उत्तराखंड

Uttarakhand Lokayukta Formation: लोकायुक्त गठन की दिशा में बड़ा कदम, अध्यक्ष और सदस्यों के चयन के लिए बनी सर्च कमेटी

Formation of Uttarakhand Lokayukta: A major step towards establishing the Lokayukta; search committee formed to select the Chairperson and members.

Uttarakhand Lokayukta Formation को लेकर लंबे समय से चल रही प्रतीक्षा के बीच राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य में लोकायुक्त संस्था को सक्रिय रूप से स्थापित करने की दिशा में अब चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी क्रम में सरकार ने लोकायुक्त के अध्यक्ष और सदस्यों के चयन के लिए पांच सदस्यीय खोजबीन समिति यानी सर्च कमेटी का गठन कर दिया है।

यह फैसला उत्तराखंड में सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी पहल माना जा रहा है। लंबे समय से लोकायुक्त संस्था के गठन की मांग उठती रही है और अब Uttarakhand Lokayukta Formation प्रक्रिया के आगे बढ़ने से प्रशासनिक तंत्र में जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए गठित हुई सर्च कमेटी

कार्मिक एवं सतर्कता विभाग के अनुसार उत्तराखंड लोकायुक्त अधिनियम 2014 के तहत गठित इस सर्च कमेटी का मुख्य उद्देश्य लोकायुक्त के अध्यक्ष और सदस्यों के लिए योग्य व्यक्तियों की पहचान करना है। समिति ऐसे नामों का पैनल तैयार करेगी जिन्हें बाद में चयन समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

सरकार का मानना है कि Uttarakhand Lokayukta Formation की सफलता काफी हद तक योग्य और निष्पक्ष व्यक्तियों के चयन पर निर्भर करेगी। इसी वजह से समिति में न्यायिक, प्रशासनिक और शैक्षणिक क्षेत्र की अनुभवी हस्तियों को शामिल किया गया है।

कौन-कौन हैं समिति के सदस्य?

गठित खोजबीन समिति की अध्यक्षता नैनीताल हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) आलोक वर्मा करेंगे। उनके अलावा समिति में उत्तराखंड के तीन पूर्व मुख्य सचिवों को भी सदस्य बनाया गया है।

इनमें सेवानिवृत्त मुख्य सचिव इंदु कुमार पांडे, सुभाष कुमार और राधा रतूड़ी शामिल हैं। साथ ही दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर सुरेखा डंगवाल को भी समिति में स्थान दिया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन अनुभवी व्यक्तियों की भागीदारी Uttarakhand Lokayukta Formation प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाएगी।

2023 में बनी थी चयन समिति

लोकायुक्त चयन समिति का गठन वर्ष 2023 में उत्तराखंड हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद किया गया था। इस समिति की अध्यक्षता मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कर रहे हैं।

समिति में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी, नैनीताल हाईकोर्ट के प्रतिनिधि मनोज कुमार तथा विधि विशेषज्ञ सदस्य के रूप में शामिल हैं। अब यही समिति सर्च कमेटी की सिफारिशों के आधार पर अंतिम चयन करेगी।

Uttarakhand Lokayukta Formation के लिए यह प्रक्रिया कानूनी और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप आगे बढ़ाई जा रही है।

क्या होगा सर्च कमेटी का काम?

उत्तराखंड लोकायुक्त अधिनियम 2014 की धारा 4(4) के अनुसार सर्च कमेटी योग्य उम्मीदवारों की पहचान करेगी। समिति विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों के नामों पर विचार करेगी और निर्धारित पात्रता मानकों के आधार पर उनका मूल्यांकन करेगी।

इसके बाद चयनित नामों का एक पैनल तैयार कर चयन समिति को भेजा जाएगा। अंतिम निर्णय चयन समिति द्वारा लिया जाएगा।

विशेषज्ञों के अनुसार Uttarakhand Lokayukta Formation में सर्च कमेटी की भूमिका बेहद अहम होती है क्योंकि यही संस्था योग्य उम्मीदवारों की प्रारंभिक जांच और मूल्यांकन करती है।

लोकायुक्त संस्था क्यों है महत्वपूर्ण?

लोकायुक्त को भ्रष्टाचार विरोधी स्वतंत्र निगरानी संस्था के रूप में देखा जाता है। इसका प्रमुख उद्देश्य जनप्रतिनिधियों, सरकारी अधिकारियों और लोकसेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और प्रशासनिक अनियमितताओं से जुड़ी शिकायतों की निष्पक्ष जांच करना होता है।

जब किसी राज्य में लोकायुक्त प्रभावी ढंग से कार्य करता है तो शासन व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ती है और जनता का भरोसा मजबूत होता है। इसी कारण Uttarakhand Lokayukta Formation को राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पारदर्शिता और जवाबदेही को मिलेगी मजबूती

सरकार का कहना है कि लोकायुक्त संस्था के गठन से प्रशासनिक जवाबदेही को और मजबूती मिलेगी। सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, वित्तीय अनुशासन और सार्वजनिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर बेहतर निगरानी संभव हो सकेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि Uttarakhand Lokayukta Formation राज्य में भ्रष्टाचार निरोधक तंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

आगे क्या होगा?

अब गठित सर्च कमेटी योग्य व्यक्तियों के नामों की तलाश और मूल्यांकन का कार्य शुरू करेगी। समिति द्वारा तैयार पैनल चयन समिति को भेजा जाएगा, जिसके बाद लोकायुक्त के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होगी। यदि यह प्रक्रिया समयबद्ध ढंग से पूरी होती है तो उत्तराखंड में लंबे समय से प्रतीक्षित लोकायुक्त संस्था जल्द सक्रिय रूप से कार्य करना शुरू कर सकती है।

 

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