Uttarakhand Purification: ‘शुद्धिकरण’ मामले पर खरगे का नड्डा को पत्र, CM धामी से FIR दर्ज कराने की मांग
Uttarakhand Purification: Kharge writes to Nadda regarding the ‘purification’ incident; demands CM Dhami register an FIR.
Uttarakhand Purification: उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद रामलीला मैदान में कथित ‘शुद्धिकरण’ कराए जाने का मामला एक बार फिर राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है। कांग्रेस अध्यक्ष ने इस मामले को लेकर राज्यसभा में सदन के नेता और भाजपा के वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा को पत्र लिखा है। खरगे ने नड्डा से आग्रह किया है कि वह उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को निर्देश दें कि कथित शुद्धिकरण में शामिल व्यक्तियों और संगठनों के खिलाफ FIR दर्ज कराई जाए।
खरगे ने अपने पत्र में नड्डा को राज्यसभा में दिए गए उनके आश्वासन की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि 8 अगस्त को हल्द्वानी में उनकी सार्वजनिक सभा के बाद रामलीला मैदान में कथित तौर पर शुद्धिकरण की घटना हुई थी। इस मुद्दे को उन्होंने 13 अगस्त को राज्यसभा में उठाया था। अब 24 दिन बीत जाने के बावजूद FIR दर्ज नहीं होने पर उन्होंने सवाल उठाया है।
Uttarakhand Purification: 24 दिन बाद भी FIR नहीं होने पर खरगे ने उठाया सवाल
मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने पत्र में कहा कि घटना के बाद कार्रवाई को लेकर उन्हें नड्डा के आश्वासन से उम्मीद थी। उन्होंने याद दिलाया कि राज्यसभा में नड्डा ने घटना को दुखद बताया था और मामले की जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही थी।
खरगे ने कहा कि इसके बावजूद घटना के 24 दिन बाद भी उन व्यक्तियों या संगठनों के खिलाफ FIR दर्ज नहीं हुई है, जिन पर कथित शुद्धिकरण में शामिल होने का आरोप है। उन्होंने नड्डा से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है।
8 अगस्त की जनसभा के बाद हुआ था विवाद
यह पूरा विवाद 8 अगस्त 2026 को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुई मल्लिकार्जुन खरगे की सार्वजनिक सभा के बाद शुरू हुआ। कांग्रेस का आरोप है कि खरगे की सभा के बाद कार्यक्रम स्थल पर ‘शुद्धिकरण’ की प्रक्रिया कराई गई। पार्टी ने इसे जातिगत भेदभाव और छुआछूत की मानसिकता से जोड़ते हुए कड़ी आपत्ति जताई है।
खरगे ने राज्यसभा में भी इस घटना को छुआछूत से जोड़कर चिंता जताई थी। कांग्रेस का कहना है कि सार्वजनिक मंच पर इस तरह की कार्रवाई संविधान में निहित समानता और सामाजिक सम्मान की भावना के विपरीत है।
हालांकि, इस पूरे मामले को लेकर भाजपा और आयोजन से जुड़े लोगों का पक्ष अलग है। आयोजकों तथा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से कथित तौर पर कहा गया है कि कार्यक्रम स्थल पर हवन या शुद्धिकरण किसी जातिगत कारण से नहीं, बल्कि मंच पर छोड़ी गई गंदगी की वजह से किया गया था।
Uttarakhand Purification: राज्यसभा में नड्डा ने क्या कहा था?
खरगे ने अपने पत्र में 13 अगस्त को राज्यसभा में हुई चर्चा का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, जब उन्होंने हल्द्वानी की घटना का मुद्दा सदन में उठाया था, तब जेपी नड्डा ने इसे दुखद घटना बताया था।
नड्डा ने यह भी कहा था कि भाजपा ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती और मामले की जांच की जाएगी। खरगे के पत्र के अनुसार, नड्डा ने जांच के बाद दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया था।
इसी आश्वासन का हवाला देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने अब नड्डा से उत्तराखंड सरकार को FIR दर्ज कराने के लिए निर्देश देने की मांग की है।
खरगे ने इसे केवल व्यक्तिगत मामला नहीं बताया
मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने पत्र में कहा कि कथित शुद्धिकरण का मुद्दा केवल उनके व्यक्तिगत सम्मान से जुड़ा मामला नहीं है। उन्होंने इसे समाज के उस वर्ग की भावनाओं से जोड़ते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं व्यापक सामाजिक चिंता का विषय हैं।
खरगे का कहना है कि जिस स्थान पर उन्होंने सार्वजनिक सभा को संबोधित किया, वहां बाद में शुद्धिकरण किया जाना संविधान और मानवीय मूल्यों की भावना के खिलाफ है। उन्होंने इसीलिए संसद में इस मुद्दे को उठाने की बात कही।
कांग्रेस और भाजपा के बीच बढ़ा राजनीतिक टकराव
हल्द्वानी का यह मामला अब केवल एक स्थानीय विवाद नहीं रह गया है। इसे लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस लगातार इस घटना को जातिगत भेदभाव से जोड़ते हुए कार्रवाई की मांग कर रही है।
वहीं भाजपा की ओर से इस आरोप से दूरी बनाने की कोशिश की गई है। पार्टी नेताओं और आयोजन से जुड़े लोगों का कहना है कि कार्यक्रम स्थल पर किया गया हवन किसी व्यक्ति या उसकी जाति के कारण नहीं था। इस विरोधाभासी दावे के कारण विवाद और गहरा गया है।
Uttarakhand Purification: राहुल गांधी भी उठा चुके हैं FIR का मुद्दा
इस विवाद में कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी FIR दर्ज कराने की मांग कर चुके हैं। उन्होंने कथित शुद्धिकरण की घटना को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप करने और संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की थी। कांग्रेस ने इस मामले को दलित सम्मान और संवैधानिक अधिकारों से जोड़कर उठाया है।
इसी बीच इस विवाद को लेकर राहुल गांधी के खिलाफ भी FIR दर्ज होने की रिपोर्ट सामने आई थी। इससे मामले ने उत्तराखंड की राजनीति में और अधिक तूल पकड़ लिया।
अब CM धामी पर रहेगी नजर
खरगे के ताजा पत्र के बाद उत्तराखंड सरकार की भूमिका एक बार फिर चर्चा में आ गई है। कांग्रेस चाहती है कि कथित शुद्धिकरण की घटना में शामिल लोगों के खिलाफ FIR दर्ज हो और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए।
अब सवाल यह है कि राज्य सरकार इस मांग पर क्या कदम उठाती है। यदि FIR दर्ज होती है तो जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुलेगा। वहीं यदि सरकार की ओर से तत्काल कार्रवाई नहीं होती है तो कांग्रेस इस मुद्दे को आने वाले दिनों में और आक्रामक तरीके से उठा सकती है।
हल्द्वानी का ‘शुद्धिकरण’ विवाद फिलहाल राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर संवेदनशील बना हुआ है। खरगे द्वारा नड्डा को लिखे गए पत्र ने इस मामले को राष्ट्रीय राजनीतिक बहस में फिर से ला दिया है। अब सभी की नजर उत्तराखंड सरकार और भाजपा नेतृत्व की अगली कार्रवाई पर रहेगी।



