मध्य प्रदेश में UCC लागू करने की तैयारी तेज, जानिए क्या हैं नए प्रावधान और उत्तराखंड, गुजरात व असम से कैसे अलग है कानून
Preparations to implement the UCC in Madhya Pradesh are intensifying; find out the new provisions and how the law differs from those in Uttarakhand, Gujarat, and Assam.
मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने वाला देश का चौथा राज्य बन गया है। विधानसभा से Madhya Pradesh UCC विधेयक पारित होने के बाद अब इसे लेकर पूरे देश में चर्चा तेज हो गई है। इससे पहले उत्तराखंड, गुजरात और असम अपने-अपने राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड को मंजूरी दे चुके हैं। हालांकि, चारों राज्यों के कानूनों का मूल उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक नियम लागू करना है, लेकिन कुछ प्रावधानों में अंतर भी देखने को मिलता है।
Madhya Pradesh UCC को तीन भागों, सात अध्यायों और 404 धाराओं में तैयार किया गया है। इसमें विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति के अधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों को विस्तृत रूप से शामिल किया गया है। सरकार का दावा है कि यह कानून सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करेगा और व्यक्तिगत कानूनों में मौजूद असमानताओं को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड?
यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी Madhya Pradesh UCC का मूल उद्देश्य सभी धर्मों के नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, गोद लेने, उत्तराधिकार और संपत्ति से जुड़े नियमों को एक समान बनाना है। इसका मतलब यह है कि अलग-अलग धर्मों के लिए अलग व्यक्तिगत कानूनों के बजाय एक समान नागरिक कानून लागू होगा। हालांकि, आदिवासी समुदाय को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है।
विवाह और तलाक से जुड़े अहम प्रावधान
Madhya Pradesh UCC के पहले भाग में विवाह और विवाह विच्छेद यानी तलाक से संबंधित नियम शामिल किए गए हैं। कानून के अनुसार पुरुष की न्यूनतम विवाह आयु 21 वर्ष और महिला की 18 वर्ष निर्धारित की गई है। किसी भी व्यक्ति के पहले से विवाहित होने की स्थिति में दूसरी शादी पूरी तरह प्रतिबंधित होगी।
सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि विवाह के 60 दिनों के भीतर उसका पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। यदि विवाह मध्य प्रदेश से बाहर हुआ हो लेकिन दंपति में से कोई एक राज्य का निवासी हो, तब भी राज्य में उसका पंजीकरण कराना आवश्यक होगा। हालांकि, केवल पंजीकरण न होने के आधार पर विवाह को अवैध नहीं माना जाएगा।
यदि पति या पत्नी बिना उचित कारण के अपने जीवनसाथी को छोड़ देता है, तो पीड़ित पक्ष न्यायालय में राहत के लिए आवेदन कर सकेगा। इसके अलावा सभी धर्मों के लिए बहुविवाह पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।
बेटियों को मिलेगा बराबरी का अधिकार
Madhya Pradesh UCC के दूसरे भाग में उत्तराधिकार और संपत्ति संबंधी प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसके तहत बेटियों को भी बेटों के समान संपत्ति में अधिकार मिलेगा। सरकार का मानना है कि यह व्यवस्था महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा और लैंगिक समानता को मजबूत करेगी।
संपत्ति के बंटवारे और उत्तराधिकार के मामलों में सभी धर्मों के नागरिकों के लिए समान नियम लागू होंगे, जिससे कानूनी प्रक्रियाएं अधिक पारदर्शी और सरल बनेंगी।
लिव-इन रिलेशनशिप पर सख्त नियम
Madhya Pradesh UCC का तीसरा भाग लिव-इन रिलेशनशिप से संबंधित है। इसके तहत किसी भी जोड़े को साथ रहने के 30 दिनों के भीतर अपना संबंध संबंधित रजिस्ट्रार के पास दर्ज कराना होगा।
यदि किसी साथी की उम्र 21 वर्ष से कम है तो उसके माता-पिता को इसकी सूचना दी जाएगी। यदि कोई व्यक्ति पहले से विवाहित है या नाबालिग होकर लिव-इन में रहता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
रजिस्ट्रार आवेदन की जांच करेगा और आवश्यक होने पर अतिरिक्त दस्तावेज या साक्ष्य मांग सकता है। जांच पूरी होने के बाद 30 दिनों के भीतर प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। संदेह होने पर पुलिस को भी जानकारी दी जा सकती है।
बिना पंजीकरण लिव-इन में रहने पर 10 हजार रुपये तक का जुर्माना और तीन महीने तक की सजा का प्रावधान रखा गया है। यदि किसी साथी को धोखे से लिव-इन संबंध में रखा गया है तो दोषी को पांच वर्ष तक की सजा हो सकती है। महिला साथी को भरण-पोषण मांगने का अधिकार भी दिया गया है।
दूसरे राज्यों से कितना अलग है कानून?
उत्तराखंड देश का पहला राज्य था जिसने 2025 में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू किया। इसके बाद गुजरात और असम ने भी अपने-अपने राज्यों में समान नागरिक संहिता को मंजूरी दी।
Madhya Pradesh UCC इन तीनों राज्यों की तरह विवाह पंजीकरण, बहुविवाह पर रोक, बेटियों को समान संपत्ति अधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण को अनिवार्य बनाता है। हालांकि, मध्य प्रदेश के कानून में लिव-इन संबंधों की जांच प्रक्रिया, माता-पिता को सूचना देने और फर्जी जानकारी देने पर सख्त दंड जैसे कुछ अतिरिक्त प्रावधान शामिल किए गए हैं, जो इसे अन्य राज्यों से अलग बनाते हैं।
क्यों महत्वपूर्ण माना जा रहा है Madhya Pradesh UCC?
विशेषज्ञों का मानना है कि Madhya Pradesh UCC देश में समान नागरिक अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे महिलाओं के अधिकार मजबूत होंगे, विवाह और उत्तराधिकार संबंधी विवादों में स्पष्टता आएगी तथा विभिन्न धर्मों के लिए अलग-अलग नागरिक कानूनों की जटिलता कम होगी।
हालांकि, इस कानून को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस भी जारी है। समर्थकों का कहना है कि इससे समानता और न्याय को बढ़ावा मिलेगा, जबकि कुछ वर्गों का मानना है कि व्यक्तिगत कानूनों और सांस्कृतिक परंपराओं पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। आने वाले समय में Madhya Pradesh UCC का क्रियान्वयन और उसके प्रभाव देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक महत्वपूर्ण मॉडल साबित हो सकता है।



