उत्तराखंड

शारदीय नवरात्रि के पहले दिन हरिद्वार के मायादेवी मंदिर में उमड़ी भीड़, मां से मांगी सुख-समृद्धि

On the first day of Sharadiya Navratri, crowds gathered at the Mayadevi temple in Haridwar, praying for happiness and prosperity.

हरिद्वार: शारदीय नवरात्रि के पहले दिन हरिद्वार के प्राचीन मायादेवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से ही भक्त माता के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचने लगे। श्रद्धालुओं ने मां को पुष्प, नारियल और प्रसाद अर्पित किया। साथ ही परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। नवरात्रि के अवसर पर मंदिर को फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है। धार्मिक माहौल के बीच भक्तों में विशेष उत्साह देखने को मिला।

52 शक्तिपीठों में शामिल है मायादेवी मंदिर

हरिद्वार का मायादेवी मंदिर धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि यह मंदिर माता सती के 52 शक्तिपीठों में शामिल है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यहां माता सती की नाभि गिरी थी। इसी वजह से मंदिर को विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है।

हरिद्वार आने वाले कई श्रद्धालु गंगा स्नान के साथ मां मायादेवी के दर्शन भी करते हैं। भक्तों का विश्वास है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना से माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। नवरात्रि के दौरान मंदिर में दर्शन करने वालों की संख्या बढ़ जाती है।

राजा दक्ष और माता सती की कथा से जुड़ा इतिहास

मंदिर की धार्मिक मान्यताएं माता सती और भगवान शिव से जुड़ी पौराणिक कथा पर आधारित हैं। मंदिर के मुख्य पुजारी भास्कर पुरी महाराज के अनुसार, राजा दक्ष ने कनखल में यज्ञ का आयोजन किया था। इस यज्ञ में भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया गया था।

पौराणिक कथा के अनुसार, पिता के यज्ञ में पहुंचीं माता सती अपने पति का अपमान सहन नहीं कर सकीं और उन्होंने यज्ञ में अपने प्राण त्याग दिए। माता सती के वियोग में भगवान शिव उनके पार्थिव शरीर को लेकर विचरण करने लगे। मान्यता है कि सृष्टि का संतुलन बनाए रखने के लिए भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर को खंडित किया। जिन स्थानों पर उनके अंग गिरे, वे शक्तिपीठ के रूप में पूजे जाने लगे।

जूना अखाड़ा करता है मंदिर का संचालन

मायादेवी मंदिर का इतिहास 11वीं शताब्दी से जुड़ा माना जाता है। मंदिर का संचालन श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा करता है। मां मायादेवी को हरिद्वार की अधिष्ठात्री देवी भी माना जाता है। प्राचीन समय में हरिद्वार को मायापुरी के नाम से जाना जाता था।

मंदिर में रोजाना सुबह और शाम आरती होती है। नवरात्रि के दौरान माता का विशेष श्रृंगार किया जाता है। मंदिर परिसर में साधु-संतों की मौजूदगी और पूजा-अर्चना से धार्मिक वातावरण बना रहता है।

श्रद्धालुओं में दिखा विशेष उत्साह

नवरात्रि पर दर्शन के लिए दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। पंजाब से आए विक्रम कपूर ने बताया कि हरिद्वार आने पर वह मां मायादेवी के दर्शन जरूर करते हैं। वहीं, श्रद्धालु अलका ने मंदिर के धार्मिक महत्व पर अपनी आस्था जताई। दीपक शर्मा ने बताया कि वह कई वर्षों से मंदिर में पूजा करने आते हैं। उनके अनुसार, नवरात्रि के दौरान यहां भक्तों की संख्या काफी बढ़ जाती है।

मायादेवी मंदिर हरिद्वार रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। गंगा स्नान और तीर्थयात्रा के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के बीच यह मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। दावों को मान्यता के रूप में लिखेंपुजारी के बयान को स्पष्ट करेंदोहराव कम करके खबर कसें

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!