दिल्ली का निवासी था।
प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, मृतक पायलट की पहचान 48 वर्षीय हिमांशु सभरवाल के रूप में हुई।
पांच यात्रियों की पहचान प्रताप बी. निंगाराजू, अरुण सालुंके, सुधीर के., एच.एस. नटराज और शंकर गौड़ा वी.बी. के रूप में बताई गई है।
सभी यात्री बदरीनाथ धाम से लौट रहे थे।
दुर्घटना के बाद शवों की बरामदगी, पहचान संबंधी औपचारिकताएं और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल रही।
दुर्गम पहाड़ी रास्तों ने बढ़ाई बचाव दलों की मुश्किल
जोशीमठ के पास चाईं गांव के ऊपरी क्षेत्र में स्थित दुर्घटनास्थल तक पहुंचना आसान नहीं था।
क्षेत्र की ऊंचाई, ढलान और दुर्गम रास्तों के कारण बचाव दलों को पैदल अभियान चलाना पड़ा।
शनिवार को टीमें पांडुकेश्वर की दिशा से पहाड़ी रास्तों के माध्यम से घटनास्थल तक पहुंचीं।
दुर्घटनास्थल से शवों को निकटतम सड़क तक पहुंचाने में कई घंटे लगने की संभावना जताई गई थी।
इसके अलावा मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों ने भी राहत कार्य को चुनौतीपूर्ण बनाया।
अधिकारियों ने बचाव अभियान में शामिल कर्मचारियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सावधानीपूर्वक अभियान चलाया।
Army, ITBP, SDRF और NDRF ने मिलकर चलाया अभियान
हादसे के बाद विभिन्न सुरक्षा और आपदा प्रबंधन एजेंसियों ने संयुक्त अभियान शुरू किया।
इसमें भारतीय सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF), उत्तराखंड पुलिस, जिला प्रशासन, राजस्व विभाग और वन विभाग की टीमें शामिल रहीं।
सभी एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करके दुर्घटनास्थल तक पहुंचने और शवों को सुरक्षित निकालने की योजना बनाई गई।
चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने बचाव अभियान के दौरान बताया था कि प्रशासन सभी संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है।
उन्होंने मृतकों के शवों को जोशीमठ तक पहुंचाने और अभियान के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने को प्राथमिकता बताया था।
रविवार सुबह तक शवों की बरामदगी पूरी होने से अभियान का महत्वपूर्ण चरण समाप्त हो गया।
DGCA और AAIB ने शुरू की हादसे की जांच
हेलिकॉप्टर दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की टीमें सक्रिय हो गई हैं।
शनिवार को जांच अधिकारियों ने जोशीमठ पहुंचकर स्थानीय लोगों से घटना के संबंध में जानकारी जुटाई।
इसके अतिरिक्त दुर्घटनास्थल का हवाई सर्वेक्षण भी किया गया।
जांच के दौरान हेलिकॉप्टर के मलबे, उड़ान संबंधी रिकॉर्ड, मौसम की परिस्थितियों और अन्य तकनीकी पहलुओं की समीक्षा की जाएगी।
जांच अधिकारियों के दुर्घटनास्थल पर पहुंचकर आवश्यक साक्ष्य एकत्र करने की प्रक्रिया भी निर्धारित की गई है।
हादसे का वास्तविक कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
खराब मौसम में उड़ान की अनुमति पर सवाल
30 अक्टूबर को उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम खराब था।
चमोली जिले में भी मौसम संबंधी चेतावनी जारी की गई थी।
ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि खराब मौसम की चेतावनी के बावजूद हेलिकॉप्टर को उड़ान की अनुमति किन परिस्थितियों में दी गई।
उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रतीक जैन ने बताया कि प्राधिकरण की ओर से भी मौसम संबंधी एडवाइजरी जारी की गई थी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उड़ान की अनुमति और मौसम संबंधी परिस्थितियों का विषय अब जांच के दायरे में है।
इसलिए खराब मौसम को दुर्घटना का निश्चित कारण बताना अभी उचित नहीं होगा।
तकनीकी जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे में मौसम, उड़ान संचालन या किसी अन्य परिस्थिति की क्या भूमिका रही।
Uttarakhand Helicopter Crash Update: Char Dham Helicopter Services के लिए नए सुरक्षा निर्देश
हादसे के बाद उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण ने चारधाम यात्रा मार्गों पर हेलिकॉप्टर संचालन के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपायों की घोषणा की है।
UCADA और DGCA अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक में निर्णय लिया गया कि चारधाम यात्रा मार्गों पर संचालित हेलिकॉप्टरों में सह-पायलट की मौजूदगी सुनिश्चित की जाएगी।
इसके अतिरिक्त प्रत्येक उड़ान के बाद पायलट को विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
इस रिपोर्ट में उड़ान मार्ग के मौसम, उड़ान की परिस्थितियों और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों का उल्लेख किया जाएगा।
इन उपायों का उद्देश्य हेलिकॉप्टर संचालन की निगरानी मजबूत करना और सुरक्षा संबंधी जोखिमों की बेहतर पहचान करना है।
हालांकि, इन निर्देशों के वास्तविक क्रियान्वयन और आगे के नियामकीय निर्णयों की जानकारी संबंधित प्राधिकरण के आदेशों से स्पष्ट होगी।
CM Pushkar Singh Dhami ने जांच के दिए निर्देश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हादसे पर शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई है।
उन्होंने दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए जांच के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने राहत एवं बचाव अभियान के दौरान अधिकारियों को आवश्यक समन्वय बनाए रखने और हर संभव सहायता उपलब्ध कराने को कहा था।
राज्य सरकार की ओर से दुर्घटना के कारणों की जांच और हवाई सेवाओं की सुरक्षा पर ध्यान देने की बात कही गई है।
अब पोस्टमार्टम और जांच रिपोर्ट पर नजर
जोशीमठ हेलिकॉप्टर दुर्घटना में मारे गए सभी छह लोगों के शव बरामद होने के बाद राहत अभियान का प्रमुख चरण पूरा हो गया है।
अब पोस्टमार्टम और अन्य आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं के बाद शवों को परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
दूसरी ओर DGCA और AAIB की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई।
यह हादसा उत्तराखंड के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हेलिकॉप्टर सेवाओं की सुरक्षा, मौसम संबंधी निर्णयों और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था के महत्व को एक बार फिर सामने लाता है।
फिलहाल प्रशासन ने सभी छह शव बरामद किए जाने की पुष्टि कर दी है, जबकि दुर्घटना के कारणों की जांच जारी है।



