उत्तराखंड

Pipalkoti Tunnel Accident: उत्तराखंड के पीपलकोटी में कैसे धंसी टनल? 16 मजदूर सुरक्षित निकाले गए, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी!

Pipalkoti Tunnel Accident: How did the tunnel collapse in Pipalkoti, Uttarakhand? 16 workers rescued safely; rescue operation underway!

Pipalkoti Tunnel Accident: उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी में गुरुवार शाम निर्माणाधीन टनल में अचानक मलबा और पानी भरने से बड़ा हादसा हो गया। घटना मायापुर क्षेत्र में THDC के 444 MW विष्णुगाड़-पीपलकोटी हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की निर्माणाधीन सुरंग में हुई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक घटना के समय टनल के भीतर करीब 18 से 19 मजदूर मौजूद थे। सूचना मिलते ही प्रशासन और बचाव एजेंसियों ने तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। उपलब्ध ताजा जानकारी के अनुसार 16 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है, जबकि बाकी लोगों की तलाश और उन्हें सुरक्षित निकालने की कार्रवाई जारी है।

शाम करीब 7 बजे मिली टनल में मलबा और पानी भरने की सूचना

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार गुरुवार शाम करीब 7:05 बजे टनल के भीतर मलबा और पानी आने की सूचना मिली। इसके बाद परियोजना प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया। निर्माण कार्य से जुड़ी एजेंसी HCC के कर्मचारी भी मौके पर मौजूद थे।

घटना की सूचना मिलते ही राहत एवं बचाव दलों को सक्रिय किया गया। शुरुआती रिपोर्टों में टनल के अंदर 18 से 19 मजदूरों के फंसे होने की बात सामने आई। रेस्क्यू टीमों ने अंदर पहुंचकर मजदूरों को बाहर निकालना शुरू किया और अब तक 16 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है।

Pipalkoti Tunnel Accident आखिर कैसे धंसी टनल? अभी स्पष्ट नहीं है वजह

हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर टनल में मलबा और पानी इतनी तेजी से कैसे पहुंचा। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में टनल धंसने की सटीक तकनीकी वजह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे किसी एक कारण से जोड़ना जल्दबाजी होगी।

हालांकि, घटना के समय टनल के भीतर मलबा और पानी आने की बात सामने आई है। पहाड़ी इलाकों में निर्माणाधीन सुरंगों के दौरान चट्टानों की अस्थिरता, भूगर्भीय परिस्थितियों और पानी के अचानक रिसाव जैसी परिस्थितियां जोखिम बढ़ा सकती हैं, लेकिन पीपलकोटी की इस घटना में वास्तविक कारण का पता जांच के बाद ही चल सकेगा।

THDC के आधिकारिक विवरण के अनुसार विष्णुगाड़-पीपलकोटी परियोजना चमोली जिले में अलकनंदा नदी पर स्थित 444 मेगावाट की रन-ऑफ-द-रिवर जलविद्युत परियोजना है। इसमें 13.4 किलोमीटर लंबी हेड रेस टनल और 3.04 किलोमीटर लंबी टेल रेस टनल का निर्माण शामिल है।

सेना से लेकर NDRF तक, कई एजेंसियां मौके पर

घटना की गंभीरता को देखते हुए राहत एवं बचाव अभियान में कई एजेंसियों को लगाया गया है। सेना, ITBP, NDRF और SDRF की टीमें मौके पर पहुंचीं। इसके अलावा स्थानीय पुलिस, DDRF और CISF के जवान भी बचाव अभियान में शामिल हैं।

प्रशासन की ओर से घटनास्थल पर आवश्यक संसाधन जुटाए जा रहे हैं। टनल के अंदर की स्थिति को ध्यान में रखते हुए बचाव दल बेहद सावधानी के साथ आगे बढ़ रहे हैं। मलबे और पानी के बीच काम करना चुनौतीपूर्ण होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है।

THDC ने इससे पहले भी अपने पीपलकोटी प्रोजेक्ट में आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए बहु-एजेंसी मॉक ड्रिल आयोजित की थी। जुलाई 2025 में कंपनी ने टनल के भीतर बाढ़ जैसी स्थिति का अभ्यास किया था, जिसमें CISF, NDRF, SDRF, DDRF, स्थानीय पुलिस, THDC और HCC की टीमें शामिल हुई थीं।

Pipalkoti Tunnel Accident मुख्यमंत्री धामी ने लिया घटना का संज्ञान

पीपलकोटी टनल हादसे की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले का संज्ञान लिया। मुख्यमंत्री की ओर से अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी करने और बचाव कार्य में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकार की प्राथमिकता टनल में मौजूद सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालना है। प्रशासन की ओर से घटनाक्रम पर लगातार नजर रखी जा रही है और बचाव अभियान की जानकारी संबंधित अधिकारियों से ली जा रही है।

16 मजदूरों के सुरक्षित निकलने से मिली राहत

हादसे के बाद सबसे बड़ी राहत की खबर यह है कि अब तक 16 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। शुरुआती सूचना में 18 से 19 मजदूरों के अंदर फंसे होने की बात सामने आई थी। ऐसे में बाकी लोगों को निकालने के लिए अभियान लगातार जारी है।

बचाव दलों की कोशिश है कि टनल के अंदर मौजूद प्रत्येक व्यक्ति तक सुरक्षित पहुंच बनाई जाए। मलबे और पानी की स्थिति को देखते हुए रेस्क्यू टीमों को सावधानी बरतनी पड़ रही है।

Pipalkoti Tunnel Accident पहले भी हादसों के कारण चर्चा में रहा है पीपलकोटी प्रोजेक्ट

विष्णुगाड़-पीपलकोटी हाइड्रो प्रोजेक्ट पहले भी दुर्घटनाओं के कारण चर्चा में रहा है। दिसंबर 2025 में इसी परियोजना की निर्माणाधीन टनल में दो लोको ट्रेनों की टक्कर से कई लोग घायल हुए थे। उस घटना में टनल के भीतर काम कर रहे श्रमिकों और अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया था।

हालांकि मौजूदा घटना की प्रकृति अलग है। इस बार निर्माणाधीन टनल में मलबा और पानी भरने की सूचना मिली है, जिसके कारण कुछ मजदूरों के अंदर फंसने की स्थिति बनी।

रेस्क्यू पूरा होने तक जारी रहेगी निगरानी

पीपलकोटी टनल हादसे में फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालना है। प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियां और परियोजना से जुड़ी टीमें मौके पर मौजूद हैं। 16 मजदूरों के सुरक्षित निकाले जाने के बाद भी अभियान को तब तक जारी रखा जाएगा, जब तक अंदर मौजूद सभी लोगों की स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती।

टनल में मलबा और पानी आने की वास्तविक वजह क्या थी, इसका पता आगे की जांच में चलेगा। फिलहाल राहत और बचाव अभियान को प्राथमिकता दी जा रही है और घटनास्थल पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई है।

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