उत्तर प्रदेश

Raju Pal Murder Case: 20 साल बाद बड़ा मोड़, दोषी आबिद को इलाहाबाद हाई कोर्ट से सशर्त जमानत

Raju Pal Murder Case: Major twist after 20 years; convicted Abid granted conditional bail by Allahabad High Court.

Raju Pal Murder Case में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दोषी करार दिए गए अभियुक्त आबिद को सशर्त जमानत प्रदान कर दी है। वर्ष 2005 में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) विधायक राजू पाल की हत्या ने पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति को झकझोर दिया था। अब लगभग दो दशक बाद इस मामले में हाई कोर्ट के फैसले ने एक बार फिर इस चर्चित हत्याकांड को सुर्खियों में ला दिया है।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने आपराधिक अपील में दाखिल जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। अदालत ने मामले से जुड़े साक्ष्यों, जांच प्रक्रिया और अभियुक्त की भूमिका का विस्तृत परीक्षण करने के बाद जमानत देने का निर्णय लिया।

25 जनवरी 2005 को हुई थी राजू पाल की हत्या

Raju Pal Murder Case की शुरुआत 25 जनवरी 2005 को हुई थी, जब प्रयागराज के धूमनगंज क्षेत्र में तत्कालीन बसपा विधायक राजू पाल पर दिनदहाड़े ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई गई थीं। इस हमले में राजू पाल की मौके पर ही मौत हो गई थी।

हमले में उनके साथ मौजूद देवीलाल पाल और संदीप यादव की भी जान चली गई थी, जबकि तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस घटना ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था और राजनीतिक अपराधों को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया था।

राजू पाल की हत्या के बाद पूरे प्रदेश में राजनीतिक हलचल मच गई थी और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई थी।

पत्नी पूजा पाल ने दर्ज कराया था मुकदमा

घटना के बाद राजू पाल की पत्नी पूजा पाल ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शुरुआती जांच स्थानीय पुलिस द्वारा की गई, लेकिन मामले की संवेदनशीलता और राजनीतिक महत्व को देखते हुए बाद में जांच सीबीसीआईडी को सौंप दी गई।

हालांकि जांच को लेकर लगातार सवाल उठते रहे। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को मामले की दोबारा जांच सौंपी गई। सीबीआई ने विस्तृत जांच के बाद कुल 10 आरोपितों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था।

ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी उम्रकैद की सजा

Raju Pal Murder Case में सुनवाई के दौरान ट्रायल कोर्ट ने आबिद सहित अन्य अभियुक्तों को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाया था।

अदालत ने आईपीसी की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश), 147 (दंगा), 148 (घातक हथियार के साथ दंगा), 307 (हत्या का प्रयास) और 302 (हत्या) के तहत सभी दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

इसके बाद दोषियों ने हाई कोर्ट में अपील दाखिल कर सजा और दोषसिद्धि को चुनौती दी थी।

हाई कोर्ट ने किन आधारों पर दी जमानत?

सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि Raju Pal Murder Case की मूल प्राथमिकी में आबिद का नाम शामिल नहीं था। अदालत ने यह भी कहा कि उसका नाम बाद में सह-अभियुक्तों के बयानों के आधार पर जांच में जोड़ा गया था।

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि आबिद की पहचान परेड कभी नहीं कराई गई। इसके अलावा उसके कब्जे से कोई हथियार, आपत्तिजनक सामग्री या ऐसा प्रत्यक्ष साक्ष्य भी बरामद नहीं हुआ, जो उसे सीधे तौर पर घटना से जोड़ता हो।

खंडपीठ ने इस संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय के हालिया फैसले तुकेश सिंह बनाम छत्तीसगढ़ (2025) का भी उल्लेख किया और कहा कि जमानत याचिका पर विचार करते समय इन तथ्यों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

लंबित अपीलों का भी पड़ा असर

हाई कोर्ट ने यह भी माना कि अदालत में बड़ी संख्या में आपराधिक अपीलें लंबित हैं। न्यायालय के अनुसार प्रतिदिन 200 से अधिक अपीलें सूचीबद्ध होती हैं, जिसके कारण निकट भविष्य में मामले की अंतिम सुनवाई संभव नहीं दिखाई देती।

ऐसी स्थिति में लंबे समय तक जेल में रहने और अपील के शीघ्र निस्तारण की संभावना कम होने को भी जमानत दिए जाने का एक महत्वपूर्ण आधार माना गया।

अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत का अर्थ दोषमुक्ति नहीं है और अंतिम निर्णय अपील की सुनवाई के बाद ही होगा।

अतीक अहमद और अशरफ की हो चुकी है मौत

Raju Pal Murder Case में मुख्य आरोपितों में पूर्व सांसद Atiq Ahmad और उनके भाई Ashraf Ahmad शामिल थे।

दोनों की ट्रायल के दौरान मौत हो चुकी है। उनके निधन के बाद मामले में कानूनी प्रक्रिया शेष आरोपितों के खिलाफ जारी रही। वर्तमान में इस मामले के अन्य दोषी न तो सांसद हैं और न ही विधायक।

राजनीतिक और कानूनी दृष्टि से अहम मामला

उत्तर प्रदेश की राजनीति में Raju Pal Murder Case को सबसे चर्चित और संवेदनशील मामलों में गिना जाता है। यह मामला केवल एक विधायक की हत्या तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने प्रदेश में राजनीतिक अपराध, न्यायिक प्रक्रिया और कानून-व्यवस्था को लेकर व्यापक बहस को जन्म दिया।

हाई कोर्ट द्वारा आबिद को सशर्त जमानत दिए जाने के बाद एक बार फिर यह मामला चर्चा में है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर लिया गया है, जबकि अंतिम निर्णय अपील की विस्तृत सुनवाई के बाद ही सामने आएगा।

फिलहाल, Raju Pal Murder Case में हाई कोर्ट के इस आदेश ने लगभग 20 वर्ष पुराने मामले को एक बार फिर सार्वजनिक और राजनीतिक विमर्श के केंद्र में ला खड़ा किया है।

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