उत्तराखंड

Wildlife Week Uttarakhand: इको टूरिज्म पर CM धामी का फोकस, सुरक्षित वास स्थल और कॉरिडोर संरक्षण पर जोर

CM Dhami focuses on eco-tourism, emphasizes safe habitats and corridor conservation

देहरादून: उत्तराखंड में Wildlife Week Uttarakhand की शुरुआत वन्यजीव संरक्षण और इको टूरिज्म के संदेश के साथ हुई। देहरादून के फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट यानी FRI में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वन्यजीवों के संरक्षण के साथ इको टूरिज्म को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। वहीं वन मंत्री सुबोध उनियाल ने वन्यजीवों के सुरक्षित वास स्थल और कॉरिडोर को मजबूत करने पर जोर दिया।

भारत में Wildlife Week हर साल 2 से 8 अक्टूबर तक मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता के प्रति जागरूक करना है। उत्तराखंड जैसे जैव विविधता से समृद्ध राज्य में इसका महत्व और बढ़ जाता है।

Wildlife Week Uttarakhand में इको टूरिज्म पर सीएम का जोर

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ इको टूरिज्म पर भी ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने राज्य में नए पर्यटन स्थलों के विकसित होने का जिक्र किया। साथ ही वन विभाग के स्तर पर इको टूरिज्म से जुड़े कामों को और आगे बढ़ाने की जरूरत बताई।

सीएम के अनुसार, इको टूरिज्म को बढ़ावा मिलने से पर्यटकों को नए अनुभव मिल सकते हैं। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों के अवसर भी बढ़ सकते हैं। हालांकि, ऐसे पर्यटन का विकास वन्यजीवों और पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखकर करना जरूरी होगा।

उत्तराखंड सरकार पहले भी वन्यजीव आधारित पर्यटन और संरक्षण के बीच संतुलन पर जोर देती रही है। जुलाई 2026 में राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक में भी सीएम धामी ने वन्यजीव आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए थे।

सुरक्षित वास स्थल और कॉरिडोर संरक्षण क्यों जरूरी?

Wildlife Week Uttarakhand के कार्यक्रम में वन मंत्री सुबोध उनियाल ने वन्यजीवों के सुरक्षित आवास पर जोर दिया। उनका कहना था कि वन्यजीवों की स्वतंत्र आवाजाही के लिए सुरक्षित रास्तों की जरूरत है। इसके लिए नए कॉरिडोर विकसित करने पर भी विचार किया जा रहा है।

वन्यजीव कॉरिडोर जंगल के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हाथी, बाघ और दूसरे वन्यजीव इन रास्तों का इस्तेमाल एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में जाने के लिए करते हैं। ऐसे रास्तों पर दबाव बढ़ने से मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति पैदा हो सकती है।

उत्तराखंड में वन्यजीव कॉरिडोर को लेकर पहले भी कई स्तरों पर काम की बात सामने आती रही है। जनवरी 2026 में राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक में भी हाथी और बाघ कॉरिडोर के संरक्षण को प्राथमिकता देने तथा जरूरी जगहों पर अंडरपास और ओवरपास जैसे उपायों को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए थे।

बच्चों को भी संरक्षण अभियान से जोड़ा गया

कार्यक्रम में स्कूली बच्चों की भागीदारी भी खास रही। जंगलों के आसपास रहने वाले क्षेत्रों के बच्चों को वन और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े संदेशों के लिए सम्मानित किया गया। प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाले बच्चों को पुरस्कार दिए गए।

ऐसे बच्चों के लिए जंगल और वन्यजीव केवल किताबों का विषय नहीं हैं। उनके आसपास का प्राकृतिक वातावरण सीधे उनके जीवन से जुड़ा है। इसलिए Wildlife Week Uttarakhand के दौरान बच्चों को जागरूकता अभियान से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया गया।

कार्यक्रम में बच्चों को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील रहने और वन्यजीवों के साथ सुरक्षित व्यवहार करने का संदेश भी दिया गया।

मानव-वन्यजीव संघर्ष में साहस दिखाने वालों का सम्मान

कार्यक्रम में उन लोगों को भी सम्मानित किया गया, जिन्होंने मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं के दौरान साहस दिखाया। इन लोगों ने मुश्किल परिस्थितियों में अपनी और दूसरों की जान बचाने की कोशिश की थी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऐसे 18 लोगों को सम्मानित किया। उन्हें 51 हजार रुपये की धनराशि देने की घोषणा भी की गई। यह पहल मानव-वन्यजीव संघर्ष के दौरान आम लोगों की भूमिका को सामने लाने वाली रही।

उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष लंबे समय से एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। सरकार ने इसके लिए रैपिड रिस्पॉन्स टीम, हॉटस्पॉट मैपिंग और जागरूकता अभियान जैसे उपायों पर भी जोर दिया है।

राजाजी टाइगर रिजर्व की फोटो प्रदर्शनी बनी आकर्षण

FRI में आयोजित कार्यक्रम के दौरान राजाजी टाइगर रिजर्व प्रबंधन की ओर से फोटो प्रदर्शनी भी लगाई गई। इसमें वन्यजीवों और प्राकृतिक परिवेश से जुड़ी तस्वीरों के जरिए लोगों को जंगल की दुनिया से परिचित कराने की कोशिश की गई।

फोटो प्रदर्शनी का उद्देश्य केवल वन्यजीवों की खूबसूरती दिखाना नहीं था। इसके जरिए संरक्षण की जरूरत को भी सामने रखा गया। तस्वीरों के माध्यम से लोगों को जंगल और उसमें रहने वाले जीवों के बीच के संबंध को समझाने का प्रयास किया गया।

रामनगर में बच्चों ने दिखाया अनोखा अंदाज

Wildlife Week Uttarakhand के तहत रामनगर में भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यहां बच्चों ने अलग-अलग वन्यजीवों की वेशभूषा पहनकर लोगों को संरक्षण का संदेश दिया।

बच्चे टाइगर, लैपर्ड, हाथी और पक्षियों जैसे वन्यजीवों के रूप में नजर आए। उन्होंने शहर में जागरूकता रैली निकाली। रैली के दौरान बच्चों के हाथों में पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े संदेश भी दिखाई दिए।

बच्चों ने लोगों को बताया कि जंगल और वन्यजीव केवल प्राकृतिक दुनिया का हिस्सा नहीं हैं। इनका सीधा संबंध मानव जीवन और पर्यावरण के संतुलन से है।

संरक्षण के साथ पर्यटन का संतुलन जरूरी

Wildlife Week Uttarakhand के कार्यक्रमों में सामने आया संदेश यही रहा कि वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन को साथ लेकर चलना होगा। राज्य में इको टूरिज्म की संभावनाएं बड़ी हैं। लेकिन इसका विकास पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखकर करना जरूरी है।

उत्तराखंड की पर्यटन नीति में भी इको टूरिज्म को प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के साथ आगे बढ़ाने की बात कही गई है। राज्य का लक्ष्य ऐसे पर्यटन को बढ़ावा देना है, जिससे प्राकृतिक संसाधनों पर अनावश्यक दबाव न पड़े।

Wildlife Week Uttarakhand के दौरान इको टूरिज्म, सुरक्षित वास स्थल, वन्यजीव कॉरिडोर और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसे मुद्दे एक साथ सामने आए। कार्यक्रमों के जरिए बच्चों और आम लोगों को जोड़ने की कोशिश भी की गई। इससे वन्यजीव संरक्षण को केवल सरकारी जिम्मेदारी के बजाय जनभागीदारी से जोड़ने का संदेश मिला।

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