Kanti murder case: 170 किमी तक शव लेकर भटकते रहे परिजन, पुलिस-डॉक्टरों की लापरवाही से रात 11 बजे हुआ अंतिम संस्कार!
Kanti murder case: Family wandered for 170 km with the body; cremation took place at 11 PM due to the negligence of police and doctors.
Kanti murder case: उत्तराखंड के काशीपुर में सामने आया Kanti murder case केवल एक युवती की हत्या की दर्दनाक घटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके बाद हुई प्रशासनिक और चिकित्सकीय लापरवाही ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। कांति झा का शव पोस्टमार्टम के लिए करीब 170 किलोमीटर तक इधर-उधर ले जाना पड़ा। जरूरी दस्तावेजों की कमी बताकर पोस्टमार्टम रोक दिए जाने के कारण मृतका के स्वजन और पुलिस टीम को कई घंटे तक परेशान होना पड़ा।
18 वर्षीय कांति काशीपुर की रहने वाली थी और मॉडलिंग के सपने देखती थी। गुरुवार सुबह उसका खून से लथपथ शव रामनगर हाईवे के किनारे मिला था। शुरुआती जानकारी में उसके सिर पर गोली लगने की आशंका जताई गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने जांच शुरू की और पोस्टमार्टम के लिए डॉक्टरों का पैनल गठित करने का फैसला लिया।
हाईवे किनारे मिला था कांति का शव
Kanti murder case में पुलिस के सामने सबसे पहली चुनौती युवती की मौत की परिस्थितियों को समझना था। कांति का शव रामनगर हाईवे के किनारे मिला था। उसके सिर पर चोट और गोली लगने की आशंका को देखते हुए पुलिस ने सामान्य पोस्टमार्टम के बजाय चिकित्सकों के पैनल से शव का पोस्टमार्टम कराने का निर्णय लिया।
इसी प्रक्रिया के तहत गुरुवार शाम कांति का शव हल्द्वानी स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया। परिजनों को उम्मीद थी कि शुक्रवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद शव उन्हें सौंप दिया जाएगा और वे अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। लेकिन शुक्रवार को ऐसा नहीं हो सका।
दस्तावेजों में कमी बताकर पोस्टमार्टम से इनकार
शुक्रवार सुबह हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू होने से पहले डॉक्टरों ने शव के साथ भेजे गए दस्तावेजों की जांच की। इस दौरान मेडिकल कॉलेज की ओर से दस्तावेजों में कमी बताई गई। इसके बाद पोस्टमार्टम करने से इनकार कर दिया गया।
परिजनों के मुताबिक, जरूरी कागज उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए गए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से दस्तावेजों की कमी दूर करने की अपील की और यहां तक कि जरूरी कागजात व्हाट्सएप के माध्यम से भेजने की बात भी कही। हालांकि, मेडिकल कॉलेज प्रबंधन इस व्यवस्था के लिए तैयार नहीं हुआ।
इस वजह से Kanti murder case में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया कई घंटे पीछे चली गई। शव को वापस काशीपुर लाने का फैसला लिया गया।
170 किलोमीटर तक शव लेकर दौड़ती रही पुलिस
शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे कांति का शव हल्द्वानी से दोबारा काशीपुर उप जिला अस्पताल के लिए रवाना किया गया। पुलिस टीम के साथ कांति की बड़ी बहन शांति भी मौजूद थीं। करीब दोपहर दो बजे शव काशीपुर पहुंचा।
यहां आवश्यक दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद करीब शाम चार बजे शव को फिर हल्द्वानी के लिए रवाना किया गया। इस पूरे घटनाक्रम में शव को करीब 170 किलोमीटर तक इधर-उधर ले जाना पड़ा।
आखिरकार शाम करीब 6:30 बजे हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में कांति का पोस्टमार्टम हो सका। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी सामने नहीं आई है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की वास्तविक वजह और गोली से जुड़े कई अहम सवालों पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
रात 11 बजे हुआ कांति का अंतिम संस्कार
पोस्टमार्टम में देरी का असर कांति के अंतिम संस्कार पर भी पड़ा। परिवार को जिस अंतिम विदाई को दिन में पूरा करना था, वह देर रात तक टलती रही। शुक्रवार रात करीब 11 बजे ढेला नदी किनारे स्थित श्मशान घाट पर कांति का अंतिम संस्कार किया गया।
कांति के पिता बच्ची झा ने अपनी बेटी को मुखाग्नि दी। इस दौरान मां बिंदुल झा, बड़ी बहन शांति और परिवार के अन्य सदस्य मौजूद रहे। बेटी की मौत से पहले ही टूट चुके परिवार के लिए शव को लेकर घंटों की भागदौड़ ने पीड़ा और बढ़ा दी।
अस्पताल प्रशासन ने बताई दस्तावेजों की गलती
मामले को लेकर काशीपुर उप जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संदीप दीक्षित ने सफाई दी। उनका कहना है कि शव के साथ भेजे गए दस्तावेजों में मरीज की ओपीडी पर्ची शामिल नहीं थी। उन्होंने इसे त्रुटिवश हुई गलती बताया।
सीएमएस के मुताबिक, संबंधित डॉक्टर को भविष्य में इस तरह की चूक नहीं करने की हिदायत दी गई है। हालांकि, इस सफाई के बाद भी Kanti murder case में पोस्टमार्टम में हुई देरी को लेकर सवाल बने हुए हैं।
पुलिस ने मेडिकल कॉलेज की भूमिका पर उठाए सवाल
दूसरी ओर, काशीपुर के सीओ प्रशांत कुमार ने दस्तावेजों में किसी बड़ी कमी से इनकार किया है। उनका कहना है कि कागजात में कोई ऐसी गंभीर कमी नहीं थी, जिसके कारण पोस्टमार्टम रोका जाना चाहिए था।
सीओ के अनुसार, मेडिकल कॉलेज के जिम्मेदार अधिकारी ने दस्तावेजों में कमी निकालकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया को रोक दिया। पुलिस की इस टिप्पणी ने Kanti murder case में चिकित्सा व्यवस्था और पुलिस के बीच तालमेल को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
मॉडलिंग का सपना अधूरा रह गया
कांति की उम्र महज 18 साल थी। बताया जा रहा है कि वह मॉडलिंग की दुनिया में अपना भविष्य बनाना चाहती थी। परिवार और करीबियों के लिए उसकी मौत इसलिए भी गहरा सदमा है क्योंकि जिस उम्र में वह अपने सपनों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रही थी, उसी उम्र में उसकी जिंदगी खत्म हो गई।
अब Kanti murder case की जांच में हत्या के पीछे की वजह, आरोपी की पहचान, वारदात की परिस्थितियां और युवती को गोली कैसे लगी, जैसे सवाल सबसे अहम हैं। पुलिस की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से इन सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है।
फिलहाल कांति के परिवार को न्याय का इंतजार है। हत्या की जांच के साथ-साथ पोस्टमार्टम में हुई देरी और दस्तावेजों की कथित लापरवाही भी चर्चा का विषय बनी हुई है। एक परिवार ने अपनी बेटी खो दी, लेकिन अंतिम विदाई तक की प्रक्रिया में हुई भागदौड़ ने व्यवस्था की संवेदनशीलता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।



