उत्तराखंड

Haridwar Greenfield Highway: हरिद्वार के 12 गांवों में जमीन खरीद-फरोख्त पर लगी रोक, प्रशासन का बड़ा फैसला

Haridwar Greenfield Highway: Ban Imposed on Land Transactions in 12 Haridwar Villages—Major Decision by the Administration

हरिद्वार जिले के लक्सर क्षेत्र में प्रस्तावित Haridwar Greenfield Highway परियोजना को लेकर प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देश पर तहसील लक्सर के 12 गांवों में जमीन की खरीद-फरोख्त, रजिस्ट्री, बैनामा और भूमि उपयोग परिवर्तन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। प्रशासन का कहना है कि यह फैसला प्रस्तावित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से लिया गया है।

यह निर्णय सामने आते ही प्रभावित गांवों के किसानों, भूमि स्वामियों और निवेशकों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। कई लोग यह जानना चाह रहे हैं कि आखिर यह रोक क्यों लगाई गई और इसका उनके भविष्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

पानीपत-गोरखपुर मार्ग का हिस्सा बनेगा Haridwar Greenfield Highway

जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में शामिल Haridwar Greenfield Highway पानीपत से गोरखपुर तक प्रस्तावित ग्रीनफील्ड राष्ट्रीय राजमार्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह हाईवे कई राज्यों को बेहतर सड़क संपर्क प्रदान करेगा और माल परिवहन को भी गति देगा।

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा तैयार किए जा रहे इस कॉरिडोर का एक हिस्सा हरिद्वार जिले के लक्सर क्षेत्र से होकर गुजरेगा। इसी कारण प्रशासन ने प्रभावित गांवों में जमीन संबंधी गतिविधियों पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है।

किन गांवों में लागू हुई रोक?

जिला प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार लक्सर तहसील के 12 गांव इस प्रतिबंध के दायरे में आए हैं। इनमें मदारपुर, मिर्जापुर उर्फ मोहनवाला, पौडोवाली, टांडा जलालपुर, प्रहलादपुर, रघुनाथपुर उर्फ बालावाली, बालचन्दवाला, अलामपुर, हस्तमौली, शाहपुर, गिद्धावाली और कलसिया गांव शामिल हैं।

इन गांवों में अब किसी भी प्रकार की भूमि खरीद-बिक्री नहीं हो सकेगी। इसके अलावा रजिस्ट्री, बैनामा, भूमि उपयोग परिवर्तन और नए निर्माण कार्यों पर भी रोक रहेगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी होने तक प्रभावी रहेगा।

क्यों जरूरी समझा गया यह कदम?

विशेष भूमि अध्यापन अधिकारी आकाश जोशी के अनुसार, प्रस्तावित Haridwar Greenfield Highway परियोजना के अंतर्गत किलोमीटर 20 से 32 तक भूमि अर्जन की प्रक्रिया शुरू की जानी है। इसके लिए राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम 1956 की धारा 3ए के तहत कार्रवाई प्रस्तावित है।

भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने से पहले कई बार जमीनों की खरीद-फरोख्त तेजी से बढ़ जाती है। इससे मुआवजे और स्वामित्व को लेकर विवाद पैदा हो सकते हैं। प्रशासन का मानना है कि प्रतिबंध लगाने से ऐसे मामलों को रोका जा सकेगा और वास्तविक भूमि स्वामियों को उचित लाभ मिल सकेगा।

किसानों और भूमि स्वामियों में बढ़ी उत्सुकता

प्रशासनिक आदेश के बाद प्रभावित गांवों के किसानों और जमीन मालिकों के बीच मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग मानते हैं कि राष्ट्रीय महत्व की परियोजना क्षेत्र के विकास में सहायक साबित होगी, जबकि कुछ लोग अपनी कृषि भूमि को लेकर चिंतित भी हैं।

कई ग्रामीणों का कहना है कि यदि उनकी भूमि अधिग्रहित की जाती है तो उन्हें उचित मुआवजा और पुनर्वास की सुविधा मिलनी चाहिए। वहीं कुछ लोगों को उम्मीद है कि Haridwar Greenfield Highway बनने के बाद क्षेत्र में व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

क्षेत्रीय विकास को मिल सकती है नई रफ्तार

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीनफील्ड हाईवे परियोजनाएं केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि इनके माध्यम से आसपास के क्षेत्रों का आर्थिक और सामाजिक विकास भी होता है। बेहतर सड़क संपर्क से उद्योग, पर्यटन, कृषि और परिवहन क्षेत्र को सीधा लाभ मिलता है।

हरिद्वार और लक्सर क्षेत्र पहले से ही औद्योगिक और कृषि दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ऐसे में Haridwar Greenfield Highway के निर्माण से क्षेत्र की कनेक्टिविटी मजबूत होगी और निवेश की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।

प्रशासन ने लोगों से की सहयोग की अपील

जिला प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों के लोगों से सहयोग करने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया कानून के अनुसार पारदर्शी तरीके से की जाएगी। साथ ही सभी जरूरी औपचारिकताओं का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति को गलत जानकारी या अफवाहों पर विश्वास नहीं करना चाहिए। भूमि अधिग्रहण से संबंधित सभी सूचनाएं समय-समय पर आधिकारिक माध्यमों से जारी की जाएंगी।

आने वाले समय में बढ़ सकती है गतिविधियां

भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के प्रारंभिक चरण के बाद सर्वेक्षण, मुआवजा निर्धारण और अन्य प्रशासनिक कार्यों में तेजी आने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना हरिद्वार जिले की आधारभूत संरचना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

फिलहाल, Haridwar Greenfield Highway को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज हो चुकी हैं और 12 गांवों में जमीन खरीद-फरोख्त पर लगी रोक इसी दिशा में उठाया गया पहला बड़ा कदम माना जा रहा है।

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