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भारत में Telegram Ban हटा, लेकिन 30 जून तक बंद रहेगा यह खास फीचर, जानिए सरकार ने क्यों उठाया कदम

Telegram ban lifted in India, but this specific feature will remain disabled until June 30; find out why the government took this step.

देशभर में करोड़ों लोगों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम को लेकर बड़ी राहत की खबर सामने आई है। नीट-यूजी री-एग्जाम के दौरान सुरक्षा और परीक्षा की निष्पक्षता को ध्यान में रखते हुए लगाया गया अस्थायी प्रतिबंध अब हटाया जा रहा है। केंद्र सरकार ने फिलहाल इस प्रतिबंध को आगे बढ़ाने का फैसला नहीं किया है, जिसके बाद 23 जून से टेलीग्राम एक बार फिर गूगल प्ले स्टोर और एप्पल ऐप स्टोर पर डाउनलोड के लिए उपलब्ध होने लगा है।

हालांकि, Telegram Ban India हटने के बाद भी यूजर्स को एक महत्वपूर्ण फीचर के लिए कुछ और दिनों तक इंतजार करना होगा। सरकार ने 30 जून 2026 तक मैसेज एडिट करने की सुविधा को अस्थायी रूप से बंद रखने का फैसला किया है।

NEET-UG री-एग्जाम के दौरान लिया गया था बड़ा फैसला

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) और गृह मंत्रालय की सिफारिश पर यह कदम उठाया था। अधिकारियों का मानना था कि कुछ संगठित गिरोह टेलीग्राम के माध्यम से परीक्षा से जुड़े फर्जी दावे और अफवाहें फैलाने की कोशिश कर रहे थे।

इसी को देखते हुए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A के तहत आपातकालीन अधिकारों का इस्तेमाल किया गया और 22 जून तक टेलीग्राम की सेवाओं पर अस्थायी रोक लगा दी गई थी। इसका उद्देश्य परीक्षा की शुचिता बनाए रखना और छात्रों के बीच भ्रम की स्थिति को रोकना था।

क्यों चर्चा में आया Telegram Ban India?

दरअसल, जांच एजेंसियों के सामने यह बात सामने आई थी कि कुछ लोग टेलीग्राम के मैसेज एडिटिंग फीचर का इस्तेमाल करके पेपर लीक के झूठे दावे कर रहे थे। वे परीक्षा से कई दिन पहले किसी चैनल या ग्रुप में सामान्य संदेश पोस्ट कर देते थे और परीक्षा समाप्त होने के बाद उसी संदेश को एडिट करके उसमें वास्तविक प्रश्नपत्र जोड़ देते थे।

टेलीग्राम की तकनीकी व्यवस्था के कारण एडिट किए गए संदेश पर पुराना टाइमस्टैम्प दिखाई देता है, जिससे ऐसा प्रतीत होता था कि प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले ही साझा कर दिया गया था। इस वजह से छात्रों और अभिभावकों के बीच भ्रम और चिंता की स्थिति पैदा हो रही थी।

यही वजह रही कि सरकार ने Telegram Ban India के दौरान सबसे पहले इसी फीचर पर सख्ती दिखाई और इसे 30 जून तक बंद रखने का निर्णय लिया।

30 जून तक बंद रहेगा मैसेज एडिटिंग फीचर

हालांकि टेलीग्राम की सेवाएं फिर से बहाल हो चुकी हैं, लेकिन भारतीय यूजर्स फिलहाल अपने भेजे गए संदेशों को एडिट नहीं कर पाएंगे। यह प्रतिबंध अस्थायी है और केवल 30 जून 2026 तक लागू रहेगा।

सरकारी अधिकारियों का मानना है कि इस अवधि के दौरान परीक्षा से जुड़ी सभी संवेदनशील प्रक्रियाएं पूरी हो जाएंगी और उसके बाद स्थिति सामान्य होने पर इस फीचर को दोबारा शुरू किया जा सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फर्जी सूचनाओं और भ्रामक दावों को रोकने के लिए इस तरह के कदम भविष्य में भी उठाए जा सकते हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले को माना उचित

टेलीग्राम कंपनी ने इस प्रतिबंध के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। कंपनी का तर्क था कि पूरे प्लेटफॉर्म को ब्लॉक करना उचित नहीं है और इससे लाखों सामान्य यूजर्स प्रभावित हुए हैं।

हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले को सही ठहराया। जस्टिस तेजस कारिया की एकल पीठ ने कहा कि सरकार ने कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए यह फैसला लिया है और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह कदम आवश्यक था।

अदालत ने माना कि सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा की निष्पक्षता को बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ रही निगरानी

हाल के वर्षों में सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स के माध्यम से फर्जी सूचनाओं के प्रसार के मामले तेजी से बढ़े हैं। ऐसे में सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निगरानी बढ़ाने और दुरुपयोग रोकने के लिए लगातार नए कदम उठा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक जितनी सुविधाजनक हो रही है, उसके दुरुपयोग की संभावनाएं भी उतनी ही बढ़ रही हैं। इसलिए प्लेटफॉर्म कंपनियों और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है कि वे पारदर्शिता और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखें।

यूजर्स के लिए राहत, लेकिन सतर्क रहने की जरूरत

Telegram Ban India हटने के बाद करोड़ों यूजर्स एक बार फिर सामान्य रूप से ऐप का इस्तेमाल कर सकेंगे। हालांकि, 30 जून तक मैसेज एडिटिंग फीचर बंद रहने से कुछ उपयोगकर्ताओं को असुविधा हो सकती है।

फिलहाल सरकार और एजेंसियां इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि भविष्य में किसी भी तरह की अफवाह या फर्जी जानकारी के जरिए परीक्षा व्यवस्था को प्रभावित न किया जा सके। वहीं, विशेषज्ञों ने भी यूजर्स से अपील की है कि वे किसी भी अपुष्ट जानकारी पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता जरूर जांचें।

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