उत्तराखंड

हरेला पर्व पर मुख्यमंत्री धामी ने लगाया पौधा हर्बल पार्क का किया भ्रमण

Uttarakhand CM Dhami plants sapling for Harela visits herbal park

देहरादून: अभियान के तहत उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरेला पर्व के अवसर पर पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस दौरान उन्होंने एक हर्बल पार्क का भी भ्रमण किया और वहां विकसित की गई औषधीय वनस्पतियों, जैव विविधता संरक्षण तथा हरित विकास से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरेला केवल एक पारंपरिक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति उत्तराखंड की आस्था, संस्कृति और जिम्मेदारी का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने नागरिकों से अपील की कि वे हरेला के अवसर पर अधिक से अधिक पौधे लगाएं और उनकी नियमित देखभाल भी करें। उन्होंने कहा कि केवल पौधारोपण करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पौधों को वृक्ष बनने तक संरक्षित रखना भी प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।

हरेला पर्व का उत्तराखंड की संस्कृति में विशेष महत्व

उत्तराखंड में मनाया जाने वाला हरेला पर्व प्रकृति, हरियाली और कृषि संस्कृति का प्रमुख उत्सव माना जाता है। यह पर्व वर्षा ऋतु के आगमन और नई फसल के शुभारंभ का प्रतीक है। सदियों से लोग इस अवसर पर पौधे लगाकर प्रकृति के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते आए हैं।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की सांस्कृतिक परंपराएं पर्यावरण संरक्षण से गहराई से जुड़ी हुई हैं। यदि इन परंपराओं को नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाए तो पर्यावरण संरक्षण एक जनआंदोलन का रूप ले सकता है।

हर्बल पार्क में औषधीय पौधों की जानकारी ली

पौधारोपण कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री ने हर्बल पार्क का निरीक्षण किया। यहां उन्होंने विभिन्न औषधीय पौधों, दुर्लभ जड़ी-बूटियों और जैव विविधता संरक्षण से जुड़े कार्यों की जानकारी अधिकारियों एवं विशेषज्ञों से प्राप्त की।

उत्तराखंड हिमालयी क्षेत्र अपनी समृद्ध औषधीय वनस्पतियों के लिए देश-विदेश में जाना जाता है। हर्बल पार्क का उद्देश्य इन पौधों का संरक्षण, शोध और जनजागरूकता बढ़ाना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि औषधीय पौधों का संरक्षण न केवल पर्यावरण के लिए बल्कि स्वास्थ्य और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि हर्बल पार्कों को पर्यटन, अनुसंधान और शिक्षा से जोड़कर विकसित किया जाए ताकि अधिक से अधिक लोग इनकी उपयोगिता को समझ सकें।

पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने पर जोर

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है। इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने विद्यालयों, महाविद्यालयों, स्वयंसेवी संगठनों, महिला समूहों और युवाओं से पौधारोपण अभियान में सक्रिय रूप से जुड़ने की अपील की।

अभियान के दौरान उन्होंने कहा कि हर परिवार यदि वर्ष में कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करे तो आने वाले वर्षों में राज्य का हरित क्षेत्र और अधिक विस्तृत हो सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए वृक्षारोपण सबसे प्रभावी उपायों में से एक है। अधिक पेड़ लगाए जाने से वर्षा, भूजल संरक्षण, स्वच्छ वायु और जैव विविधता को भी मजबूती मिलेगी।

हरित उत्तराखंड के लक्ष्य की ओर बढ़ता राज्य

राज्य सरकार लंबे समय से पर्यावरण संरक्षण और वन क्षेत्र को बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है। इन योजनाओं के अंतर्गत बड़े पैमाने पर पौधारोपण, जल स्रोतों का संरक्षण, वन संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन तथा इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को हरित और स्वच्छ राज्य बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लगाए गए पौधों की निगरानी की जाए ताकि उनकी जीवित रहने की दर अधिक से अधिक सुनिश्चित की जा सके।

हर्बल पार्क पर्यटन और रोजगार का भी बन सकते हैं माध्यम

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हर्बल पार्कों का वैज्ञानिक तरीके से विकास किया जाए तो वे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन और स्थानीय रोजगार के नए अवसर भी प्रदान कर सकते हैं। औषधीय पौधों पर आधारित अनुसंधान, प्रशिक्षण कार्यक्रम और प्राकृतिक पर्यटन गतिविधियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे सकती हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करते हुए उनका सतत उपयोग किया जाना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इनका लाभ उठा सकें।

युवाओं और विद्यार्थियों को प्रकृति से जोड़ने की पहल

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों और युवाओं से प्रकृति संरक्षण के लिए आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्कूलों और कॉलेजों में नियमित पौधारोपण अभियान, पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम और जैव विविधता से संबंधित गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आधुनिक विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि समाज प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझेगा, तभी सतत विकास का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकेगा।

हरेला बना पर्यावरण जागरूकता का प्रभावी माध्यम

कार्यक्रम ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि उत्तराखंड की पारंपरिक संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। मुख्यमंत्री द्वारा पौधारोपण और हर्बल पार्क के भ्रमण ने लोगों को प्रकृति संरक्षण, औषधीय पौधों के महत्व और हरित विकास की दिशा में प्रेरित किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हरेला जैसे पर्वों को जनभागीदारी, वैज्ञानिक सोच और दीर्घकालिक संरक्षण योजनाओं से जोड़ा जाए तो उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में देश के लिए एक आदर्श मॉडल बन सकता है। राज्य सरकार की हरित पहल और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भविष्य में उत्तराखंड को और अधिक स्वच्छ, हरित तथा पर्यावरण के प्रति जागरूक राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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